Tuesday, October 4, 2022

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बेहद हीं प्रेरणादायक है विनोद के एक मजदूर से IAS बनने तक का सफर: जानिए कैसे पाई सफलता

यदि आपमें आगे बढ़ने का जज्बा और काबिलियत हो तो कोई भी विषम परिस्थितियां आपको डिगा नहीं सकती। आप अपने सटीक और निरंतर प्रयास से हर बाधाओं को पार कर अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं।

आज बात एक शख्स विनोद कुमार सुमन (Vinod Kumar Suman) की जिन्होंने अपनी गरीबी को अपनी सफलता के मार्ग का बाधक बनने नहीं दिया बल्कि उसे जूझते हुए आगे बढ़े और IAS बन कर सफलता का मिसाल पेश किया। आईए जानते हैं उनके बारे में…

विनोद कुमार सुमन (Vinod Kumar Suman) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के भदोही (Bhadohi) स्थित जखाऊं गांव रहने वाले हैं। उनका जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। परिवार में आमदनी का एक मात्र साधन कृषि थी लेकिन जमीन कम रहने के कारण से भी कुछ खास आमदनी नहीं हो पाती थी। अपने परिवार के लालन पालन और 2 जून की रोटी जुटाने के लिए विनोद कुमार सुमन के पिता कृषि के साथ-साथ हैं कालीन बुनने का भी काम किया करते थे।

विनोद को पढ़ाई में बचपन से ही गहरी रुचि थी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात विनोद अपने पिता के कार्यों में मदद किया करते थे विनोद चुकी अपने भाई बहनों में सबसे बड़े थे या उनका कर्तव्य बनता था कि वह पिता के काम में मदद करें। किसी तरह उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई भी जारी रखना चाहते थे लेकिन आर्थिक कमजोरी उनकी भाई के मार्ग में बड़ी बाधक बन कर खड़ी थी।

विनोद किसी भी कीमत पर अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहते थे इसलिए उन्होंने शहर का रुख किया वे चाहते थे कि शहर जाकर कुछ काम करें और उसी पैसे से वे आगे की पढ़ाई पूरी करें। विनोद श्रीनगर के गढ़वाल की ओर निकल गए। विनोद के पास पहने हुए कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं था इसलिए गढ़वाल पहुंचकर एक मंदिर में जाकर उन्होंने पुजारी से शरण मांगी और वहीं रुके। अगले दिन काम की तलाश में निकल पड़े उन दिनों वहां सुना शौचालय का निर्माण कार्य चल रहा था विनोद ने ठेकेदार से खुद के लिए काम मांगा काफी आग्रह के बाद विनोद को हम मजदूरी का काम मिला।

मजदूरी कर, ट्यूशन पढ़ा पूरी की अपनी पढ़ाई

मजदूरी करते हुए कुछ वक्त गीता इसके बाद विनोद ने श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी में स्नातक के लिए नामांकन करवाया। गणित उनके फेवरेट सब्जेक्ट में एक था इसलिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ाने का भी काम शुरू किया। विनोद दिन में मजदूरी करते और रात में ट्यूशन पढ़ाते। कमाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी और अब वे खुद के खर्चे के साथ कुछ पैसे घर भी भेजने लगे। इस तरह विनोद ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की जिसके बाद पिता के कहने पर इलाहाबाद चले गए और वहां से एमए की पढ़ाई पूरी की।

MA की पढ़ाई पूरी करने के बाद विनोद के कदम रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने लोक प्रशासन में रोमा किया और प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने लगे। उसी दौरान महालेखाकार ऑफिस में उन्हें लेखाकार के पद पर नौकरी लग गई कुछ समय पश्चात् 1997 में उनका चयन पीसीएस में हुआ इस तरह विनोद कुमार सुमन सफलता दर सफलता हासिल करते हुए आगे बढ़ते रहे।

कई महत्वपूर्ण पद पर नौकरी देने के बाद वर्ष 2008 में उन्हें IAS कैडर मिला। विनोद देहरादून में SDM, सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा कई जिलों में एडीएम गन्ना आयुक्त, निदेशक समाज कल्याण, सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। वर्तमान में विनोद अल्मोड़ा के जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। विनोद कुमार सुमन का मानना है कि यदि निश्चय दृढ़ हो तो कोई भी चुनौती मनुष्य को अपने लक्ष्य से हिला नहीं सकता है।

गरीबी के जिस परिस्थिति से खुद को अपनी मेहनत से निकालकर सफलता की पराकाष्ठा की जो अपने आप में एक मिसाल है।

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