Thursday, September 29, 2022

Buy now

परंपरागत खेती को छोड़ अपनाया फलों की खेती, अमरूद के रिकार्ड उत्पादन से पेश की उन्नत कृषि की मिसाल

बीते कई सालों से किसान परंपरागत खेती कर रहे हैं लेकिन उनमें से बहुत किसान अब परंपरागत खेती को छोड़कर बागवानी की तरफ अपना रुख कर लिए है।

बागवानी में उगाई जाने वाली फसलें चुनौतीपूर्ण और खर्चीली होते हैं लेकिन वैज्ञानिक सुझाव के साथ अगर बागवानी की जाए तो किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिलता है।

इन सभी चुनौतियों के बीच बग्गड़ धार जिले के सरदारपुर तहसील के साजोद गांव के रहने वाले दिनेश 10 साल से बागवानी कर रहे हैं और आज उनके अमरुद विदेशों के बाजार में भी पहुंच रहे हैं।

परंपरागत खेती में होने लगा था घाटा

दिनेश के अनुसार थाई अमरूद की बागवानी लगाने से पहले वे परंपरागत तरीके से सब्जियों की खेती किया करते थे लेकिन खेती में बढ़ते लागत के कारण उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी बीच उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया और वैज्ञानिक से उच्च उद्यानिकी तकनीकों को समझने के बाद थाई अमरुद के पौधे मंगवा कर बगीचा लगाया।

2 हेक्टेयर की जमीन पर उन्होंने थाई अमरूद का बगीचा लगा रखा है। 2 हेक्टेयर की जमीन में से 1.2 हेक्टेयर से उत्पादन उन्हें प्राप्त हो रहा है लेकिन बाकी के बगीचे में 1 साल के बाद फल आएंगे।

किसान तेजी से कर रहे हैं फलों की खेती की ओर रुख

कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में फसलों का उत्पादन 2019-20 में पैदा हुए 102.8 मिलियन टन की तुलना में इस साल 2020-21 मैं मिलियन टन होने का अनुमान है।

अगर सिर्फ अमरूद की खेती की ही बात करें तो वर्ष 2018-19 मैं पूरे देश में 276 हजार हेक्टेयर अमरूद की खेती हुई जिसमें 4257 हजार मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ।

किस नस्ल के हैं यह अमरूद?

थाई अमरूद की बी एन आर वन किस्म का फल आकार में बड़ा और चमकदार होता है। इसके पौधों को लगाने के 18 महीने के बाद ही फल आने लगते हैं। अगर बगीचे की ठीक तरीके से देखभाल की जाए तो लगभग 20 से 25 सालों तक फल लिए जा सकते हैं।

40 किलो तक हो सकता है उत्पादन

बगर के अनुसार एक अमरूद की पेड़ से 40 किलो तक उत्पादन लिया जा सकता है।

फल सब्जियों का बड़ा भाग हर साल के से मंडी पहुंचने तक के बीच में खराब हो जाता है लेकिन फल के दाम अच्छे मिले और वह खराब ना हो इसलिए बेहतर रखरखाव करना बेहद जरूरी है।

कैसे होता है मुनाफा?

खेती का काम भले ही जोखिम भरा है लेकिन वैज्ञानिक पद्धतियों और सही सुझाव के साथ अगर अमरूद की खेती की जाए तो किसान अच्छा मुनाफा उठा सकते हैं। शुरुआत में बगीचा लगाने में प्रति एक एकड़ डेढ़ से दो लाख तक का खर्च आता है। इसके बाद हर साल 15 से 20 रूपए प्रति किलो की लागत पड़ती है। यदि 20 फ़ीसदी लागत कम कर दी जाती है तो 1.2 हेक्टेयर से सालाना 20 से 30 लाख तक का मुनाफा किया जा सकता है।

बागवानी के क्षेत्र में हैं अच्छी संभावनाएं

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा दिनेश को खेती में नवाचार के लिए सम्मानित भी किया गया। उनके अनुसार वैज्ञानिक पद्धति और सही तकनीक के साथ अगर बागवानी लगाई जाए तो किसान अच्छा फायदा कमा सकते हैं।

Amit Kumar
Coming from Vaishali Bihar, Amit works to bring nominal changes in rural background of state. He is pursuing graduation in social work and simentenusly puts his generous effort to identify potential positivity in surroundings.

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
- Advertisement -

Latest Articles