Tuesday, October 4, 2022

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इतिहास के पन्नो में दर्ज उन 5 घोड़ों के बारे में जानिए, जिनकी बहादुरी के किस्से पूरी दुनिया याद करती है

जब-जब भारतीय इतिहास की पुनरावृति की जाएगी तब-तब राजाओं द्वारा लड़े गए युद्धों में उनके घोड़े का योगदान याद किया जाएगा। महाराणा प्रताप से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज तक उनकी लङाईयों में उनके घोड़ों की वीरता का उल्लेख है। आज हम इतिहास में दर्ज ऐसे 5 ऐसे वीर अश्वों की बात करने जा रहे हैं जिन्होंने अपने राजाओं को खूब संरक्षण दिया और जिनकी बहादुर की बात सदियों तक जीवित रहेगी।

छत्रपति शिवाजी का घोड़ा

भारत के महान और गौरवशाली राजाओं में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज जी की जब बात आती है तो उनके लड़े लड़ाईयों में उनके घोड़ों का जिक्र अवश्य किया जाता है। उनके घोड़ो ने वीरता की अनूठी पराकाष्ठा पेश की। उनकी सेना में भीमथड़ी और अरबी नस्ल के घोड़े ज़्यादा इस्तेमाल किए जाते थे। उनके पास सात घोड़े थे जिनके नाम मोती, विश्वास, रणवीर, गजरा, कुष्णा, तुरंगी और इंद्रायणी था।

दरअसल शिवाजी का कहना था कि एक योद्धा को घोड़ा हमेशा बदलते रहना चाहिए। कृष्णा नाम का घोड़ा छत्रपति शिवाजी के अंतिम दिनों तक साथ था। सफेद रंग का यह घोड़ा तेज रफ्तार के साथ ऊंची-ऊंची भूमि पर चढ़ने में माहिर था।

महाराजा रणजीत सिंह की घोड़ी

भारत के महान राजाओं में शुमार महाराजा रणजीत सिंह को भी घोड़ों का बहुत शौक था। वह अपनी सेना में साहसी और मजबूत घोड़ों को हीं भर्ती करवाते थे। एक बार की बात है कि उनके दरबार में एक यूरोपीय अधिकारी आया उसने बताया कि पेशावर के सरदार के पास एक ‘सीरी’ नाम की घोड़ी है जिसकी रफ्तार बेहद हीं तेज है। यह सुनकर महाराणा रणजीत सिंह को उसे पा लेने की जिजीविषा जाग उठी।

उन्होंने अपने आदमियों को पेशावर भेजकर सरदार से घोङी लाने के लिए कहा लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला और वहां के सरदार ने महाराणा रणजीत सिंह को घोड़ी देने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक यूरोपीय जनरल Ventura को उस घोड़ी लाने को भेजा। जिसके बाद वह सिरी को लाने में उसे सफलता मिली। महाराणा रंजीत सिंह ने उस घोङी का नाम बदलकर ‘लैला’ रख दिया।

महाराणा प्रताप का घोड़ा

जितना प्रतापी राजा महाराणा प्रताप थे उतना हीं उनका घोङा चेतक भी। चेतक की वीरता की कहानी आपको आश्चर्यचकित कर देगी। चेतक की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि दुश्मन दांतों तले उंगली दबा लेते थे। ईरानी मूल का चेतक महाराणा प्रताप सिंह की लङाई में खूब साथ देता था। एक बार की बात है महाराणा प्रताप के दरबार में गुजराती व्यापारी आया जिसके पास तीन घोङे थे चेतक, त्राटक और अटक।

महाराणा प्रताप ने उस व्यापारी के तीनों घोड़े खरीद लिए। उन तीनों घोड़ों में चेतक ने महाराणा प्रताप को खूब प्रभावित किया इसलिए महाराणा प्रताप ने चेतक को अपने पास रखा। हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने अपनी वीरता से दुश्मनी सेनाओं को अचंभित कर दिया और अंततः वह वीरगति को प्राप्त हो गया।

रानी लक्ष्मीबाई का घोड़ा

इतिहास में जब भी घोड़ों की वीरता की बात आएगी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के घोड़ों का उल्लेख निश्चित तौर पर होगा। रानी लक्ष्मीबाई के पास तीन घोड़े थे सारंगी, पवन और बादल। तीनों घोड़ों में बादल की वीरता अनूठी थी। ऐसा कहा जाता है कि एक बार रानी लक्ष्मी बाई के घोड़े बादल 100 फीट की दीवार को भी फांद गया था।

सिकंदर का घोड़ा

विश्व विजेता बनने का सपना लेकर जब सिकंदर ईरान पर विजय प्राप्त कर भारत में दाखिल हुआ उस समय उसके पास “Busephalus” नाम का घोड़ा था। ऐसा कहा जाता है कि जब सिकंदर 13 वर्ष का था तब उसने यह घोड़ा एक व्यापारी से खरीदा था। सिकंदर ने इसी घोड़े पर बैठकर बड़े से बड़े युद्ध को अंजाम दिया था जिसमें से पोरस के साथ हुई लड़ाई भी शामिल थी।

Vinayak Suman
Vinayak is a true sense of humanity. Hailing from Bihar , he did his education from government institution. He loves to work on community issues like education and environment. He looks 'Stories' as source of enlightened and energy. Through his positive writings , he is bringing stories of all super heroes who are changing society.

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