Friday, September 30, 2022

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बिहार का डिजिटल भिखारी जो छुट्टे नहीं होने पर ऑनलाइन पैसे लेता है, साथ में लेकर घूमता है QR कोड

भिखारियों को अक्सर कटोरा अथवा अन्य बर्तन लिए हुए देखा जाता है। अगर भिखारी बर्तन के साथ लोगों से पैसे लेने हेतु फोन पे, गूगल पे आदि के QR कोड लेकर भीख माँगे तो यह वाकई अनोखी बात प्रतीत होती है। लेकिन ये बात सच है। बिहार के बेतिया रेलवे स्टेशन पर कुछ ऐसा हीं नजारा देखने को मिलता है।

भीख मांगकर गुजर-बसर करना कोई सम्मान की बात नहीं है क्योंकि समाज भिखारियों को ओछी निगाहों से देखता है। अक्सर हम लोगों द्वारा भिखारियों को यह कहते हुए दिखते हैं कि छुट्टे नही हैं, आगे बढ़ो आदि तथा कई लोग उसे दुत्कार भी देते हैं। हालांकि उनमें से कुछ दयावश उसकी झोली में एक-आध सिक्का डाल भी देता है। शरीर से लाचार, वृद्ध एवं दीन दशा से युक्त भिखारी सचमुच दया के पात्र माने जाते हैं, परंतु उन्हें भी बार-बार गिड़गिड़ाना पड़ता है तथा ईश्वर का वास्ता देना पड़ता है। – Raju, who begged at Bihar’s Bettiah railway station, gave the option of begging online.

राजू गले में एक QR कोड का बोर्ड लगाए बैठा है

आपको बता दें कि अब भिखारी वाकई आगे बढ़ चुके हैं। आज हम आपको बताएंगे कि बिहार के बेतिया रेलवे स्टेशन पर राजू पटेल नाम का भिखारी लोगों को अब ऑनलाइन भीख देने का ऑप्शन दे रहा है। 40 वर्षीय Digital beggar from Bihar accept online paymentअपने गले में एक QR कोड का बोर्ड लगाए बैठा है। इसके अलावा उनके पास एक टैबलेट भी है।

Digital beggar from Bihar accept online payment

ऑनलाइन भीख देने का है ऑप्शन

राजू को जब भी कोई शख्स बोलता है कि उसके पास छुट्टे नहीं हैं, तो वह जल्दी से ऑनलाइन भीख देने का ऑप्शन भी बता देता है। दरअसल यह भिखारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैन है। वह रेडियो पर ‘मन की बात’ सुनना कभी नहीं छोड़ते। राजू बताते है कि ‘मैं डिजिटल भुगतान स्वीकार करता हूं, और यह मेरा पेट भरने के लिए पर्याप्त है। भीख मांगने का काम तो वह बचपन से करते, लेकिन डिजिटल युग में इसका तरीका बदल गया। – Raju, who begged at Bihar’s Bettiah railway station, gave the option of begging online.

भीख मांगने के अलावा नहीं है कोई रोजगार

राजू बताते है कि अक्सर वह भीख मांगने के बाद स्टेशन पर हीं सोते है क्योंकि उनके पास इसके अलावा दूसरा कोई रोजगार नहीं है। उनके मुताबिक ज्यादातर लोग यह कहकर भीख नहीं देते कि उनके पास खुले पैसे नहींं है। उनका कहना होता है कि उनके पास कैश नहीं है और वह डिजिटल पेमेंट करते हैं। स्थिति को देखते हुए राजू भी अपना एक बैंक अकाउंट खुलवा लिया और ई-वॉलेट यूज करने लगा।

भारतीय स्टेट बैंक में खोला खाता

राजू के अनुसार जब वह बैंक में खाता खोलने के लिए गए तो बैंक ने उनसे उनका आधार और पैन कार्ड मंगा इसलिए उन्हे अपना पैन भी बनवाना पड़ा। आपको बता दें कि राजू ने बेतिया में भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में खाता खोला है। हालांकि अभी ज्यादातर लोग राजू को नगद हीं भीख देते हैं मगर कुछ उसे Google और Phone Pay के जरिए भी भीख देने लगे हैं। – Raju, who begged at Bihar’s Bettiah railway station, gave the option of begging online.

प्रियंका ठाकुर
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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