Tuesday, October 4, 2022

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कुछ ऐसा है रजनीकांत और राज बहादुर का याराना, पगार में मिले 400 रूपये में से आधा अपने दोस्त को दे देते थे

बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में अपने अलग अंदाज से राज करने वाले थलाइवा रजनीकांत को शायद ही कोई भारतीय न जानता हो। हाल ही में उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड से नवाजा गया। अवार्ड समारोह के दौरान उन्होंने अपने जिगरी दोस्त राजबहादुर को अपना यह अवार्ड समर्पित कर दिया।

रजनीकांत के अनुसार राजबहादुर के साथ उनकी दोस्ती उस समय से है जब वह एक बस कंडक्टर के रूप में काम किया करते थे।

आइए जानते हैं थलाइवा और राजबहादुर के दोस्ती के बारे में।

बेंगलुरु के चामराजपेट में रहने वाले रजनीकांत के फैन राजबहादुर को हम जानते हैं। उन्होंने ही शिवाजीराव गायकवाड को रजनीकांत बनने के लिए प्रेरित किया। इन्हीं की वजह से रजनीकांत तमिल भाषा बोलना सीख पाए। इनकी दोस्ती के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।

ऐसा कहा जाए कि इनकी कहानी कृष्ण कुचेला की पौराणिक कथा से मिलती जुलती है तो गलत नहीं होगा। हालांकि इस दोस्ती में यही अंतर है कि कृष्ण और कुचेला की भूमिका का इन दोनों ने कई बार अदला-बदली कर लि।

लगभग 2 सप्ताह पहले ही रजनीकांत अपने सबसे प्रिय मित्र से मिलने बेंगलुरु आए थे।

गहरी है यह दोस्ती

रजनीकांत और राजबहादुर की यह दोस्ती 50 साल पुरानी है। वर्ष 1970 में जब राजबहादुर रजनीकांत से मिले थे तब रजनीकांत एक बस कंडक्टर के रूप में काम किया करते थे वही राजबहादुर ने एक ड्राइवर के रूप में नौकरी ज्वाइन किया।
राजबहादुर के अनुसार रजनीकांत ट्रांसपोर्ट स्टाफ में सबसे अच्छे एक्टर थे और जब भी कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम होता था तब रजनीकांत स्टेज पर अपना परफॉर्मेंस देते थे। इतना ही नहीं ड्यूटी खत्म करने के बाद भी वह विभिन्न नाटकों में काम भी किया करते थे।

राजबहादुर ने चेन्नई जाकर उन्हें एक्टिंग कोर्स ज्वाइन करने के लिए कहा। 2 साल का एक्टिंग कोर्स पूरा करने के बाद जब उस संस्थान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया उसमें रजनीकांत ने परफॉर्मेंस दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फिल्म निर्माता बाल चंद्रन भी वहीं मौजूद थे। उन्होंने रजनीकांत से कहा कि” सुनो लड़के तमिल सीख लो”। इस पर राजबहादुर ने रजनीकांत से कहा कि वह चिंता ना करें और प्रतिदिन उनसे सिर्फ तमिल में ही बात किया करें।

रजनीकांत ने कई बार यह बात भी बताई है कि राजबहादुर अपने ₹400 के पगार में से रजनीकांत को आधि पगार दे देते थे ताकि रजनीकांत चेन्नई जाकर एक्टिंग स्कूल में एडमिशन ले सके। रजनी को हर महीने अपने वेतन से आधा हिस्सा दे दिया करते थे। उनकी इसी मदद के कारण उन्होंने चेन्नई में एक्टिंग कोर्स पूरा किया।

आज रजनीकांत भले ही बहुत बड़े स्टार हैं लेकिन उन्होंने अपने पुराने दोस्त को नहीं भूला है और ना ही उनकी बात करते वह थकते हैं। रजनीकांत हमेशा ही अपने दोस्त के घर अचानक से पहुंचकर उन्हें अचंभित कर देते हैं। आम लोग और मीडिया की नजरों से बचने के लिए वह भेष बदलकर अपने दोस्त के घर पर बिना कोई फोन किए या संदेश दिए ही पहुंच जाते हैं। आज भी राज बहादुर के घर में रजनीकांत के लिए एक कमरा सुरक्षित रखा गया है।

अचानक आ जाता है यह मेहमान

राजबहादुर के अनुसार उन्हें कभी यह पता नहीं होता है कि रजनीकांत आने वाले हैं। वह अचानक से ही आकर दरवाजे की घंटी बजा देते हैं इसलिए उनके लिए हमेशा ही एक कमरा तैयार रखा जाता है। राज बहादुर के घर में रजनीकांत के लिए एक छोटा सा कमरा सुरक्षित रखा गया है जिसमें एक चारपाई लगी है और मुश्किल से इसमें एक और व्यक्ति नीचे सो सकता है। जब भी रजनीकांत उनके घर पर आते हैं तो दोनों दोस्त एक ही कमरे में बंद होकर घंटों बातें किया करते हैं। उसी कमरे में राजबहादुर चारपाई पर सोते हैं और रजनीकांत उनके पास ही जमीन पर लगे बिस्तर पर सो जाते हैं। वर्षों से ऐसा ही चलता रहा है।

राजबहादुर के अनुसार जब भी रजनीकांत उनके घर पर जाते हैं तो वह उनके लिए उनके दोस्त शिवाजी ही होते हैं ना कि सुपरस्टार रजनीकांत।

Amit Kumar
Coming from Vaishali Bihar, Amit works to bring nominal changes in rural background of state. He is pursuing graduation in social work and simentenusly puts his generous effort to identify potential positivity in surroundings.

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