Thursday, September 29, 2022

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24 वर्षीय जतिन गांव में ही लाइब्रेरी खोल 1400 से भी अधिक बच्चों को दे रहे उच्च शिक्षा

किताबो को एक इंसान का सच्चा मित्र माना जाता है जो हर बुरे वक्त में इंसान का साथ देती है कहते हैं इन किताबो से लिया हुआ ज्ञान हमसे कोई नही छीन सकता और जितना हो सके हम किताबो से ज्ञान को ले सकते हैं, ज्ञान हमे एक अलग रूप में निखरता है जो हमे सबसे अलग पहचान देता हैं

लेकिन, आज के समय में भी कही ऐसी जगह जहा बच्चो को अच्छी शिक्षा नही मिल पा रही और वह अपना समय बर्बाद कर रहे हैं इन्ही सबको देखते हुए 24 वर्ष जतिन ने अपने गांव में लाइब्रेरी खोलने का सोचा।

जानते हैं जतिन के बारे में….

जतिन जिनकी उम्र 24 साल है जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले और दिल्ली के गलगोटिया यूनिवर्सिटी से वकालत की शिक्षा ग्रहण की और अपनी स्कूलिंग अपने पास के गांव के स्कूल से की फिर इन्होंने वकालत कर अब यूपीएससी की तैयारी कर रहे है।

इन दिनों जतिन ललित सिंह (Jatin Lalit Singh) नें अपने गांव में “बांसा कम्युनिटी लाइब्रेरी एंड रिसोर्स सेंटर” (Bansa Community Library and Resource Center) खोली हैं जिसमे वह अपने गांव और आस पास के बच्चो को मुफ्त में लाइब्रेरी में प्रवेश करने देंगे जहा बच्चे आराम से बैठ कर पढ़ाई कर सकेंगे। इस लाइब्रेरी में उन्होंने हर प्रकार की किताबे राखी है जैसे इंग्लिश, हिंदी वे उर्दू और अवधि 3000 से भी ज्यादा कितने वहा पर उपलब्ध हैं

Bansa Community Library And Resource Center Opened By Jatin Lalit Singh

शहर वे गांव के बीच क्यों लगा फर्क….

जतिन जब लखनऊ के सिटी मॉण्टेशरी स्कूल गए तो वहा की इन्फ्रास्ट्रक्चर उनके गांव के इन्फ्रास्ट्रक्चर से काफी अलग था कहते हैं न जैसा रंग वैसा भेस, उसी समय जतिन को भी यही आभास हुआ की जैसे शहर का इन्फ्रास्ट्रक्चर बच्चो की अलग ही पहचान बनाता और उनकी पर्सनेलिटी को दर्शाता है ऐसी शिक्षा गांव के बच्चो को बिलकुल नहीं मिल पाती। उस समय जतिन को शहर और गांव के बीच काफी अंतर लगा।

क्यों आया लाइब्रेरी का विचार….

जब उन्होंने अपने स्कूल की शिक्षा पूरी कर ली तब वह दिल्ली में अपनी वकालत की शिक्षा ग्रहण कर रहे तो उसके साथ वे एक लाइब्रेरी में काम करने लगे जिसका नाम ‘द कम्युनिटी लाइब्रेरी’ था जिसमे हर तरीके की सुविधा उपलब्ध थी वही लाइब्रेरी में एक छोटा सा लड़का हरोज़ पढ़ने आया करता था जिसका नाम दक्ष था जो काफी गरीब और स्लम में रहता था। वह उस लाइब्रेरी के माहौल में काफी ढलने लगा और काफी कुछ सीखने लगा साथ ही साथ वह हर चीज इंग्लिश में बोलने लगा।

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इस बदलाव को देख कर जतिन काफी हैरान और आकर्षित हुए यह सब बदलाव देख कर जतिन को भी लगने लगा जहा जैसा एनवायरमेंट होगा वहा के बच्चे उसे ढंग में ढलेंगे तभी जतिन ने अपने गांव में एक लाइब्रेरी खोलने की सोची और इसको 2020 में सच भी कर दिखाया।

खोल डाली लाइब्रेरी….

जतिन ने 2020 में अपने गांव में लाइब्रेरी खोल दी थी यह मंजिल पाना उनके लिए काफी कठिन था क्युकी इसके लिए उन्हें पैसे, जमीन, पुस्तके सब कुछ चाहिए उस समय न तो उनके पास पैसे और न ही जमीन, इस रहा पर चलना उनके लिए काफी मुश्किल था परंतु अपने सच्ची लगन और विकल्प से उन्होंने जमीन को किराए पे लिया और पैसों को फंड के जरिए इकठ्ठा किया साथ ही साथ कही राजकोट लाइब्रेरी, द कम्युनिटी लाइब्रेरी और प्रथम बुक्स जैसे अन्य संस्थाओं में किताबो को लाने में काफी योगदान दिया हैं

अब इस गांव के बच्चो को अपनी पढ़ाई या गवर्मेंट एग्जाम की तैयारी करने में काफी आसानी हो रही जिनसे उनका काफी समय भी बच रहा है, क्युकी गांव में लाइब्रेरी न होने के कारण बच्चो को इस गांव से बाहर दूसरी लाइब्रेरी में जाना पड़ता था जिसमे काफी खर्च हो जाता था।

किताबो द्वारा लिया हुआ ज्ञान सिर्फ हमे ज्ञान ही नही देता बल्कि हमारी पर्सनेलिटी को भी काफी चेंज करता क्युकी किताबो से मिली शिक्षा हमारे अंदर आत्मविश्वास को मजबूत करती है जो हमरको सबसे अलग पहचान देती हैं

Bansa Community Library And Resource Center Opened By Jatin Lalit Singh

दे रहे हैं मुफ्त सुविधा….

जतिन द्वारा खोली गई लाइब्रेरी में बच्चे को सारी सुविधा मुफ्त में दी जा रही और बच्चे को पढ़ाने के लिए 40 वॉलिंटियर्स उनकी मुफ्त में मदद करेंगे। वह हर तरीके की किताब है इंग्लिश, हिंदी, कंप्यूटर, मैगजीन, अखबार आदि साथ ही साथ वहा मुफ्त इंटरनेट की सुविधा भी दी जा रही है

कोई जुर्माना नहीं लिया जाता….

अगर वह से कोई बुक लेता है तो वह उसे पढ़ने के बाद वापिस से रिन्यू करवा सकता अगर किसी बच्चे को किताब देने में देरी हो जाती या किसी कारण किताब फट जाती या को जाती है तो वह इसका कोई चार्ज नहीं लेते।

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क्युकी जतिन बताते है की उनके गांव में कमाने का सिर्फ एक ही साधन है वो है खेती, वहा रहने वाले लोग खेती करके अपने घर खर्च चलाते और उसी में गुजारा करते हैं।

कही जाना न पड़े दूर….

जैसे हम सब जानते हैं की गांव के बच्चे अपनी पढ़ाई करने के लिए शहर में जाते है जहा आने जाने और रहने में ही इतना खर्चा हो जाता जिसे आम इंसान मुश्किल से चला सकता हैं वही जतिन ने भी अपने गांव के आस पास के बच्चो को पढ़ाई करने के लिए शहर की लाइब्रेरी में जाते देखा तो उन्होंने अपनी लाइब्रेरी में वो सारी सुविधा रखी जो बच्चो को गेवरमेंट एग्जाम की तैयारी करने में उनकी मदद करेगी और वह आसानी से वहा पढ़ाई कर पाएंगे।

सभी सुविधा मिलने के बाद लाइब्रेरी में बच्चे आने लगे और काफी बच्चे गवर्मेंट एग्जाम की तैयारी करने लगे।

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