Tuesday, October 4, 2022

Buy now

अनेकों बीमारियों में जड़ी-बूटी के तरह इस्तेमाल होने वाला बहुगुणी अश्वगंधा: इस तरह घर पर उगाइए

आयुर्वेद शास्त्र में अश्वगंधा एक मशहूर नाम है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी जैसे औषधीय गुण पाए जाते हैं। जिससे ह्रदय रोग, डायबिटीज और एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी ठीक होती है।

अश्वगंधा बहुत महंगी होती है, लेकिन हर घर के लिए महत्वपूर्ण होती है इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि अश्वगंधा जैसी महंगी औषधी के पौधे आप अपने घर पर कैसे उगा सकते हैं? – grow Ashwagandha plant at home

अश्वगंधा कई बीमारियों में है कारगर

अश्वगंधा कई बीमारियों में कारगर साबित होता है। भारत में इसकी खेती राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों में की जाती है। इसके अलावा हैदराबाद की रहने वाली दर्शा साई लीला (Darshan Sai Leela) नाम की एक महिला अपने छत पर अश्वगंधा की खेती करती हैं।

दूसरों के लिए बनी प्रेरणा

उनका यह कार्य किसी प्रेरणा से कम नहीं है। दर्शा खुद से की जाने वाली अश्वगंधा की खेती के बारे में विस्तार से बताती भी है, जिससे अन्य लोगों की मदद होती है।

गर्मी के मौसम में की जाती अश्वगंधा की खेती

अश्वगंधा की खेती के लिए गर्मी का मौसम सबसे अनुकूल होता है, क्योंकि इसमें ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। अगर आप गमले में अश्वगंधा के पौधे लगाना चाहते हैं, तो उसके लिए सबसे पहले अश्वगंधा के पौधों को तैयार करना पड़ता है। बजार में अश्वगंधा के बीज आसानी से उपलब्ध है। -grow Ashwagandha plant at home

इस तरह होता है अश्वगंधा का पौधा तैयार

अश्वगंधा के बीज को कहीं सतह पर लगाया जाता है। उसके ऊपर बालु की एक हल्की परत डाली जाती है, जिससे इसके पौधे के अंकुरण में आसानी हो। केवल एक सप्ताह में इसके बीज अंकुरित होकर बाहर आने लगते हैं।

दूरी का रखना होगा खास ख्याल

चार सप्ताह बाद अश्वगंधा का पौधा गमले में लगाने लायक बड़ा हो जाता है। इस दौरान इस बात का पूरा ख्याल रखें कि एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी लगभग 60 से 65 सेंटीमीटर की हो, ताकि सभी पौधे को समान पोषण मिल सके।

5 से 10 दिन के बीच करनी पड़ती है सिंचाई

अश्वगंधा का पौधा लगाते समय इस बात का पूरा ख्याल रखे कि गमले में ज्यादा पानी इकट्ठा ना हो क्योंकि इससे पौधे सूख जाते हैं। गर्मी के मौसम में औसतन तापमान 30 से 40 डिग्री के आसपास होता है।

करनी पड़ेगी 5-10 दिन पर सिंचाई

ऐसे में 5 से 10 दिन के बीच में एक बार इसकी सिंचाई करनी पड़ती है। अगर आपकी मिट्टी थोड़ी कम उपजाऊ है, तो उसमें खरपतवार, गोबर वाली का खाद या वर्मी कम्पोस्ट डाले, जिससे पौधे की वृद्धि में सहायता हो सके। – grow Ashwagandha plant at home

6 महीने में अश्वगंधा पूरी तरह तैयार

6 महीने में अश्वगंधा का फसल पूरी तरह तैयार हो जाता है। तैयार होने पर इसकी पत्तियां सूखने लगती हैं और इसका फल लाल हो जाता है।

कटाई के वक्त गीली हो जड़ें

कटाई के वक्त इस बात का पूरा ध्यान रखे कि इसकी जड़ें गीली हो ताकि उसे आसानी से उखाड़ा जा सके। इसके जड़ों को काट कर रख लिया जाता है और फलों को आगे की खेती के लिए संरक्षित कर लिया जाता है। इसमें कीटनाशक के तौर पर नीम ऑयल का भी प्रयोग किया जा सकता है।

छत पर उगाए 500 से भी अधिक अश्वगंधा के पौधे

हैदराबाद की दर्शा साई लीला (Darshan Sai Leela) इसी तरह अश्वगंधा की खेती कर कृषि की क्षेत्र में नई इबारत लिख रही है। वह अपनी छत पर 500 से भी अधिक अश्वगंधा के पौधे उगाती हैं। बहुत से लोग उनके बताए गए टिप्स से तथा उनकी तरकी से प्रेरित होकर अश्वगंधा की खेती कर रहे है। grow Ashwagandha plant at home.

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
- Advertisement -

Latest Articles