Tuesday, October 4, 2022

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इन 8 तरीकों से तैयार करें खुद का वर्टिकल गार्डन, घर की खूबसूरती में लगा देगा चार चांद

अगर आप अपना एक वर्टिकल (लंबवत) गार्डन लगाना चाहते हैं और आपको यह समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे करें तो आइए आज हम आपको बेंगलुरु के स्वाति द्विवेदी के गार्डिनिंग टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होनें बहुत हीं कम जगह में हरियाली हीं हरियाली उगा दी हैं। आप उनके टिप्स को जानकर आसानी से खुद का भी वर्टिकल गार्डन सेट कर सकते हैं। इस तकनीक से आप कम जगह में बहुत सारे हरियाली को अपने घर में बालकोनी में या दीवारों सजा सकते हैं।

भारत का पहला वर्टिकल गार्डन

पहली बार फ्रांस के पैट्रिक ब्लैंक वनस्पतिशास्त्री ने 1980 के दशक में आधुनिक ऊर्ध्वाधर (सीधा ऊंचाई में खड़ा) गार्डिनिंग का तरीका इस समाज को भेंट में दिया था। इस तकनीक को हीं हम वर्टिकल गार्डन कहते हैं। आपको बता दें कि भारत का पहला वर्टिकल गार्डन 2017 में बेंगलुरु के होसुर रोड फ्लाईओवर पर दिखाई दिया था। उसके बाद शहरों में कई सार्वजनिक स्थानों पर जैसे फ्लाईओवर, भवन का अग्रभाग, बंजर दीवार या खंभों पर वर्टिकल गार्डिनिंग तरीके से हरे-भरे पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे उस जगह की सुंदरता तो बढ़ी हीं है साथ हीं यह प्रदूषण नियंत्रण का भी काम करता है।

वर्टिकल गार्डिनिंग (ऊर्ध्वाधर बागवानी ) की विशेषता

ऊर्ध्वाधर बागवानी की विशेषता यह है, कि इसमें कम क्षेत्र वाले जगह को भी बहुत अच्छे से उपयोग किया जा सकता है। इस तरीके से ग्रिल और दीवारों पर भी बहुत आसानी से पौधे लगाए जा सकते हैं। बागवानी विशेषज्ञ स्वाति द्विवेदी बताती हैं कि वे बेंगलुरु में ऐसे उद्यानों में घूमी हैं और उनका अच्छे से जायजा ली हैं तब जाकर उन्होंने खुद के घर पर यह गार्डन लगाया है।

घर की दीवारों को हरा-भरा बनाया जा सकता है

स्वाती के अनुसार इस तरीके से कंजेस्टेड स्थान पर भी अच्छे से सफलतापूर्वक पौधे लगाए जा सकते हैं, और घर के दीवारों को भी कुछ गमलों और बर्तनों से बहुत हीं ख़ूबसूरती से सजाया जा सकता है। जिससे आप अपने घरों में एक हरी-भरी दीवार बना सकते हैं।

घर की खूबसूरती को कई गुणा बढ़ा देगा यह वर्टिकल गार्डन

स्वाती बताती हैं कि आजकल हमारे अधिकांश घरों में रेलिंग और ग्रिल रहते हैं। खिड़कियों का ग्रिल या फिर बालकोनी का रेलिंग इतना मज़बूत होते हैं कि वे बर्तनों को मजबूती से पकड़ सकें, जो आजकल मार्केट में लटके हुए हुक के साथ आते हैं। ऐसे बर्तन आसानी से बाज़ार में मिल जाते है जिनकी कीमत लगभग 20 रूपए से शुरु है। आप इसके लिए चार से छह इंच के बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि छोटे बर्तन वजन में हल्के होते हैं। इस तरीके से आप अपने ग्रिल और बालकोनी को वर्टिकल गार्डन का रूप दे सकते हैं, जो आपके घर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देगा और उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा।

कस्टम-मेड फ्रेम के अभाव में लोहे की फ्रेम या लकड़ी की अलमारियों का इस्तेमाल कर सकते हैं

अगर आप ऐसे स्थान पर हैं जहां आपको हुक वाले बर्तन ना मिले पाए तो स्वाती इसके लिए भी सुझाव देती हैं। आप अपने आस-पास के वेल्डर या बढ़ई से एक फ्रेम बनवा सकते हैं। आप लकड़ी का स्टैंड बनवा कर उसे खाली दीवार पर लगा सकते हैं। ऐसी अलमारियों पर सिरेमिक वाले हल्के-फुल्के भारी बर्तन रखे जा सकते हैं। आपके पास दूसरा तरीका भी है, आप चाहें तो लोहे के तार या छड़ का एक जाल बनवा लें और उसके सहारे भी आप बर्तनों को लटका सकते हैं। इस तरह के फ्रेम को बनवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि प्रत्येक छड़ सपाट हो और आपकी बर्तनों के हुक की चौड़ाई से मेल खा रहा हो।

ऑनलाइन ग्रीन वॉल सेटअप (रेडीमेड फ्रेम) शॉपिंग

स्वाती ने ऐमजॉन से रेडीमेड स्ट्रक्चर (फ्रेम) खरीदी है। स्वाती बताती हैं कि ई-कॉमर्स वेबसाइट हमें बहुत प्रकार के संयोजन योग्य संरचनाएं देती है, जो उनकी पोर्टेबिलिटी के लिए ठीक है। वे एक मैनुअल के साथ आते हैं जो हमें बताते हैं कि फ्रेम को कैसे सेट किया जाए। इनकी कीमत लगभग 1,000-1,200 होती है।

अनिल थडानी का हाइड्रोपोनिक खेती के लिए सुझाव

अनिल थडानी जो पौधशाला के संस्थापक हैं, वे कहते हैं कि हाइड्रोपोनिक खेती से किसी के घर में बहुत कम जगह में साग लगाने का बहुत उत्तम तरीका है। यह विधि मुख्य रुप से जल प्रवाह पर आधारित है। कम्पोस्ट और कोकोपीट से भरे प्यालों में पौधे को लगाकर उसपर हाइड्रोपोनिक प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस प्रणाली से पौधों को सभी पोषक तत्व पानी और पॉटिंग मिक्स द्वारा दिए जाते हैं। हाइड्रोपोनिक हल्की और आसानी से प्रबंधनीय रहती है, जिससे मिट्टी का उपयोग समाप्त हो जाता है।

हाइड्रोपोनिक सेटअप खरीदने का सुझाव

अनिल थडानी बताते हैं कि हाइड्रोपोनिक्स का शुरुआती निवेश थोड़ा अधिक है, जो लगभग 320 रुपये प्रति वर्ग फुट है, फिर भी वो हाइड्रोपोनिक सेटअप को बनाने के बजाय खरीदने का हीं सुझाव देते हैं। ऐसा इसलिए कि इस प्रणाली को स्थापित करने के लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। क्योंकि अगर जल निकाय में थोड़ी सी भी अक्षमता हुई तो वो आपके पौधों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है।

वर्टिकल गार्डन में इन बातों का रखें खास ख्याल

वर्टिकल गार्डन (ऊर्ध्वाधर उद्यान) के लिए आपने जो पौधे चुनें हैं उसके प्रति आपको सचेत रहना होगा। गार्डन में ऐसे बहुत से पौधे होंगे जिन्हें समान धूप और पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन दो ऐसे पौधे जिन्हें अलग-अलग मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है और वह एक साथ हों तो परेशानी हो सकती है, उदाहरण के लिए, एक कैक्टस को फ़र्न के साथ उगाना गलत साबित हो सकता है। आपको ऐसे पौधे लगाना चहिए जिनकी आप समान रूप से देखभाल और सिंचाई कर सकें और एक ही स्थान पर स्थापित कर सकें।

ऐसे पौधे जो कुछ दिन तक बिना पानी के जीवित रह सकें

सूखा प्रतिरोधी पौधे शुरू करना एक अच्छा तरीका हो सकता है क्योंकि उन्हें न्यूनतम रखरखाव में भी रखा जा सकता है और वो कुछ दिनों तक बिना पानी के भी जीवित रह सकते हैं। ऐसे पौधों में कोकोपीट और खाद का मिश्रण तैयार कर के डालना ठीक रहेगा। ये सामग्रियां मिट्टी की तुलना में हल्की होती हैं, ये पौधों को हल्का रखेगी और उन पौधों की मदद करेंगी जो एक सपोर्ट से लटक रहे हैं।

अगर आप दीवार पर वर्टिकल गार्डन स्थापित कर रहे हैं, तो दीवार का भी ख्याल रखें। इसके लिए नमी और अन्य क्षति की जांच करें और इसे कवर करने के लिए प्लास्टिक शीट का उपयोग करें। वर्टिकल गार्डन बनाने का मकसद शहर को साफ़-सुथरा और प्रदूषण मुक्त बनाना है।

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