Friday, September 30, 2022

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देश में एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है जिसे रेलवे नहीं अपितु उस गांव के लोग चलाते हैं

यह तो हम सब जानते है कि भारत के सीमा में आने वाला हर रेलवे स्टेशनों का संचालन और उसकी देख-रेख भारतीय रेलवे करता है, लेकिन हमारे देश में एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है जिसका संचालन भारतीय रेलवे नहीं बल्कि उस गांव के लोग करते है। गांव वालों के हाथों में ही इस रेलवे स्टेशन की पूरी ज़िम्मेदारी है। अब आप सोच रहे होंगे कि क्यों इस रेलवे स्टेशन की जिम्मेदारी गांव वालों पर है। – The entire responsibility of Jalsu railway station is on the villagers.

जलसु स्टेशन की जिम्मेदारी गांव वालों पर है

आज हम आपको अनोखे भारतीय रेलवे स्टेशन जिसे गांव वाले चलाते हैं उसके पीछे का रहस्य बताएंगे। भारत के इस अनोखे रेलवे स्टेशन का का नाम Jalsu Nanak Halt railway station है। यह अनोखा रेलवे स्टेशन राजस्थान के नागौर जिलेले से करीब 82 किमी की दूरी पर स्थित है। जानकारी के अनुसार इस रेलवे स्टेशन का पूरा संचालन यहां के गांव वालों के जरिए होता है।

A railway station which is run by villagers

30 हजार से ज्यादा है आय

जलसु स्टेशन पर वहां के गांव वाले ट्रेन का टिकट काटने से लेकर इस स्टेशन का पूरा ध्यान भी रखते हैं। इस स्टेशन पर 10 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं और जानकारों की मानें तो इससे अब 30 हज़ार से ज्यादा का आय हो चुका है। यहां हर महीने 1500 टिकट बेचे जाते हैं यानी 50 टिकट रोजाना। इस रेलवे स्टेशन को साल 1976 में चालू किया गया था और इसे पहले भारतीय रेलवे ही चलाता था। – The entire responsibility of Jalsu railway station is on the villagers.

A railway station which is run by villagers

गांव वालों ने 11 दिनों तक धरने पर बैठ कर स्टेशन खुला रखा

हालांकि एक पॉलिसी के तहत उन सभी स्टेशनों को बंद करने का आदेश दिया गया था, जो कम रेवेन्यू वाले थे। इसमें जालसू नानक हाल्ट रेलवे स्टेशन भी शामिल था, जिसे 2005 में बंद करने का आदेश दिया गया था, लेकिन गांव वालों ने इसका विरोध किया और 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहे जिसे बाद में एक शर्त पर खोलने की बात रखी गई कि गांव वालों को ही इसे चलाना होगा। गांव वालों ने सरकार की इस शर्त को मान लिए और आपस में चंदा इकट्ठा करके डेढ़ लाख रुपए से 1500 टिकट खरीदे गए और बाकी पैसे निवेश में लगा दिया गया।

A railway station which is run by villagers

फौजियों के आवागमन के लिए इस रेलवे स्टेशन की शुरुआत की गई थी

गांव वालों ने 5 हजार की सैलरी पर एक ग्रामीण को टिकट बेचने का काम दिया गया। इस गांव को फौजियों का गांव कहा जाता है क्योंकि यहां से लगभग 200 जवान भारतीय सेना में हैं और 250 से ज्यादा रिटायर्ड पर्सन हैं। खासतौर पर फौजियों के आवागमन के लिए हीं इस रेलवे स्टेशन की शुरुआत की गई थी। अब गांव वाले चाहते हैं कि इस स्टेशन को भारतीय रेलवे फिर से अपने हाथों में ले ले। – The entire responsibility of Jalsu railway station is on the villagers.

प्रियंका ठाकुर
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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