Wednesday, October 5, 2022

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अपनी हर चीज़ दाव पर लगाकर इस डॉक्टर ने बचाई अपनी पत्नी की जान, 70 लाख में गिरवी रखी MBBS की डिग्री

सबकी जिंदगी में जीवनसाथी का बहुत महत्व होता है। हर कोई चाहता है की उनका जीवनसाथी ऐसा होना चाहिए जो उन्हे समझे,ध्यान रखे, और उनसे बेहद मोहब्बत करे।तो आज हम बात करने जा रहे है एक ऐसे ही पति की जिन्होंने अपना सब कुछ दाव पर लगाकर अपनी पत्नी की जान बचाई। कहते है शादी में सात फेरों के साथ साथ सात वचन भी होते है। और इन्होंने वह वचन बखूबी निभाए है।उन्होंने मोहब्बत और सच्चे प्यार का बेहतरीन उधारण दिया है।

  • कोन है वह…..

आज हम जिनकी बात कर रहे है उन्होंने अपनी पत्नी का हर कदम पर साथ देते हुए, शादी में लिए हर वचन को निभाया है। उनका नाम है सुरेश चौधरी और वह राजस्थान पाली के खैरवा गांव के निवासी हैं। उनकी धर्मपत्नी का नाम अनिता चौधरी है। दोनो ही बहुत खुशहाल जिंदगी जी रहे थे लेकिन 2021 में जब कोरोना पीक पे था तब उनकी धर्म पत्नी को एक दम से बुखार हुआ और जब उन्होंने कोरोना टेस्ट करवाया तो वह पॉजिटिव आया। दिन भर दिन उनकी तबियत बिगडती गई।

Suresh Chaudhary Save His Wife Life To Mortgaged MBBS Degree
  • अस्पताल में हुई एडमिट…

डॉक्टर सुरेश की पत्नी अनिता की तबियत दिन भर दिन बिगड़ने के कारण उन्हें 14 मई के दिन वह जोधपुर एम्स में एडमिट कराया गया।डॉक्टर सुरेश भी अपने कार्य कर रहे थे और वह 2 दिनों तक उनके साथ रहे क्योंकि और मरीजों का भी ध्यान रखना आवश्यक था। उसके बाद वे ड्यूटी पर चले गए और रिश्तेदारों को पत्नी की देखभाल के लिए छोड़ा। जब वह 30 को दुबारा अस्पताल गए तो उन्होंने देखा की उनकी पत्नी की हालत और बिगड़ गई है वह वेंटीलेटर पे थी और डॉक्टर्स ने कहा था की वह बच नहीं सकती पर डॉक्टर सुरेश को यह बिलकुल भी मंजूर नहीं था उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी को प्राइवेट अस्पताल जॉयड्स में एडमिट करवाया।

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  • लगाया सब दाव पर…..

डॉक्टर सुरेश ने अपनी पत्नी को बचाने के लिए सब कुछ दाव पर लगाने का निश्चय कर लिया था। अनीता का वेट कम होते जा रहा था और 50 से 30 किलोग्राम की हो चुकी थी। खून की कमी भी शरीर में बेहद कम हो चुका था उनके दिल और लंग्स ईसीएमओ मशीन की मदद से ऑपरेट हो रहे थे। प्रतिदिन उनके इलाज में लाखों रुपए लग रहे थे जिस कारण सुरेश ने अपनी एमबीबीएस की डिग्री तक गिरवी रख दी। उन्होंने अपनी डिग्री चार बैंको में गिरवी रख कर लोन लिया जिनसे उन्हें 70 लाख रुपए लोन मिल गया था। बस वह चाहते थे की किसी भी हाल में उनकी पत्नी ठीक हो जाए।

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  • पत्नी हुई स्वस्थ….

लगभग 87 दिनों तक मशीनों के सहारे जीवित रहने के बाद अब उनकी तबियत में थोड़ा सुधार दिखा। उनके लग में काफी सुधार आया।डॉक्टर सुरेश का विश्वास और उम्मीद बना रहा और वह स्वस्थ होने लगी। वह काफी ठीक हो गई और हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी हुईं। सही ही कहते है, सच्चे प्यार में बहुत ताकत होती है। डॉक्टर सुरेश चौधरी के सच्चे प्यार और सच्ची मोहब्बत ने आखिरकार उनकी पत्नी को इतनी मुश्किलों के बाद भी जीवित रखा। डॉक्टर सुरेश ने बिना सोचे समझे अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया ताकि उनकी पत्नी बच सके।उन्हे यह बिलकुल भी मंजूर नहीं था की उनकी पत्नी उन्हे छोड़कर जाए जिसके लिए उन्होंने सब कुछ दाव पर लगा दिया और आखिरकार उनकी पत्नी स्वस्थ हो गई।

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