Wednesday, October 5, 2022

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बच्चों को शिक्षित करने का अनोखा प्रयास, बैलगाड़ी पर पुस्तकालय, थाली बजाकर मोहल्ला क्लास लगाया जाता

कोरोना वायरस की वजह से लाखों लोगों की जिंदगी पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है। अगर देखा जाए तो इससे बच्चों की पढ़ाई पर भी काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आपको बता दें कि स्कूल के बंद होने से बच्चों की पढ़ाई एक कमरे तक हीं सीमित रह गई है। स्कूलों और गलियों में दौड़ते बच्चे मानो एक कमरे में कैद हो गए हैं।

बात अगर ऑनलाइन (Online) पढ़ाई की करें तो यह बच्चों के लिए कुछ खास फायदेमंद नहीं हैं बल्कि इससे बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। इस समस्या का समाधान मध्य प्रदेश की एक शिक्षिका ने ढूंढ निकाला, जिसे जान कर और देखकर आप भी वाहवाही करते नही थकेंगे।

आईए जानते हैं आखिर इस टीचर ने क्या किया?

विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई ना रुके इसके लिए बैतूल, मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की एक शिक्षिका ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसे जानकर और देख कर आप भी उनकी सराहना करते नहीं थकेंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार देश के अथवा बच्चों के उज्जवल भविष्य बनाने के लिए इस शिक्षिका ने ऐसा जुगाड़ लगाया जो काफी दिलचस्प है। उन्होंने एक बैलगाड़ी को एक लाइब्रेरी के रूप में बना दिया ताकि गांव के सभी बच्चों तक किताबे आसानी से पहुंच सके।

Madhyapradesh Teacher unique teaching techniques

कैसे हुई शुरुआत?

शिक्षिका कमला दवन्डे (Kamala Davande) ने गांव में बैलगाड़ी का एक जुगाड़ लगाया और उस पर किताबें सजाकर एक बेहतरीन लाइब्रेरी तैयार कर दिया। इस लाइब्रेरी के साथ घर-घर जाकर बच्चों को किताबें भी दी।

आपको बता दें कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाले बच्चे बैलगाड़ी से काफी आकर्षित होते हैं और इसे देखते हीं दौड़े चले आते हैं। वैसे तो बैलगाड़ी खाद, चाड़ा, बीज आदि के कामों के लिए होता है परंतु शिक्षिका कमला ने इसे एक बेहतरीन लाइब्रेरी के रुप में तैयार कर दी जिससे बच्चे भी काफी आकर्षित हुए।

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क्या है इसके पीछे की वजह

शिक्षिका कमला ने यह लाइब्रेरी सिर्फ 2 दिन के लिए हीं खोली थी परंतु इस अनोखी लाइब्रेरी के कारण बच्चों और उनके माता-पिता में एक अलग सी खुशी दिखी। आपको बता दें कि पिछले शनिवार को यह किताबें बच्चों को बांटने के लिए मिली थीं। रामजी ढाना नामक गांव में करीब 87 बच्चे पढ़ते थे परंतु बच्चों तक किताबें पहुंचाने का कोई साधन नहीं था।

किताबें ले जाने के लिए स्कूल के पास ना तो गाड़ी थी और ना हीं कोई सहायक। इसके बाद इस शिक्षिका ने बताया कि स्कूल में सिर्फ 2 शिक्षक ही है और उसी में वे अकेले ही ड्यूटी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि दूसरी शिक्षिका कोरोना से संक्रमित हो चुकी थी और वह छुट्टी पर थी। इसके बाद उन्हें एक बैलगाड़ी को लाइब्रेरी बनाने का आइडिया आया और उन्होंने 50 रुपए किराए देकर, बच्चों को किताबें देने के लिए निकल गई।

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थाली के साथ मोहल्ला क्लास

शिक्षिका कमला की लाइब्रेरी तो खास है ही पर उनका मोहल्ला क्लास भी बेहद खास है। कमला गांव के अलग-अलग घरों में मोहल्ला क्लास लगाती हैं और जिस घर में क्लास लगने वाली होती है वहां के पैरेंट थाली और चम्मच बजाते हैं। इस खास थाप के बाद हीं क्लास शुरु हो जाती है।

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कमला के द्वारा किए गए इस प्रयास को लोग काफी पसन्द कर रहे हैं। इस कोरोना काल में जहां लोग अपने कामों को लेकर घर से बाहर निकलने से डरते हैं, वही कमला ने बच्चों की पढ़ाई न रुके इसलिए जो कदम उठाया है वह बेहद सराहनीय है।

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