Wednesday, October 5, 2022

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इस IFS अधिकारी ने प्लास्टिक कचरे से लगा दिया बायोगैस प्लांट, कई लोगों को मिला रोजगार

प्लास्टिक कचरा हमारे पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है। यह कचरा हर प्रकार से हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करता है। इसके रोकथाम और इसे नष्ट करने के लिए हमारे पास ढंग के उपाय भी नहीं है।

मध्यप्रदेश में मैहर वन प्रमंडल में 4.7 लाख पेड़ पौधों के रोपण की वार्षिक ड्राइव के बाद जब भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी अनुपम शर्मा जब निरीक्षण के लिए जब क्षेत्र गए तब वहां पर 5000 किलो प्लास्टिक कचरे को जमा देख उनके होश उड़ गए।

उतने बङे पैमाने बार जमा कचरे को नष्ट करने के लिए कोई वैध तरीका नजर नहीं आ रहा था। अगर उन कचरे को अनियंत्रित ही छोड़ दिया जाता तो पर्यावरण को वर्षों तक नुकसान पहुंचता।

पत्नी ने दिया कचरा प्रबंधन का सुझाव

इतने बड़े पैमाने पर कचरे के प्रबंधन के लिए उन्होंने स्थानीय निकायों से संपर्क किया लेकिन उन्हें वहां से कोई मदद प्राप्त नहीं हुई। इस कचरे को जलाया भी नही जा सकता था क्योंकि इससे वायु प्रदूषण हो सकता था।

अनुपम ने प्लास्टिक के कचरे को कानिकाओ (Granules) में बदलने के लिए एक इकाई की स्थापना की और उसके जरिए उन्होंने आसपास के गांव वालों को रोजगार के अवसर प्रदान किए। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह संभव नहीं हो सका।

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर और रिसर्च करने के बाद अनुपम को यह पता चला कि एक स्क्रैप डीलर ₹12 प्रति किलो के हिसाब से कचरा खरीदने और उसे सुनिश्चित करने के लिए इंदौर और जबलपुर के रीसाइक्लिंग प्लांट तक पहुंचाने के लिए सहमत है।

इन सभी कार्यों के बीच एक शर्त थी कि प्लास्टिक के कचरे को अच्छा दर प्राप्त हो सके इसलिए कचरे को साफ करने की भी जरूरत थी। विभाग में इस काम को सुनिश्चित करने के लिए प्लास्टिक को साफ करने हेतु प्रदर्शन किया ताकि मिट्टी, कंकर, कैन यू और अन्य कचरे को रगङकर स्वास्तिक को साफ किया जा सके। इस प्रदर्शन के बाद विभाग ने 59,000 रुपए की स्क्रैप बिक्री की।

कचरा प्रबंधन पर जानकारी प्राप्त करने के लिए अनुपम ने अपनी पत्नी भावना से मदद मांगी। भावना सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की एक्सपर्ट हैं।

उन्होंने गांव वालों की मदद से बायोगैस प्लांट स्थापित करने की सलाह दी। एक वृद्ध आश्रम में एक बायोगैस संयंत्र , एक तेल प्रेशर मशीन और एक मसाला ग्राइंडर इकाई स्थापित करने का सुझाव दिया। इसके माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किया जा सकता है।

पर्यावरण के अनुकूल मॉडल

अनुपम के अनुसार तेल बनाने वाली मशीन से प्रति घंटे 4-8 किलो तिलहन संसाधित की जा सकती है। इसके जरिए ग्रामीण मूंगफली, अलसी, सरसों, तिल, सोयाबीन, करंज, महुआ और नीम जैसे वन आधारित इन हाथों से तेल निकालने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया। तिलहन के बचे हुए अवशेषों को मवेशियों के चारे के रूप में उपयोग किया जाता है।

मसाला ग्राइंडर इकाई प्रतिदिन 500 ग्राम मसाला पीस सकता है। इसके उपयोग से लॉन्ग, काली मिर्च, दालचीनी, हल्दी, मिर्च, धनिया, इलायची, मेथी और अन्य आयुर्वेदिक पाउडर को पीसकर मसाला बनाने का काम किया जाता है।

अनुपम के अनुसार विभिन्न प्रयासों के बाद प्लास्टिक कचरे को लैंडफिल में प्रवेश करने से रोकने में काफी मदद मिली है और इसके जरिए ग्रामीणों को अस्थाई रोजगार के अवसर भी प्रदान हुए हैं।

Amit Kumar
Coming from Vaishali Bihar, Amit works to bring nominal changes in rural background of state. He is pursuing graduation in social work and simentenusly puts his generous effort to identify potential positivity in surroundings.

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