Wednesday, October 5, 2022

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1 अमरूद का वजन एक किलो से भी अधिक, गुजरात का यह किसान आज “थाई अमरूद” से लाखों रुपये कमा रहा है

अमरुद एक ऐसा फल है, जिसका स्वाद खाने में अधिक स्वादिष्ट और मीठा होता है, जिस वजह से इसे खाने के लिए सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता है और इसकी मांग देश हीं नहीं बल्कि विदेशो में बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि अब इसकी खेती व्यापारिक रूप से भी की जा रही है।

आज हम 54 वर्षीय मगन कामरिया (Magan Kamaria) की बात करेंगे, जो गुजरात (Gujarat) के मोरबी जिले के जबलपुर गाँव के रहने वाले हैं। इनके पास 30 बीघा जमीन है, जिसपर 25 बीघा जमीन पर ‘थाई अमरूद’ की खेती करते हैं। बाकी, 5 बीघा जमीन पर वह खीरा, मिर्च, टमाटर, लौकी जैसी सब्जियों की खेती करते हैं और हर साल करीब 20 लाख रुपए की कमाई करते हैं।

कैसे आया अमरूद की खेती करने का ख्याल?

मगन कामरिया (Magan Kamaria) अमरूद की खेती करने से पहले अपने खेतों में कपास और मूंगफली की खेती करते थे। लेकिन इसमें ज्यादा मुनाफा नहीं होती थी, जिस वजह से परिवार का खर्च उठाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसलिए इन्होंने खेती छोड़ने का मन बना लिया। इसी बीच उनके बड़े बेटे निलेश, जो कि हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट’ में काम करते हैं । उन्होंने उन्हे (मगन) एक नई वैरायटी के अमरूद के बारे में जानकारी दी और इसके बाद मगन ने अमरूद की खेती (Amrud Ki Kheti) करने का फैसला कर लिया।

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को अपनाकर करते हैं खेती

मगन कामरिया (Magan Kamaria) बताते हैं कि, “आज से छह साल पहले हमने अमरुद की खेती करना शुरू किया था। मैने अपने छोटे बेटे चिराग को अमरूद की खेती का प्रशिक्षण लेने हेतु छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित वीएनआर नर्सरी भेजा और ट्रेनिंग समाप्त करने के बाद हमने 4500 पौधे लगाएं, जो पौधे थाई वैरायटी के थे। इन पौधों की सिंचाई के लिए हमने ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को अपनाया ताकि पानी की ज्यादा बर्बादी न हो और सिंचाई भी रोजाना हो सके। अब हमें अमरूद की खेती से प्रति बीघा 60-70 हजार की कमाई होती है।”

Gujrat farmer earns in lakh by thai guava farming
थाई अमरूद

300 ग्राम से 1.5 किलो तक होता है अमरुद का वजन

मगन (Magan Kamaria) बताते हैं कि, उनके बगीचे में लगाए गए अमरूद में कम बीज होते हैं तथा इन अमरूदों का वजन 300 ग्राम से 1.5 किलो तक का होता है।

उन्होंने (Magan Kamaria) आगे बताया कि, “इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि, इसके रखरखाव के लिए हमें ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। इन पेड़ों को एक बार लगा देने के बाद 30 वर्षों तक हमें सोचने की जरूरत नहीं है।”

जैविक खाद का करते हैं इस्तेमाल

मगन अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने के बजाय जैविक उर्वरक, जैसे गाय के गोबर और मूत्र से बने जीवामृत का इस्तेमाल करते हैं।

खेती करने के तरीके को बताते हुए वे (Magan Kamaria) कहते हैं कि, “खेतों की जुताई करने में कोई परेशानी न हो इसलिए दो पौधों के बीच में कम से कम 8 फीट और लाइनों के बीच 12 फीट की दूरी होनी चाहिए।”

अमरुद को दिया बिजनेस का रूप

मगन (Magan Kamaria) ने बताया कि, जैसे-जैसे उनके अमरूदों की मांग बाजार में बढ़ने लगी और उसमे ज्यादा मुनाफा दिखने लगा, तब उन्होंने इसको बड़े पैमाने पर उतारना सही समझा और बिजनेस का रूप दे दिया।

बता दें कि, “मगन (Magan Kamaria) ने अमरूद बेचने के लिए राजकोट-मोरबी हाईवे पर ‘जय रघुनाथ फॉर्म’ के नाम से एक दुकान भी खोली है, जहाँ खुदरा और थोक, दोनों तरीके से फल बेचे जाते हैं और खुदरा भाव में उनका अमरूद 70-80 रुपए किलो और थोक में 45-70 रुपए किलो आसानी से बिक जाता है। इसके अलावें उनका अपना दुकान राजकोट, जामनगर, अहमदाबाद, बड़ौदा जैसे कई शहरों में है।

लोगों को दिया रोजगार

मगन (Magan Kamaria) ने अपने खेती को और आगे बढ़ाने के लिए 20-25 लोगों को अपने खेतों में रोजगार भी दिया है। और वे अपने बिजनेस को विस्तार करने के लिए जल्द अमरूदों से चॉकलेट और जैम बनाने की योजना बना रहे हैं।

निधि भारती
निधि बिहार की रहने वाली हैं, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी बतौर शिक्षिका काम करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही निधि को लिखने का शौक है, और वह समाजिक मुद्दों पर अपनी विचार लिखती हैं।

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