Wednesday, October 5, 2022

Buy now

‘बेवफा चाय’ के बाद पेश है ‘MBA फेल कचौड़ी वाले’ की कहानी: प्रेरणा

आए दिन बेरोजगारी बढ़ती ही जा रही है, जिसका नतीजा है कि अच्छी खासी डिग्री लेने के बावजूद भी युवाओं को अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही है। आज से पहले आपने बेवफ़ा चाय वाले’ और ‘MBA चाय वाले’ की स्टोरी तो जरुए सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी स्टोरी बताएंगे, जिसके बारे में शायद ही आपको पता होगा। यह स्टोरी एक ‘कचौड़ी वाले’ की है। यह कोई आम कचौड़ी वाला नहीं है यह MBA फ़ेल’ कचौड़ी वाला है। – Satyam Mishra from UP, after failing in MBA sets up shortbread cart in the name of ‘MBA Fail’ kachori wala.

दुकान का नाम है MBA फ़ेल कचौड़ी वाला

आज हम एक ऐसे कचौड़ी वाले की बात करेंगे, जिसका दुकान का नाम ही है MBA फ़ेल कचौड़ी वाला। यह नाम सुनने में थोड़ा अजीब सा लगता है। यह नाम उन्होंने केवल अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए नहीं रखी है बल्कि यह उनकी सच्चाई है। उनमें मेहनत और कुछ कर दिखाने का जज्बा भी है। यह कचौड़ी वाले का नाम सत्यम मिश्रा (Satyam Mishra) है, जो की यूपी (UP) के फ़र्रुखाबाद के रहने वाले हैं।

MBA fail kachauri wala's story

MBA की पहले सेमिस्टर में ही हुए फ़ेल

सत्यम ने साल 2018 में कासगंज के हजरत निजामुद्दीन डिग्री कालेज से बीएससी की डिग्री लेने के बाद बरेली के किसी संस्थान में MBA में दाखिला ले लिया, लेकिन परिवार की ख़राब आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाए जिसका नतीजा यह रहा कि वह अपने पहले सेमिस्टर में ही फ़ेल हो गए। सत्यम की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी, जिससे वह आगे की पढ़ाई कर सके।

नौकरी नहीं मिलने पर कचौड़ी का ठेला लगाने का फैसला

सत्यम पढाई छोड़ नौकरी खोजने लगे, लेकिन जब कहीं कोई नौकरी नहीं मिली तो वह कचौड़ी का ठेला लगाने का फ़ैसला किए। इसके लिए सत्यम सबसे पहले फ़र्रुखाबाद की आवास विकास कालोनी में एक कमरा किराए पर लिए। उसके बाद शहर के ‘लोहिया प्रतिमा’ के पास ‘कचौड़ी का ठेला’ लगाना शुरू कर दिया। उस समय भी सत्यम अपने MBA का सपना पूरा करना चाहते थेl – Satyam Mishra from UP, after failing in MBA sets up shortbread cart in the name of ‘MBA Fail’ kachori wala.

MBA fail kachauri wala's story

ठेले के यूनिक नाम की वजह से लोग हुए आकर्षित

सत्यम अपने MBA के सपने को हमेशा याद रखने के लिए ठेले का नाम ‘MBA फ़ेल कचौड़ी वाला’ रख लिए। वर्तमान में लोग उनके ठेले के नाम की वजह से उनके तरफ़ आकर्षित होते हैं। सत्यम पिछले 2 महीने से कचौड़ी का ठेला लगा रहा है। इस काम में उनका भतीजा नितिन मिश्रा भी उनकी मदद करते है, जो हाईस्कूल फ़ेल है। सत्यम बताते है कि उन्हें ‘कचौड़ी का ठेला’ लगाने का आईडीया पीएम नरेंद्र मोदी के उस बयान से आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता अगर आप बेरोज़गार हैं और परिवार चलाने के लिए आपको पकौड़े भी बेचने पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। सत्यम कहते हैं कि उन्हें यह काम करने में कोई शर्म नहीं है।

हर महीने करते है 10 हज़ार रुपये की कमाई

आज के समय में सत्यम MBA फ़ेल कचौड़ी वाले के ठेला के नाम से बेहद कम समय में बहुत पॉपुलर हो चुके है। ग्राहकों को पेमेंट में दिक्कत न हो इसके लिए सत्यम ऑनलाइन पेमेंट का ऑप्शन भी देते है। इसके अलावा आराम से बैठकर कचौड़ी का आनंद ले सके इसकी सुविधा भी की गई है। यहां आने वाले ग्राहक पकौड़े खाने के साथ ही सत्यम के साथ सेल्फ़ी भी लेते हैं। सत्यम कचौड़ी बेचकर हर महीने करीब 10 हज़ार रुपये की कमाई कर रहे है।

MBA fail kachauri wala's story

सत्यम कचौड़ी बेचकर अपने परिवार को संभाल रहे है

सत्यम की 4 बहनें और एक बड़ा भाई है। उनका बड़ा भाई शिवदत्त मिश्रा दिल्ली में नौकरी करते है और उनकी 3 बहनों की शादी हो चुकी है, जिसमें एक बहन और सत्यम अब भी अविवाहित हैं। बड़ा परिवार होने की वजह से आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन अब वह कचौड़ी बेचकर अपने परिवार को संभाल रहे है। आज भी सत्यम MBA को भूले नहीं है। उनका कहना है कि दुकान से अच्छी कमाई हुई तो वह फिर से MBA में दाखिला लेंगे। सत्यम से आज के युवाओं को प्रेरणा लेना चाहिए की कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। – Satyam Mishra from UP, after failing in MBA sets up shortbread cart in the name of ‘MBA Fail’ kachori wala.

प्रियंका ठाकुर
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
- Advertisement -

Latest Articles