Wednesday, October 5, 2022

Buy now

क्या आप जानते हैं एक Lawyer और एडवोकेट में क्या अंतर होता है? और क्या Magistrate ही जज होता है

अक्सर हम सभी आम बोलचाल की भाषा में अनेकों ऐसे शब्द का प्रयोग करते हैं जिनके असली अर्थ की जानकारी हमें नहीं रहती है। उदाहरण के लिए कोर्ट में जाने पर आपने कई बार वकीलों के लिए Lawer और एडवोकेट के लिए भी Lawyer शब्द का इस्तेमाल होते सुना होगा। इसी प्रकार जज और मजिस्ट्रेट को भी एक जैसा ही समझा जाता है। लेकिन ये दोनों एक ही नहीं होते हैं बल्कि अलग-अलग होते हैं।

Lawyer और एडवोकेट में क्या है अंतर?

LLB की पढ़ाई करने के बावजूद भी lawyer और Advocate में अंतर होता है। जब कोई व्यक्ति कानून की शिक्षा ग्रहण कर ले और कोई केस न लड़े तो उसे lawyer कहा जाता है। जबकी एक एडवोकेट ऐसा व्यक्ति होता है जो कानून की पढ़ाई करने के बड दूसरे के लिए कोर्ट में अपनी दलीलें भी पेश करता है। अर्थात कोर्ट में हमारे केस को जो लड़ता है या दलीलें देता है उसे एडवोकेट कहा जाता है।

इन सभी के अलावा एडवोकेट को बार-बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। एडवोकेट बनने के लिए एक lawyer को काउंसिल की परीक्षा पास करनी पड़ती है तब जाकर एक व्यक्ति एडवोकेट बनता है।

Difference between lawyer and advocate

जज और मजिस्ट्रेट में क्या अंतर है?

मजिस्ट्रेट और जज में पद और शक्तियों का अंतर होता है। बता दें कि मजिस्ट्रेट के कई स्तर होते हैं। मजिस्ट्रेट के सबसे ऊपर का पद CJM अर्थात चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट होता है और एक जिले में एक CJM होता है। हालांकि सभी जज ही होते हैं जो चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट के रैंक के बराबर होता है। इनमें सिर्फ यही अंतर होता है CJM क्रिमिनल केस लड़ता है और बाकी सिविल मामले देखते हैं।

Difference between lawyer and advocate

दरअसल मजिस्ट्रेट और मुंसिफ CJM के नीचे होते हैं। हाईकोर्ट जिसे मुंसिफ का कार्य सौपेगा वह सिविल मामले को देखता है। जबकी क्रिमिनल केस लड़ने वाला मजिस्ट्रेट होता है। मजिस्ट्रेट कई प्रकार के होते हैं जैसे, कार्यपालक मजिस्ट्रेट, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, मजिस्ट्रेट फर्स्ट, सेकेंड श्रेणी या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पद आदि सम्मिलित है।

बता दें कि एक मजिस्ट्रेट जज की तरह कानूनी मामले को सुलझाता है, लेकिन वह जज की तरह शक्तियां नहीं रखता है। वह फांसी या उम्र कैद की सजा नहीं सुना सकता है।

Difference between lawyer and advocate

जज के ऊपर CJM होता है। जज में भी रैंक के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट जज और एडिशिनल डिस्ट्रिक्ट जज होते हैं। डिस्ट्रिक्ट जज सिविल मामलें को देखता है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट जज जब क्रिमिनल केस संभालता है तो उसे सेशन जज कहा जाता है। दोनों तरह के मामलों की सुनवाई करने वाला जज एक ही होता है।

अब तो आप समझ गए न ये सब एक ही नहीं होते हैं। इनमें अंतर होता है।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
- Advertisement -

Latest Articles