Wednesday, October 5, 2022

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आंध्र प्रदेश के पांचवीं पास किसान ने धान के पुवाल से बनाई साड़ी, लोगों इस साड़ी को खूब पसंद किया

अपनी फसलों की कटाई करने के बाद खेत में जो अवशेष रह जाते हैं उन्हें खाद बनाकर खेत में या चारे के रूप में पशुओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इन अवशेषों के ज्यादा इस्तेमाल नहीं है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आंध्र प्रदेश के प्रकाशन जिले के प्रचुर मंडल के गांव वीरन्ना पालेम के निवासी Muvva Chinna Krishnamurthy’s ने धान के पुआल से साड़ी बनाई है। 70 वर्षीय यह किसान अपने इस कारनामे से काफी चर्चा में है।

कहां से मिला आईडिया?

कृष्णमूर्ति ने BBC को बताया कि- जब वह खेती करने के दौरान वालों को देखते थे तब उन्हें यह ख्याल आता था कि इसके तीन को से कपड़ा बनाया जा सकता है। सूखी घास को लेकर किए गए उनके पहले प्रयोग ने लोगों का आकर्षण भी प्राप्त किया और उन्हें इसके लिए इनाम भी मिला। एक प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने सूखी घास से खेती में उपयोग होने वाले काफी चीजें को बनाया। इसी बीच उनके दिमाग में यह विचार आया कि क्यों न पुआल से कपड़े बनाए जाएं। इसके बाद ही उन्होंने 40′ 20 का कपड़ा बुना। इस अद्भुत कलाकारी के लिए उन्हें नंदी अवार्ड में मिला। यहीं से प्रेरणा प्राप्त करके उन्होंने सारी बोलने का प्रयास किया और सफल भी रहे। Muvva Chinna Krishnamurthy’s created saree made up of rice straw

राष्ट्रपति से भी हो चुके हैं सम्मानित

कृष्णमूर्ति को अपने इस अनोखे कारनामे के लिए भारतीय राष्ट्रपति के साथ-साथ राज्य सरकार वह कई और लोगों से प्रशंसा भी प्राप्त हुई। इसके अलावा उनके द्वारा बनाई गई पुआल की साड़ी को अलग-अलग स्थानों पर होने वाली एग्जिबीशंस में रखा गया और उनके इस कारनामे ने दर्शकों से काफी तारीफें बटोरी।

पांचवी कक्षा तक की है पढ़ाई

70 वर्षीय कृष्णमूर्ति के पिता की या ख्वाहिश थी कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त करें लेकिन कृष्णमूर्ति का ध्यान हमेशा ही खेती-बाड़ी में लगा रहता था इसलिए उन्होंने पांचवी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी।

इतनी सराहना प्राप्त करने के बाद कृष्णमूर्ति की यही ख्वाहिश है कि उन्हें कलाकार पोक कोटे से पेंशन मिल जाए ताकि वह आने वाली पीढ़ियों को भी कला सिखा सकें।

Amit Kumar
Coming from Vaishali Bihar, Amit works to bring nominal changes in rural background of state. He is pursuing graduation in social work and simentenusly puts his generous effort to identify potential positivity in surroundings.

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