Friday, September 30, 2022

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हल्दी और चन्दन की खेती से महाराष्ट्र के किसान ने लिखी सफलता की इबारत, लाखों के कमाई का ज़रिया बनाया

हमारे यहां एक अवधारणा बनी हुई है कि, खेती अनपढ़ लोगों के लिए रोजगार का जरिया होता है लेकिन आज के समय में हमलोगों ने यह महसूस किया होगा कि अब पढ़े-लिखे लोग भी खेती में अपना रुचि दिखा रहे हैं तथा आधुनिक खेती के तरफ अग्रसर हो रहे हैं।

आज हम बात करेंगे एक ऐसे शख्स की, जिसने प्रकृति के अनुकूल खेती करके कामयाबी हासिल की है तथा अपनी एक खास पहचान बनाने में सफलता हासिल की है।

कौन है वह किसान?

हम धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) की बात कर रहे हैं, जो महाराष्ट्र (Maharashtra) के लातूर जिले (Latur district) के एक माध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह समान्य खेती करने वाले किसानों के रुप में जाने जाते थे क्युकिं उनके इलाके के सभी किसान समान्य खेती करके हीं अपना जीवन-यापन करते है।

सुखा प्रभावित जिला है लातूर

महाराष्ट्र (Maharashtra) का लातूर जिला (Latur district) हमेशा से सुखा प्रभावित जिला रहा है। ऐसे में समान्य किसान के लिए इस सूखाग्रस्त इलाके में खेती करना सम्भव नहीं था। इस समस्या से निकलने के लिए उन्होंने एक ऐसे रास्ते की तलाश करने को सोचा जिसमें कम पानी लगता हो औऱ अच्छे नतीजे मिले। वह हाईटेक खेती करना चाहते थे, जिसमें पानी की खपत कम हो।

चंदन की खेती करने का बनाया मन

एक समय Polyhouse की ट्रेनिंग के लिए धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) लखनऊ गए थे, जहाँ उनकी मुलाकात केरल के रहने वाले एक युवक से हुई और दोनो धीरे-धीरे काफी अच्छे दोस्त बन गयें तथा दोनो की खेती के विषय पर विचार विमर्श होने लगी। उस ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने एक एक्सपर्ट से पूछा कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किस चीज को उगाना फायदेमंद होगा, तब उन्हें जवाब मिला चंदन की खेती सूखा प्रभावित क्षेत्रों में की जा सकती है।

चंदन से जुड़ी बातों को समझा

लखनऊ में दोस्ती के कुछ दिन बाद धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) अपने केरल के दोस्त से मिलने के लिए केरल गए जहां पर उन्हें पता चला कि उसके पिता डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर हैं । उन्होंने धनंजय को अपने डिपार्टमेंट में चंदन के अलग-अलग पेड़ दिखाएं। यहीं पर धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) को पता चला कि चंदन के एक पेड़ की कीमत करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए होती है। इसके बाद उन्होंने चंदन की खेती करने का मन बनाया।

शुरु की चंदन की खेती

लखनऊ से कृषि संबंधित ट्रेनिंग लेने तथा उससे जुड़ी अन्य सभी जानकारियों को बारीकी से समझने के बाद धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) अपने गांव लातूर को लौट आएं। वहां पर उन्होंने 1 एकड़ जमीन में 200 सफेद चंदन के पेड़ लगा दिए क्योंकि चंदन की कमर्शियल वैल्यू बहुत ज्यादा होती है। इसलिए वह खेती के लिए कृषि विभाग से भी मदद लेने लगे।

शुरु किया अपना नर्सरी

चंदन की खेती के दौरान धनंजय रावत के मन में एक ख्याल आया कि, जब चंदन की लकड़ी इतनी महँगी है तो इसके पौधें भी काफी महंगें बिकते होंगें। तब उन्होंने चंदन,(Sandalwood) के नर्सरी का काम शुरु कर दिया और उस नर्सरी का नाम ‘अंकुर हाई-टेक नर्सरी’ दिया। अब वह हर साल अपनी नर्सरी में लगभग 6 लाख चंदन के पौधे तैयार कर के बेचते हैं।

काली हल्दी का भी करते हैं खेती

काली हल्दी (Black Turmeric) जमीन के अंदर लगने वाली एक फसल है जो कि कन्द की तरह होता है। ऐसे में इसे उस जगह पर लगाना चाहिए जहां पर पानी का ठहराव न होता हो। काली हल्दी औषधीय गुणों से भरपुर होती है इसलिए मार्केट में इसका डिमांड काफी होता है। इसकी कीमत एक से दो हजार रुपये प्रति किलो होती है। काली हल्दी के लिए किसान छोटे स्तर से शुरुआत कर सकते हैं। जहां तक इसे बेचने कि बात है तो ज्यादातर आयुर्वेदिक कंपनियां किसानों से काली हल्दी खरीदती है। इन्हीं सब बातों का ध्यान रखते हुए धनंजय रावत ने काली हल्दी की भी खेती शुरु कर दी तथा आज के समय में वो इसके माध्यम से भी अच्छी कमाई कर रहे हैं।

लोगों के लिए बने प्रेरणा

अपनी मेहनत और संघर्ष के बदौलत सफलता हासिल करते हुए चंदन और काली हल्दी के खेतिहर के रुप में अपना पहचान हासिल करने वाले धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) आज के समय में हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। एक तरफ जहाँ महाराष्ट्र का लातूर जिला हर साल सुखार का सामना करता है वहीं दूसरी ओर आधुनिक खेती और अपने कुशल क्षमता का परिचय देते हुए धनंजय रावत (Dhananjay Rawat) ने पुरे देश भर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

निधि भारती
निधि बिहार की रहने वाली हैं, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी बतौर शिक्षिका काम करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही निधि को लिखने का शौक है, और वह समाजिक मुद्दों पर अपनी विचार लिखती हैं।

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