Thursday, September 29, 2022

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देश की वो 11 वीरांगनाएं जिन्होंने अपनी जिंदगी राष्ट्र के लिए समर्पित कर दी

हमारे देश की महिलाएं हमेशा देश के लिए तत्पर रही हैं आजादी से पूर्व भी और आज 21वीं सदी में भी। अगर कहीं भी महिला सशक्तिकरण की चर्चा होती तो देश के उन वीरांगनाओं का जिक्र अवश्य होता है जो अपने जान की परवाह किए बिना पुरुषों के साथ कदम-से-कदम मिलाया है। उन वीरांगनाओं में रानी लक्ष्मीबाई का जिक्र तो अवश्य ही आता है। लेकिन उनकी तरह हमारे देश में ऐसी कई और वीर महिलाएं हुई हैं जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

आइए इस लेख द्वारा हम उन महान वीरांगनाओं पर प्रकाश डालते हैं….

रानी चेन्नम्मा

रानी चेन्नम्मा उन हिंदुस्तानी शासकों में से है जिन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए सर्वप्रथम युद्ध लड़ा था। उन्होंने सन 1857 के विद्रोह से लगभग 33 वर्ष पूर्व दक्षिण के राज्य कर्नाटक में शस्त्रों से लैस सेना के साथ गोरों से युद्ध किया और हंसते-हंसते वीरगति को प्राप्त हुई। आज उन्हें कर्नाटक की सर्वश्रेष्ठ बहादुर महिला के नाम से स्मृत किया जाता है।

11 heroines of the India

रानी लक्ष्मीबाई

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। अब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को कौन नहीं जानता। कहीं भी महिला सशक्तिकरण का चर्चा होता है तो रानी लक्ष्मीबाई का जिक्र अवश्य किया जाता है। सन 1857 के विद्रोह में होने हिस्सा लेने वाली प्रमुख महिला रानी लक्ष्मीबाई थी। उनके वीरता की तारीफ अंग्रेजों ने भी की थी। वह अपनी वीरता के कारण लोगो एवं बच्चों में हमेशा ही जोश पैदा कर देती है।

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बेगम हजरत महल

बेगम हजरत महल 1857 के युद्ध के सर्वश्रेष्ठ चेहरों में जानी जाती हैं। वाजिद अली शाह को मटियाबुर्ज में जंगे आजादी के दौरान नजरबंद हुए थे उन्हें छुड़ाने के लिए लॉर्ड कैनिंग के सिक्योरिटी को भी सेंध दिया। आगे उन्होंने लखनऊ पर अपना हुकम जमाया और बेटे को अवध का राजा बनाया। वह हाथी पर चढ़कर युद्ध के मैदान में अपने फौज का हिम्मत बढ़ाया करती थी।

11 heroines of the India

एनी बेसेंट

हिंदुस्तानी होम रूल एवं थिगोसोफिकल समाज आंदोलन में अहम भूमिका अदा की है। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1847 को तत्कालीन यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के लंदन में हुआ। जब वह इंडिया आई तो उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए युद्ध किया। महिलाओं को वोट जैसे अधिकारों की मांग करते हुए उन्होंने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखना प्रारंभ किया और उसे लिखती रही। उन्होंने होमरूल आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण योगदान दी है।

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भीकाजी कामा

भीकाजी कामा क्रांतिकारी भाषाओं एवं प्रेरक के लिए जानी जाती हैं। वह विदेश देश एवं विदेश दोनों में लैंगिक समानता की वकालत के लिए प्रसिद्ध है। एक वरिष्ठ लीडर के तौर पर उन्होंने अहम सामाजिक मुद्दों पर विश्व का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। 22 अगस्त 1907 स्टटगार्ट जर्मनी में इंटरनेशनल सोसायटी सम्मेलन में पताका लहराया जिसे आजादी का पहला पताखा कहा।

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सुचेता कृपलानी

सुचिता जो कि भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुई वह हमारे देश के अहिंसा वादी गांधीजी के बेहद करीब थी। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वह अधिक महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनी। उन्होंने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए काफी प्रेरित भी किया। 1946 से 1947 में विभाजन के दंगों के दौरान संप्रदायिक तनाव शमन में अहम भूमिका अदा की। भारतीय संविधान सभा में उन्होंने वंदे मातरम् को गाया।

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सरोजिनी नायडू

सरोजिनी नायडू सभी महिलाओं के लिए उदाहरण है। वह “भारत कोकिला” के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने 1930 से 34 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में हिस्सा लिया था। वह वर्ष 1950 में स्वतंत्र भारत की प्रथम महिला गवर्नर बनी। उनके इंग्लिश कविताओं के संग्रह आज भी महत्वपूर्ण भारतीय लेखन में हमें देखने को मिलते हैं।

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अरुणा आसफ अली

अरुणा आसफ अली कांग्रेस पार्टी की मेंबर रही हैं। उन्होंने आजादी के अतिरिक्त तिहार जेल की राजनैतिक कैदियों के हक के लिए भी युद्ध किया है। नमक सत्याग्रह में भी उन्होंने भाग लिया और अन्य लोगों को अपने साथ जोड़ा। उन्हें अपने लड़ाई के ज़ज़्बे के बदौलत अंग्रेजों ने कैद कर लिया। परंतु उन्होंने जेल के दीवारों में रहते हुए भी अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने तिहाड़ जेल के अंदर विरोध प्रदर्शन किया जिस कारण तिहाड़ के कैदियों के स्थिति में काफी परिवर्तन हुआ।

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कमला नेहरू

जब कमला का विवाह हुआ तो वह इलाहाबाद चली गई। वह अपने शांत स्वभाव के लिए जानी जाती थी। परंतु जब उन्हें धरने जुलूस में अंग्रेजों का सामना किया तो उनका अलग अवतार लोगों ने देखा। वह भूख हड़ताल कीं एवं जेल की कठोर भूमि पर सोया करती थी। इंदिरा की उदाहरणों में उनके लिए हमारे देश की स्वतंत्रता ही सबसे ऊपर थी। वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की पत्नी थी और उन्होंने अपने पति के साथ कदम से कदम बढ़ा कर आजादी में उनका सहयोग किया। उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं असहयोग आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

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लक्ष्मी सहगल

वैसे तो लक्ष्मी सहगल पेशे से डॉक्टर थी। परंतु उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसके साथ उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं के तौर पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अखंड सेवक के तौर पर भारतीय राष्ट्रीय सेना में शामिल हुईं। वर्ष 1998 में उन्हें पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।

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दुर्गा बाई देशमुख

11 heroines of the India

महात्मा गांधी के विचारों से दुर्गा बाई अधिक प्रभावित थीं। उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन में हिस्सा लिया एवं आज़ादी में एक एडवोकेट, सामाजिक कार्यकर्ता तथा राजनेता के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

Khushboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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