Wednesday, October 5, 2022

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डॉ कलाम के इन 6 अविष्कारों ने भारत को बना दिया सुपर पावर, जानिए क्या है इनकी खासियत

ख्वाबों की एक अनोखी उड़ान: एपीजे अब्दुल कलाम

आसमान की ऊंचाइयों को तो सब सब छूना चाहते हैं, पर उन ऊंचाइयों को छूने का हौसला किसी-किसी में होता है। किसी खास ने कहा है कि उन ऊंचाइयों को छूने के लिए हवाई जहाज और अन्य साधनों से भी ज्यादा जरूरी चीज आपका हौसला है। हौसला आपकी सोच को वह उड़ान देता है जिसका शिखर कामयाबी की चोटी पर जाता है। कामयाबी के शिखर तक पहुंचने की आपने यूं तो हजारों कहानियां पढ़ी या सुनी होंगी लेकिन ऐसी ही एक जीती-जागती कहानी है भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की।

करोड़ों भारतीय युवाओं की Role Model मिसाइल मैन डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (A. P. J. Abdul Kalam)

Doctor apj abdul kalam

भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (A. P. J. Abdul Kalam) करोड़ों भारतीयों के प्रेरणादायक थे. भले ही आज वो हमारे बीच ना हों पर उनका दिया हुआ मार्गदर्शन हमेशा हमारे बीच रहेगा। उन्होंने देश के युवाओं को एक नई दिशा एक नई सोच दी। भारत को प्रगतिशील बनाने में उन्होंने सबसे अहम भूमिका निभाई थी। कलाम साहब हीं वो व्यक्ति थे जिन्होंने भारत को साइंस और टेक्नोलॉजी फील्ड में एक नई पहचान दी थीं। राष्ट्रपति बनने से पहले वो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) और डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) में एयरोस्पेस साइंटिस्ट थे. उनका न्यूक्लियर हथियारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, और अपने आविष्कारों से देश को सुपर पावर बनाने की वजह से ही उन्हें मिसाइल मैन (Missile-Man) के नाम से जाना जाता था.

इसरो और डीआरडीओ में कार्यरत के दौरान उनके नेतृत्व में बनी अनमोल चीजें

1962 में डॉ कलाम इसरो में पहुंचे। जहाँ उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और आसमान छू लेने वाली लग्न और स्वप्न से सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी अहम भूमिका निभाई। इसरो और डीआरडीओ में कार्यरत के दौरान उन्होंने भारत के सिविल स्पेस और मिलिट्री डेवलपमेंट को अग्रसर बनाने में उन्होंने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने नेतृत्व में भारत को बहुमुखी मिसाइल हथियार दिए। जिसमें ब्रह्मोस’, ‘पृथ्वी’, ‘अग्नि’, ‘त्रिशूल’, ‘आकाश’, ‘नाग’ समेत कई अन्य मिसाइल व ‘इसरो लॉन्चिंग व्हीकल प्रोग्राम’ भी शामिल है। उनका योगदान और उनकी ये अनमोल देन हीं है जो आज दुनियां के सामने भारत की छवि हीं बदल के रख दी है। वो डॉ कलाम ही थे जिनके डायरेक्शन में देश की पहली स्वदेशी मिसाइल मिली। डॉ कलाम के प्रयासों के बदौलत हीं भारत दुनिया का सुपर पावर बनने की ओर अग्रसर है।

डॉ कलाम के द्वारा बनाई गई देश के लिए वो 6 बहुमुखी मिसाइल

पृथ्वी 1 मिसाइल

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1988 दुनियां के नक्शे पर भारत के छा जाने का साल। 25 फरवरी 1988 को पृथ्वी के सफल परिक्षण ने भारतीय रक्षा प्रणाली के विकाश क्रम में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इस मिसाइल का परीक्षण डॉ अब्दुुल कलाम की निगरानी में ओडिशा के धामरा तट के द्वीप पर किया गया था। यह मिसाइल सिर्फ जमीनी मार करने वाली नहीं थी। यह मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम भार को लेकर 150 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता रखती थी। पृथ्वी के सफल परिक्षण के बाद 27 जनवरी 1996 को पृथ्वी 2 और 23 जनवरी 2004 को पृथ्वी 3 का का भी सफल परिक्षण किया गया था।

बह्मोस मिसाइल

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बह्मोस मिसाइल दुनियां की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। यह 2.8 मैक की रफ्तार से उड़ती है जो ध्वनि के रफ्तार से भी ज्यादा होती है। इसकी रेंज 290 किलोमिटर तक थी। जिसे अब बढ़ाकर 400 किलोमिटर से ज्यादा कर दी गई है। यह 300 किलोग्राम भारी युद्ध की सामग्री ले जाने में सक्षम है। इस मिसाइल को आकाश समुद्र और जमीन कहीं से लॉन्च किया जा सकता है और यह हवा में अपना मार्ग बदलने का सामर्थ्य रखती है इसलिए किसी भी लक्ष्य को सटीकता से भेद सकता है। इसका पहला परीक्षण 12 जून 2001 को हुआ था। इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भारत और रूस ने मिलकर विकसित किया। ब्रह्मोस मिसाइल अब भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों अंगों का हिस्सा बन चुकी है।

अग्नि-1 मिसाइल

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अग्नि-1 मिसाइल का पहला परीक्षण 25 जनवरी 2002 को किया गया था। स्वदेशी तकनीक से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली इस परमाणु सक्षम मिसाइल की मारक क्षमता 700 से 900 किलोमीटर है. ये मध्यम रेंज की बालिस्टिक मिसाइल है. ये 1000 किलो तक के परमाणु हथियार ढोने की सक्षमता रखती है. अग्नि-1 में विशेष नौवहन प्रणाली लगी है, जो ये तय करती है कि मिसाइल सटीक निशाने के साथ अपने लक्ष्य पर पहुंचे. अग्नि-1 के बाद अग्नि-2,अग्नि-3,अग्नि-4 मिसाइल का सफ़ल प्रक्षेपण भी किया जा चुका है.

त्रिशूल मिसाइल

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यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इस मिसाइल का वजन 130 किलोग्राम है। इस मिसाइल की मारक क्षमता (Range) लगभग 9 किलोमीटर तक है। ये कम दूरी से भी ज़मीन से हवा में मार करने में सक्षम है। इस मिसाइल का परीक्षण भारत के पूर्वी तट पर भुवनेश्वर से 180 किलोमीटर दूर स्थित चांदीपुर की रेंज में किया गया था। मोबाइल मिसाइल लॉंचर से चलाई गई इस मिसाइल से एक माइक्रो-लाइट विमान को निशाना बनाया गया। इस मिसाइल का इस्तेमाल थल सेना, नौसेना और वायुसेना, सभी कर सकते हैं।

आकाश मिसाइल

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स्वदेशी तकनीक से निर्मित ‘आकाश मिसाइल’ को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। इस मिसाइल का निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा मिलकर किया गया है। डीआरडीओ की ओर से विकसित आकाश मिसाइल सिस्टम हवा में उड़ रहे लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है। यह युद्धक विमान, क्रूज मिसाइल, हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइल और बैलास्टिक मिसाइलों को निशाना बना सकती है। इसका सिस्टम इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कई तरफ से आते खतरों को एकसाथ आसानी से निशाना बना सकता है। ये मिसाइल हवा में दुश्मन के विमान को 40 किमी दूर व 18 हज़ार मीटर ऊंचाई तक टारगेट बना सकती है। इसके विकसित होने के बाद देश की वायुसेना और भी सशक्त हो गई है.

नाग मिसाइल

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भारत द्वारा निर्मित नाग मिसाइल पूरी तरह से देसी है जो थर्ड जेनरेशन की है। यह उन पाँच मिसाइल प्रणालियों में से एक है जो भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत विकसित की गई है। इस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता जमीन से 4 किमी है जबकि हैलीकॉप्टर से इसकी मारक क्षमता 5 किमी है। यह मिसाइल काफी हल्की है और इसे लाने-ले जाने में सुविधा रहेगी। यह दुश्मन के टैंक को एक बार में ही तहस-नहस कर सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल के सेना में शामिल होने से भारत की सैन्य ताकत बढ़ेगी। क़रीब 3.2 करोड़ रुपये की लागत से बनी ‘नाग’ को ‘दागो और भूल जाओ’ टैंक रोधी मिसाइल भी कहा जाता है, क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद दोबारा निर्देशित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसका प्रथम सफल परीक्षण नवम्बर 1990 में किया गया।

डॉ अब्दुल कलाम के निर्देशन में बनी ये 6 बहुमुखी मिसाइलें भारत को दुनिया के अन्य संपन्न देशों के सामने मजबूती से खड़ा करती हैं और हमारी सैन्य ताकत को और अधिक मजबूत बनाती है।

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