Wednesday, October 5, 2022

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सरकारी स्कूल की बदली ऐसी तस्वीर कि बच्चों को नहीं भाता प्राइवेट स्कूल, मौजूद है ये सभी सुविधाएं

स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, लेकिन आजकल लोग शिक्षा को भी व्यवसाय का जरिया बना लिए हैं। मानो शिक्षा भी पैसों से बिक रही है, जितने अच्छे स्कूल उतनी महंगी फीस। ऐसे में निम्न वर्गीय परिवार के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित रह जा रहे हैं क्योंकि अच्छे स्कूलों में पढ़ाना उनकी बात बस की बात नहीं रह गई है।

निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था तो मिल जाती हैं लेकिन सरकारी स्कूलों (Government School) की स्थिति दिन प्रतिदिन और भी बदहाल होते जा रही है। वहां के शिक्षक स्कूल तो आते हैं लेकिन सिर्फ पैसे कमाने के लिए। बच्चों को पढ़ाना.. उनकी देखभाल करना.. ऐसा लगता उनकी जिम्मेदारी ही नहीं है। बच्चे कब स्कूल आए और कब घर चले गए शिक्षकों को इसका भी कुछ अता पता नहीं रहता। ठीक इसके विपरीत है हरियाणा (Haryana) का एक सरकारी स्कूल, जहां के बच्चे प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं और बिना पैसे खर्च किए अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसका एक ही कारण है वहां के शिक्षकों में ईमानदारी।

कहां है यह सरकारी स्कूल

सभी माता-पिता यह सपना देखते हैं कि उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ें और कामयाब बने, लेकिन पैसे की कमी के कारण उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाता है। निजी स्कूलों में शिक्षा तो मिल जाती हैं लेकिन पैसों में बिकती है। ऐसे लोगों के लिए अच्छा उदाहरण है हरियाणा के फतेहाबाद जिला में ढाणी ढाका (Dhani Dhaka Primary School)का राजकीय माध्यमिक स्कूल। इस गांव की आबादी लगभग 3000 है। वहां के लोगों को बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव से दूर शहर में नहीं जाना पड़ता है क्योंकि उन्हें वहां के सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा मिल जाती है।

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यह सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूल को भी दे रहा टक्कर

ढाणी ढाका के सरकारी स्कूल में भी पढ़ने वाले बच्चे किसी प्राइवेट स्कूल के बच्चों से कम नहीं है। यहां के बच्चे भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं और किसी भी मामले में प्राइवेट स्कूल के बच्चों से कम नहीं हैं। यहां शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी सिखाए जाते है। यहां के सभी बच्चे अपनी तकदीर के खुद ही भाग्य विधाता है, क्योंकि उन्हें शुरू से ही अच्छी शिक्षा मिल रही है। कहा जाता है शिक्षा अच्छी शिक्षा ही शिक्षित समाज का निर्माण कर सकती है।

गांव के प्रधान ने बनाई योजना

अच्छी शिक्षा ही अच्छे भविष्य की निर्माता है, इस बात को ढाणी ढाका के लोगों ने जुनून के तौर पर लिया। लगभग 3 साल पहले वहां के ग्रामीणों ने शिक्षा में सुधार लाने और वेलफेयर सोसाइटी का निर्माण करने का निर्णय लिया। गांव के प्रधान विनोद कुमार ने सभी ग्रामीणों के साथ बैठक करके यह निर्णय लिया कि यहां का कोई भी बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़ने नहीं जाएगा। यह गांव वालों के सहयोग के बिना संभव नहीं हो पाएगा। इसमें सभी गांव वालों ने पूरा सहयोग किया और अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में भेजने लगे। गांव प्रधान ने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि किसी को भी आशा से निराशा न होना पड़े।

स्कूल में शिक्षकों की कमी को भी पूरा किया गया

सभी सरकारी स्कूलों की तरह ढाणी ढाका (Dhani Dhaka) के आठवीं तक के स्कूल में मात्र 3 ही शिक्षक थे। यह सोचने वाली बात है कि इतने कम शिक्षक इतने क्लास को कैसे पढ़ा पाएंगे। सरकार के भरोसे बैठने और सरकारी सिस्टम को कोसने के बजाय गांव वालों ने खुद इसका जिम्मा उठाया। वे शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए साथ मिलकर अपने सहयोग से प्राइवेट शिक्षकों को पढ़ाने के लिए बुलाए। इसके लिए कुछ सरकारी सहयोग.. दान की राशि और साथ ही गांव वालों से भी आर्थिक सहयोग मिला, जिससे शिक्षकों का मासिक वेतन दिया जाने लगा। बहुत कम समय में ही यह स्कूल मानो बोलने लगा। बच्चों की भी भीड़ बढ़ने लगी और किसी को भी अच्छी शिक्षा के लिए प्राईवेट स्कूलों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि यहां शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी मिल रहे हैं।

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स्कूल में उपलब्ध है ये सुविधाएं (Facilities in Dhani Dhaka Primary School)

ढाणी ढाका के सरकारी स्कूल में भी सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी ड्रेस कोड.. खेल का मैदान.. दूरदराज से बच्चों को आने के लिए गाड़ियों की सुविधा भी मौजुद है। इतना ही नहीं इस स्कूल का दृश्य भी इतना खूबसूरत है कि यहां की बच्चों के साथ अभिभावकों को भी कोई और स्कूल अब रास नहीं आ रहा। स्कूल के समय में किसी भी अन्य व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलती, यहां तक कि बच्चों के अभिभावकों को भी एंट्री करने के बाद ही अंदर का रास्ता दिखाया जाता।

आमतौर पर यह सभी सुविधाएं प्राइवेट स्कूलों में ही मौजूद होती है। सरकारी स्कूल का हाल तो ऐसा है कि सब कुछ कहा भी नहीं जा सकता। लेकिन अब ढाणी ढाका का यह सरकारी स्कूल किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं रहा। बच्चों के साथ-साथ वहां के अभिभावक भी बहुत खुश रहते हैं क्योंकि बिना अधिक पैसे खर्च किए उनके बच्चों को वह सभी सुविधाएं मिल रही, जिसके लिए उन्हें भारी रकम चुकानी पड़ती।

कोई भी बच्चा नहीं जाता अब प्राइवेट स्कूल

ढाणी ढाका (Dhani Dhaka) का कोई भी बच्चा अब प्राइवेट स्कूल में पढ़ने नहीं जाता है। शिक्षक और गांव वाले मिलकर उस स्कूल को और भी बेहतर बनाने का प्रयास जारी रखें हैं। हर सत्र में स्कूल में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, और अब नहीं पढ़ने वाले बच्चे भी स्कूलों के रास्ते की ओर बढ़ रहे हैं और शिक्षा से जुड़ रहे हैं।

ढाणी ढाका गांव के लोगों से प्रेरणा लेकर हमें भी शिक्षा की बागडोर मजबूत बनानी चाहिए, जिससे शिक्षित समाज का निर्माण हो सके। पूरे समाज को शिक्षित करना हम सबका कर्तव्य है क्योंकि शिक्षा ही समाज का दर्पण है। इसके लिए सरकार के भरोसे रहने से हमें सिर्फ भरोसा ही मिलेगा, उम्मीदें कभी पूरी नहीं होगी।

Anita Chaudhary
Anita is an academic excellence in the field of education , She loves working on community issues and at the same times , she is trying to explore positivity of the world.

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