Sunday, February 5, 2023

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एक दुर्घटना से आया विचार, 1200 रक्तदाताओं का बना दिया समूह और बचाई 10 हजार जानें

ज़िंदगी में वक़्त बदलते देर नहीं लगता, यहांं पल भर में खुशी है तो पल भर में गम। इस लेख द्वारा आप एक ऐसे शख्स से मिलेंगे जिनकी ज़िंदगी एक अखबार में छपी खबर ने बदल दी। उन्होंने इस खबर की बदौलत 1200 ब्लड डोनर्स को तैयार कर 10 हजार लोगों की जान बचाई।

जीवनदायनी योद्धा

वह हैं दिल्ली पुलिस कांस्टेबल रविन्द्र। उन्हें अखबार में एक खबर देखी जिससे वह काफी दुःखी हुए और उन्होंने उसी क्षण ये तय किया कि उनके ज़िंदगी का मकसद अब लोगों की जान बचाना होगा। आज उन्हें “जीवनदायनी योद्धा” का पहचान मिला है। जीवनदायनी दिल्ली पुलिस कर्मियों का एक ऐसा समूह है जो लोगों के लिए रक्तदान करती है इस कारण लोग इसे जीवनदायिनी योद्धा का नाम दिए हैं। -Jeevandayni Yodha

दरअसल यह खबर एक ऐसे युवा की थी जिसका मौत एक्सीडेंट में हो चुका था। उस दिन अखबार में यह खबर छपी हुई थी कि एक युवा सड़क दुर्घटना में घायल हो चुका है और उसके शरीर से इतना खून बह चुका है कि अस्पताल में खून का अरेंजमेंट नहीं हो पा पाया जिससे उनकी मृत्यू हो गई। इस खबर को पढ़कर रविंद्र काफी दुखी हुए और उन्होंने यह तय किया कि वह कोई ऐसा काम करेंगे जिससे लोगों की मदद हो और आगे किसी की जान खून की कमी के वजह से ना जाए।-Jeevandayni Yodha

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हुआ ऑफिशियल तौर पर लांच

यहीं से हुआ रक्तदायनी योद्धा सेना की शुरुआत। इस रक्तदायनी योद्धा में लगभग 700 दिल्ली पुलिस के जवान है और यहां 1200 रक्त दाताओं का समूह है। इस रक्त दाताओं के समूह में हरियाणा पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के सेना भी मौजूद है। इनके कार्यों को देख कर पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने जीवनदायिनी ग्रुप को ऑफीशियली तौर पर लांच किया है। -Jeevandayni Yodha

बचा है हजारों की जान

रविंद्र इस ब्लड ग्रुप का संचालन करते हैं वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में दिल्ली पुलिस को ज्वाइन किया। उन्होंने यह बताया कि वर्ष 2017 से उनकी टीम द्वारा लगभग 9 हजार से अधिक लोगों के लिए ब्लड ,प्लाज्मा, प्लेटलेट्स तथा डब्ल्यूबीसी उपलब्ध कराया है। इस ग्रुप द्वारा उन्होंने लगभग 10000 लोगों की जान की रक्षा की है।-Jeevandayni Yodha

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हैं महिला पुलिसकर्मी भी शामिल

उनके इस कार्य मे उनके दोस्त अमित फौगाट ने उनकी मदद की है और बताते हैं कि इस कार्य की शुरुआत हम दोनों ने मिलकर की थी परंतु आज से सैकड़ों लोग जुड़ चुके हैं। उन्होंने लगभग 88 बार रक्तदान किया है इसके अतिरिक्त अमित ने 90 आशीष में 109 तथा कुशल 35 बार अपना ब्लड डोनेट कर चुके हैं। इसमें सिर्फ योद्धा ही नहीं बल्कि महिला पुलिसकर्मी भी है जो अगर जरूरत पड़े तो लोगों की जान बचाने के लिए तैयार रहती हैं। –Jeevandayni Yodha

Khushboo Pandey
Khushboo loves to read and write on different issues. She hails from rural Bihar and interacting with different girls on their basic problems. In pursuit of learning stories of mankind , she talks to different people and bring their stories to mainstream.

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