Friday, September 30, 2022

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न महंगे कपड़े न पैर में चप्पल, पद्मश्री तुलसी गौड़ा लगा चुकी हैं 30 हज़ार पौधे: जानिए इनकी ज़िन्दगी के बारे में

प्रत्येक वर्ष देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले हस्तियों को राष्ट्रपति द्वारा उनके उत्कृष्ट कार्यो के लिए सम्मानित किया जाता है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सोमवार 8 नवंबर 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के कई हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। कुल 119 लोगों को इस वर्ष ये पुरस्कार दिए गए हैं, जिनमे से 10 लोगों को पद्म भूषण, 7 को पद्म विभूषण और 102 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

सम्मान पाने वाले इस वर्ष कुल 119 लोगों में 29 महिलाएं और एक ट्रांसजेडर भी शामिल है। आज हम बात करेंगे, इसी वर्ष सम्मानित की जाने वाली महिलाओं में से एक महिला तुलसी गौड़ा (Tulsi Gowda) की, जिनकी सादगी और उत्कृष्ट कार्य के वजह से पूरे देश में उनकी चर्चा हो रही है।

तुलसी गौड़ा (Tulsi Gowda)

कर्नाटक (Karnataka) के होनाली गांव (Honnali village) की रहने वाली तुलसी (Tulsi Gowda) कभी स्‍कूल नहीं जा पाईं। जब वह 3 साल ही थी, उनके तभी पिता का देहांत हो गया था। वे छोटी उम्र से ही अपनी मां के साथ नर्सरी में काम करती थीं। ऐसे तो वे कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन उन्हें पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों का ऐसा ज्ञान है इसलिए उन्हें ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेस्ट‘ कहा जाता है।

अब तक लगाये 30 हजार से ज्यादा पौधे

तुलसी गौड़ा पिछले 6 दशकों से पर्यावरण संरक्षण के काम में जुटी हुई हैं। वे 20 साल की उम्र से हीं पेड़-पौधों की देखभाल कर रहीं है और अब तक उन्होंने 30 हजार से ज्यादा पौधे लगाए हैं साथ ही साथ वो वन विभाग की नर्सरी की देखभाल करती हैं। उन्हें पेड़-पौधों से एक विशेष तरह का लगाव हो चुका है, जिसका परिणाम यह है कि 73 साल के उम्र में भी वे बखुबी अपने कर्तव्य का निर्वाहन कर रहीं है।

अब पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में कर्नाटक की 72 वर्षीय आदिवासी महिला तुलसी गौड़ा (Tulsi Gowda) को हाल हीं में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। बता दें कि, उन्‍हें पर्यावरण की सुरक्षा में उनके योगदान के लिए सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

पहले भी हो चुकी हैं सम्मानित

तुलसी गौड़ा (Tulsi Gowda) को पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए पहले भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र अवॉर्ड, ‘राज्योत्सव अवॉर्ड‘ और ‘कविता मेमोरियल‘ जैसे कई अवॉर्ड प्रदान किए गए हैं। वह वन विभाग की नर्सरी की देखभाल करती हैं।

सादगी के कारण है चर्चे में

इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेस्ट‘ कही जाने वाली तुलसी को उनकी सादगी के लिए बेहद पसंद किया जा रहा है। पद्म सम्‍मान लेने के लिए वे अपने पारंपरिक आदिवासी लिबास में नंगे पैर ही राष्‍ट्रपति भवन पहुंचीं थी। अपने इस सादगी को लेकर उनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। खेत, खरीहाल तथा वन से जुड़ी एक आदिवासी महिला का राष्‍ट्रपति भवन तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी संघर्ष का परिणाम है।

किन लोगों को मिलते हैं पद्म पुरस्कार?

भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री पुरस्‍कार है। पद्म पुरस्कार साहित्य और शिक्षा, सार्वजनिक मामलों, कला, सामाजिक कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, सिविल सेवा, खेल आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हस्तियों को राष्ट्रपति के द्वारा प्रदान किए जाते हैं।

लोगों को देना चाहती है संदेश

आज के समय में तुलसी गौड़ा (Tulsi Gowda) ने इस बात को साबित कर दिया है कि इंसान के व्यक्तित्व की पहचान उसके कपड़ों से नहीं बल्कि उसके कर्मो से होता है। उन्होंने 72 साल की उम्र में भी पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने के लिए पौधों का पोषण करना और युवा पीढ़ी के साथ अपने विशाल ज्ञान को साझा करना जारी रखी हुए हैं। इसके साथ हीं साथ वे आने वाली पीढ़ी को वन संरक्षण तथा इस से जुड़ी सभी जानकारीयों के लिए प्रेरित करती हैं।

निधि भारती
निधि बिहार की रहने वाली हैं, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी बतौर शिक्षिका काम करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही निधि को लिखने का शौक है, और वह समाजिक मुद्दों पर अपनी विचार लिखती हैं।

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