Friday, February 3, 2023

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पूरी दुनिया की 800 करोड़ जनसंख्या में मात्र 45 लोगों में पाया जाता है यह ब्लड, सोने से भी महंगा है

हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण चीज ब्लड होती है वैसे इंसान के शरीर में अनेकों प्रकार के ब्लड ग्रुप होते हैं। A+, A-, B+, B-, O+, O-, AB+, AB- इस प्रकार किसान के शरीर में ब्लड ग्रुप पाए जाते हैं अगर किसी भी इंसान को ब्लड की जरूरत पड़ती है तो यह ब्लड ग्रुप ब्लड बैंक से मिल जाते हैं लेकिन कभी आपने गोल्डन ब्लड ग्रुप का नाम सुना है। यह गोल्डन ब्लड ग्रुप बहुत ही कम इंसान में पाया जाता है।

पूरी दुनिया भर में 800 करोड़ इंसान की आबादी है जिसमें यह गोल्डन ब्लड ग्रुप मात्र 45 इंसानों के शरीर में ही मिलता है। यह गोल्डन ब्लड ग्रुप सोने के कीमत से भी ज्यादा महंगा मिलता है। गोल्डन ब्लड ग्रुप मिलना काफी मुश्किल होती है तो आईए जानते हैं गोल्डन ब्लड ग्रुप के बारे में।

  1. गोल्डन ब्लड ग्रुप:-

गोल्डन ब्लड ग्रुप का दूसरा नाम आरएच नल (Rhnull) है यह दुनिया भर के इंसानो में मात्र 45 लोगों में पाया जाता है इसकी कीमत की बात की जाए तो यह सोने के भाव से भी ज्यादा मिलता है। वैसे तो यह गोल्डन ग्रुप ब्लड मिलना काफी मुश्किल है। जिसकी वजह से यह ब्लड ग्रुप मार्केट में न के बराबर मिलता है जिस इंसान को गोल्डन ब्लड ग्रुप की जरुरत होती है उसे काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है, तब जाकर यह ब्लड ग्रुप संभव होता है वैसे तो इसको खोजना बहुत ही कठिन है।

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  1. कम लोगों के शरीर में यह ब्लड ग्रुप क्यों पाया जाता है

जेनेटिक म्युटेशन के कारण यह गोल्डन ब्लड ग्रुप होता है RHAG जिनके म्युटेंशन की वजह से यह लोगों के शरीर में होता है वैसे गोल्डन ब्लड ग्रुप होने का कारण दो वजह से होता है।

• नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन वेबसाइट से पता चला है कि भाई बहन या चचेरे भाई के कारण या फिर किसी दूर के रिश्तेदार के बीच शादी होने के कारण उनके होने वाले बच्चों में गोल्डन ब्लड ग्रुप होता है।

• जेनेटिक म्युटेशन के कारण एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी के लोगों में ट्रांसफर होने के वजह से भी गोल्डन ब्लड ग्रुप होता है।

  1. गोल्डन ब्लड ग्रुप होने पर खतरा

शरीर में गोल्डन ब्लड ग्रुप होने से खतरा के संभावना बनी रहती है क्योंकि इस ब्लड ग्रुप में पाए जाने वाले इंसान को हिमोग्लोबिन की कमी होती है जिसके कारण शरीर पीला और रेड ब्लड सेल्स कम होने का खतरा बना रहता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर महिला गर्भ से है और महिला के शरीर में गोल्डन ब्लड है और उसके गर्भ में पल रहे बचे का भी शरीर में गोल्डन ब्लड है तो गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है और गोल्डन ब्लड ग्रुप पाए जाने वाले इंसान को ज्यादातर एनीमिया जैसी बीमारी होती है।

  1. गोल्डन ब्लड को Rhnull क्यों कहते हैं

जिसका Rh फैक्टर null होता है उसी इंसान के शरीर में गोल्डन ब्लड पाया जाता है इसलिए गोल्डन ब्लड को Rhnull कहते हैं हम लोगों के शरीर में जो खून बनता है वह तीन तरह के सेल से मिलकर बनता है।

• प्लेटलेट्स

• रेड ब्लड सेल

• वाइट ब्लड सेल

हम लोगों के शरीर में कौन से ब्लड ग्रुप है इसका पता हमें इन दो चीजों के कारण पता चलता है।

  1. एंटीजन-यहां रेड ब्लड सेल में मौजूद प्रोटीन को कहा जाता है।
  2. एंटीबॉडी-यह वाइट ब्लड सेल में मौजूद प्रोटीन को कहते हैं।

वैसे आम इंसानों के शरीर में Rh पॉजिटिव या निगेटिव होता है परंतु जिस इंसान के शरीर में गोल्डन ब्लड ग्रुप होता है उसकी बॉडी का Rh ना तो पॉजिटिव होता है और ना ही नेगेटिव होता है इसलिए यह शरीर में Rh फैक्टर null होता है।

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  1. गोल्डन ब्लड को डोनेट करने वाले कितने इंसान हैं

पूरी दुनिया में 800 करोड़ आबादी मे से मात्र 45 लोगों के शरीर में गोल्डन ब्लड ग्रुप पाया जाता है। इन 45 लोगों में से मात्र 9 लोग ऐसे हैं जो अपना गोल्डन ब्लड ग्रुप डोनेट करते हैं बाकी 36 लोग ऐसे हैं जो अपने गोल्डन ब्लड ग्रुप डोनेट नहीं करना चाहते हैं या उस स्थिति में नहीं हैं इसीलिए इस गोल्डन ब्लड ग्रुप की कीमत एक ग्राम सोने की कीमत से भी ज्यादा है।

  1. गोल्डन ब्लड ग्रुप पहली बार कहां देखा गया

बताया गया है कि नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन वेबसाइट के अनुसार साल 1961 में ऑस्ट्रेलिया के एक आदिवासी महिला के शरीर में गोल्डन ब्लड पहली बार देखा गया था जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल के डॉक्टर जीएच वोंज और उनके सह मित्रों ने इस गोल्डन ब्लड ग्रुप के सारे जानकारियां एकत्रित किए।

  1. गोल्डन ब्लड ग्रुप की जैसा कोई और ब्लड ग्रुप

गोल्डन ब्लड ग्रुप के जैसा ही एक और ब्लड ग्रुप है जिसे बॉम्बे ब्लड ग्रुप के नाम से जाना जाता है। मुंबई के गंगाराम अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. विवेक रंजन का कहना है कि हम लोगों के शरीर में पाए जाने वाले ब्लड लाल रक्त कणिकाओं में कुछ शुगर मॉलिक्यूल्स होते हैं जिससे पता चलता है कि कौन से व्यक्ति में कौन सा ब्लड ग्रुप है लेकिन जिस इंसान में बॉम्बे ब्लड ग्रुप पाए जाते हैं उनमें सुगर मॉलिक्यूल्स नहीं बन पाता है जिसके कारण इनमें केपिटल एच एंटीजन नहीं होता है जो किसी भी ब्लड ग्रुप में नहीं आता है।

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