Tuesday, October 4, 2022

Buy now

ये महिला चलाती हैं चलती-फिरती “चाची की रसोई” रोज भरती हैं गरीबों का पेट

हम लोग हमारे देश की गरीबी के बारे में अच्छे से जानते हैं। भले ही आज लोग तरक्की की राह पर चल पड़े हैं, खूब पैसा कमा रहे हैं परंतु देश का एक वर्ग आज भी गरीबी झेल रहा है। वह लोग ऐसी गरीबी से जूझ रहे हैं कि उन्हे इतना तक नही पता होता कि उन्हे रात की रोटी नसीब होगी भी या नहीं कई समय तो उन लोगो को भूखे पेट ही सोना पड़ता हैं। उनके पास रोजी रोटी कमाने का कोई जरिया नहीं होता हैं। हालाकि हमारे देश की सरकार गरीबों के लिए आए दिन कोई न कोई नई योजना बनाती रहती है। जिसमे गरीबों को मुफ्त में अनेकों फायदे मिलते हैं। इसके अलावा भी हमारे देश में कई लोग खुद आगे बढ़कर गरीबों को खाना खिलाना, उनकी मदद करना पसंद करते हैं। क्योंकि कुछ लोगो को अपने जीवन में अच्छे कर्म करके खुशी प्राप्त होती हैं। वह अपना सारा जीवन अच्छे कर्मों में ही बिताना चाहते हैं। तो वह लोग जितनी हो सके उतनी गरीबों की मदद करते हैं। इन सब सेवाओं के बाद भी हमारे देश का एक कोना गरीबी को झेल रहा है। और ऐसा नहीं है, की देश में कुछ ही लोग है जो गरीबों की मदद करना चाहते हैं।

आज कल हम बहुत जगहों पर मुफ्त में खाना बाटते हुए देखते है। बहुत लोगो को गरीबों की अनेकों प्रकार से सेवा करते देखते हैं। यह तक की कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके खुद के घरों में बहुत अधिक पैसा नही होता परंतु फिर भी वह गरीबी की सहायता करने में लगे हुए होते है। आज हम बात करेंगे, एक ऐसी ही महिला की जो गरीबों को खाना खिलाने की सेवा करती है। और उनके साथ साथ उनका पूरा परिवार भी गरीबों को खाना खिलाने में उनकी सहायता करता है।

कौन है वह महिला…

Uttarpradesh Bifan Devi Feeds The Poor By Chachi Ki Rasoi
बिफान देवी

आज हम जिनकी कहानी बताने जा रहे हैं, उनका नाम है बिफान देवी (Bifan devi) यह महिला राजपुर (Rajpur) गांव की रहने वाली है, जो कि उत्तरप्रदेश (Uttarpradesh) के सोनभद्र राज्य में स्थित है। यह महिला शादीशुदा है इनके पति का नाम कल्लू यादव (Kallu yadav) है। इनके दो बच्चे भी है। यह अपने परिवार के साथ ही गांव में रहती है। वह और उनके पति गरीबों को खाना खिलाने की सेवा करते हैं। उन्होंने इसके बारे में कोरोना काल में सोचा था। क्योंकि वह समय साधारण व्यक्ति के लिए ही इतना कठिन था तो गरीबों के लिए तो बहुत सी कठिनाइयां उत्पन हो गई थी। वह रोज भूखे पेट सोते थे। बिफान देवी से यह सब देखा नही गया। तभी उन्होंने चाची रसोई के नाम से छोटा सा काम शुरू किया और गरीबों को खाना खिलाना शुरू किया। वह दोनो आस पास के गांव में जाकर गरीबों को खाना खिलाते थे। और महीने में लगभग 23-25 दिन वह यही काम करते थे।

यह भी पढ़ें:-पुलिसवाले को मिला 45 लाख रूपये से भरा बैग, मालिक को लौटाकर पेश की ईमानदारी की मिशाल

क्या करती है, बिफान देवी….

जैसा की हमने पढ़ा कि बिफान देवी भी एक मध्य वर्ग परिवार से तालुक रखती है। परंतु फिर भी वह गरीबी की सेवा करना चाहती है। क्योंकि उन्हे उसी से खुशी मिलती है। उनकी अपनी एक छोटी सी किरयाने की दुकान है। जिससे बहुत अधिक कमाई तो नही होती। परंतु जितनी भी कमाई उन्हे उस दुकान से होती है। उसका आधे से ज्यादा हिस्सा बिफान देवी गरीबों को खाना खिलाने में लगा देती है। क्योंकि उनकी सोच यही है कि कोई भी व्यक्ति खाली पेट या भूखा न रहे। इसलिए उनसे जितना बन पड़ता है वह उतना जरूर करती है। इसमें उनके दोनो बेटे भी उनका पूरा साथ देते हैं। वह गरीबों को खाना खिलाने में अपने माता पिता की मदद करते हैं।

कैसे खिलाते है, खाना??……

बिफान देवी और उनके पति गरीबों को खाना खिलाने के लिए अपनी ही किरयाने की दुकान में से समान लेकर खाना बनाते है। खाना बनाने के बाद वह दोनो आस पास के गांव में खाना लेकर जाते और गरीबों में बाट ते। बिफान देवी का कहना था कि कोई भी भूखे पेट न सोए। भले ही दिन में एक बार लोगो को खाना नसीब हो। उनका मानना था कि इससे कोई भी व्यक्ति भूखे पेट नही सोएगा और न ही भूखे होने के कारण किसी की मृत्यु होगी। वह हर रोज लग भग 100 लोगो को खाना खिला कर उनकी भूख को शांत करते थे। देखा जाए तो वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। भले ही उनके खुद के पास इतने अधिक पैसे नही थे। परंतु उन्होंने कभी भी गरीबों को खाना खिलाना नही छोड़ा। वह खाना बनाकर अपनी गाड़ी में आस पास के गांव में गरीबों को बाटने के लिए ले जाते थे। उनके बेटे ने गाड़ी को “चाची की रसोई” नाम से ही गाड़ी को डिजाइन करा लिया था।

Uttarpradesh Bifan Devi Feeds The Poor By Chachi Ki Rasoi
गरीबों का भर्ती हैं पेट

कैसे जली बिफान देवी……

बिफान देवी गरीबों का खाना खुद अपने हाथो से रोज बनाकर उनके खिलाने जाति थी। एक दिन खाना बनाते हुए बिफान देवी जल गई और उन्हे बहुत गहरा घाव हो गया। जलने के कारण उनका वह घाव उन्हे हर काम में दिक्कत देता था। उस पर बहुत जलन भी हुआ करती थी। परंतु इन सबके बाद भी उन्होंने कभी गरीबों का खाना न खिलाने के बारे में कभी भी नही सोचा था। मुश्किल होने के बाद भी वह गरीबी के लिए रोजाना खाना बनाकर उन्हें खिलाने ले जाती थी। महीने का गरीबों को खाना खिलाने का लग भग 50-60 हज़ार का खर्च होता था। जिसके बारे में उन्होंने कभी नही सोचा और रोज खाना बनाया और खिलाया। यहां तक की उनके पास इतने पैसे भी नही हुआ करते थे की वह कुछ पैसे जोड़ कर रख ले। जितना वो कमाती थी उससे उनके घर की और गरीबों की रोजी रोटी ही चल पाती थी। इन सबके बाद भी उन्हे गरीबों को खाना खिलाने में जो संतुष्टि प्राप्त होती थी। वह उन्हे कही और नही मिलती थी। हम सभी के लिए बिफान देवी जैसे लोग एक प्रेरणा है। इतनी मुश्किल होने के बाद भी वह गरीबी की मदद करना नही भूलती थी। और बहुत खुश होकर उनकी सेवा करती थी। उन्हे अपने हाथो से खाना बनाकर खिलाने जाति थी। ऐसे लोग हमारे देश को बदल सकते है। और हमे ऐसे लोगो का पूरा साथ देना चाहिए।

यह भी पढ़ें:-पत्तल का कारोबार आपको कर देगा मालामाल, कम लागत में देता है बेहतर मुनाफा: ऐसे लगाएं यूनिट

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
- Advertisement -

Latest Articles