Thursday, September 29, 2022

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मध्यप्रदेश सिविल सेवा का 4 साल से नहीं आया रिजल्ट, इंतजार में अभ्यर्थियों ने शुरू किया स्टार्टअप

हर युवा का सपना होता है कि वह आगे चलकर के अपने जिंदगी में सफल होंगे इसके लिए वह कड़ी मेहनत और लगन के साथ-साथ अपनी पढ़ाई करते हैं। इन युवा के साथ उनके माता-पिता का भी सपना होता है कि हमारा बच्चा एक अच्छा आदमी बन सके जिसके लिए वह दिन-रात मेहनत करके अपने बच्चे को पढ़ाते लिखाते हैं

मध्यम वर्ग या फिर उससे नीचे आते हैं जिनकी घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती है वह चाहते हैं कि हमारी नौकरी जल्द से जल्द लग जाए जिसके लिए वह पहले से ही मेहनत करने लगते हैं। लेकिन कभी-कभी सरकार की भी गलती होती है जिससे युवाओं को इसका मुआवजा भुगतना पड़ता है।

यह कहानी मध्य प्रदेश के सिविल सेवा की है। इस सिविल सेवा परीक्षा में कई उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए परंतु इनके अंतिम परिणाम अभी तक नहीं आया है जिसके चलते युवा अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए या अपने घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ नया स्टार्टअप कर रहे हैं। वह मजबूर होकर इन कामों को स्टार्ट कर रहे हैं। आईए जानते हैं वह युवा कौन है।

मध्य प्रदेश सिविल सेवा आयोग

मध्यप्रदेश सिविल सेवा आयोग यानी कि एमपीपीएससी की भर्ती परीक्षा पिछले लगभग 4 साल पहले हुई थी। इस भर्ती परीक्षा में 1400 पदों की वैकेंसी थी जिसने से लगभग 10 लाख परीक्षार्थी इस परीक्षा में भाग लिए थे। इस परीक्षा को पास करने के लिए परीक्षार्थी अपनी कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई किए थे परंतु परीक्षार्थी का दुर्भाग्य यह है कि इनकी अभी तक की अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया गया है। जिसके चलते जितने भी परीक्षार्थी इस परीक्षा को दिए हैं वह काफी परेशान हैं। इनके साथ-साथ इनके माता-पिता भी काफी परेशान हैं और अपने बच्चों पर घर की जिम्मेदारी का एहसास दिलाते हैं।

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एमपीपीएससी की अंतिम घोषणा ना आने के बाद इंदौर के रहने वाले अजीत और तेज ने अपनी घर की जिम्मेदारियों को देखते हुए इन्होंने PCS समोसेवाला और PCS फलाहार का स्टार्टअप शुरू कर दिया जिसे उनके घर का और उनके पढ़ाई का खर्च निकल सके आईए इनके बारे में कुछ जानते हैं।

• अजीत सिंह (PSC समोसेवाला)

अजीत सिंह इंदौर के रीवा जिले के निवासी हैं। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यही से कि है साल 2016 में इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पूरी कर लेने के बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा यानी एमपीपीएससी की तैयारी करने के लिए साल 2017 में इंदौर आए थे। जिसके बाद इन्होंने अपने लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई में जुट गए साल 2019 और साल 2020 में इन्होंने PCS की परीक्षा दी थी। 2020 के PCS परीक्षा में एक नंबर से वे पीछे रह गए जिसके कारण इन्हें इस साल के PCS परीक्षा में असफलता हाथ लगी परंतु इन्होंने हार नहीं मानी और फिर से इसकी तैयारी में जुट गए अब वे 2021 की PCS परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं परंतु इनकी इस पूरे दौर की कहानी कुछ अलग है।

अजीत सिंह बताते हैं कि मध्य प्रदेश के सिविल सेवा आयोग की पिछले 4 साल की परीक्षा का परिणाम घोषित अभी तक नहीं किया है जिसकी वजह से हमें घर में काफी दवाब बना हुआ है। और यह दबाब दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। वे बताते हैं कि जब मैं पढ़ाई करने के लिए गया था तो हमें पढ़ाई के लिए हर साल 70,000 रुपए खर्च हो रहे थे और यह खर्च हमें घर से करना पड़ रहा था। परंतु परिणाम में देरी होने की वजह से मेरे घर वालों का दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। और अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए पैसे भी नहीं हैं।

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इन सभी बात को सोचते हुए अजीत ने अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला ले लिया जिससे वह अपनी आगे की पढ़ाई कर सकें और घर से पैसे ना मांगना पड़े। अजीत ने समोसे बेचने का बिजनेस स्टार्ट किया। यह दोपहर 3 बजे से लेकर के 9 बजे तक समोसे बेचते हैं और जो समय बचता है उसमें वह अपनी पढ़ाई करते हैं। आज इतने अपने इस समोसे वाले बिजनेस का नाम PSC समोसे वाला रखा है जो काफी यूनिक है। अजीत के इस काम को देखकर और युवाओं को प्रेरणा भी मिलती है।

• तेज कुमार (PSC फलाहार)

तेज मध्य प्रदेश के रीवा जिले के निवासी हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा यही से हुई है इसके बाद इन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली के इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन ले लिए। यह बताते हैं कि हम पिछले 6 सालों से सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं। जिसमें हमने दो साल यूपीएससी की भी तैयारी की है। दो साल यूपीएससी की तैयारी करने के बाद मैंने एमपीपीएससी की तैयारी करनी शुरू कर दी। जिसमें हमने साल 2019 और साल 2020 में MPPSC की परीक्षा दी है और साल 2021 की परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं।

तेज कहते हैं कि हमने अपनी तैयारी काफी मेहनत और लगन के साथ किया है। मेरे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मैं अपने जरूरत को पूरा करने के लिए बच्चों को कोचिंग पढ़ाता था। एक बार हमने अपनी दोस्तों के साथ खाने के लिए फल यानी कि पपीता खरीदा और फिर अपनी दोस्तों के साथ बैठकर पपीता खाने लगे। इसी समय मेरे दिमाग में पपीते का बिजनेस करने का आईडिया गया।

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इसके बाद मैंने पहला दिन 6 किलो पपीता खरीद कर उसे बाजार में बेच दिया इन 6 किलो पपीता से हमें 35 रुपए का मुनाफा हुआ। जिसके बाद मैं यह काम निरंतर जारी रखा और आज मैं प्रतिदिन इस पपीते के बिज़नस से 300 रुपए कमा लेता हूं। परीक्षा का अंतिम परिणाम ना आने की वजह से मेरे घर में मेरे ऊपर दबाव काफी बनता जा रहा था इसलिए मैंने पपीते का बिजनेस स्टार्ट कर दिया और इसका नाम PSC फलाहार रखा।

परीक्षार्थी अपनी पूरी तपस्या और लगन के साथ अपने सपने को पूरा करने में लगे रहते हैं। इसके साथ-साथ इनके माता-पिता भी इनके पीछे काफी मेहनत करते हैं। जिससे उनके बच्चे भविष्य में कुछ बन सके। परंतु कभी-कभी सरकार की सिस्टम खराब हो जाने की वजह से परीक्षार्थियों को ही मुआवजा भरना पड़ता है। अगर सरकार इस सिस्टम को सुधार दें तो उन युवाओं को अपने सफलता तक पहुंचने में कोई रोक नहीं सकता है।

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