Friday, September 30, 2022

Buy now

हिंदी मीडियम स्टूडेंट रहें Paytm फाउंडर विजय शेखर को मैगजीन्स पड़ने का था शौक, वहीं से मिला बिजनेस आइडिया

Digital India के बढ़ते कदम ने हमारे पॉकेट से कैश की जरूरतों को कम कर दिया है। बड़ी से बड़ी मॉल हो या छोटे स्टॉल अब हर जगह फॉर्म ऑनलाइन पैसों का भुगतान कर सकते हैं। और ऑनलाइन कैशलेस लेनदेन में पेटीएम का सबसे बड़ा योगदान है। Cashless shopping

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सक्सेस होने के पीछे की स्टोरी हमेशा ही अनोखी रहती है। ऐसे ही कनेक्ट स्टोरी पेटीएम के सक्सेस स्टोरी की भी है तो आइए जानते हैं पेटीएम की सक्सेस स्टोरी।

विजय शेखर शर्मा

पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा यूपी के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उन्हें अपना यह कारोबार खड़ा करने में काफी मेहनत लगी। हर रविवार व बाजारों में घूमते थे और फॉर्ब्स, फार्च्यून जैसी मैगजीन स्कोर खरीदा करते थे। लेकिन कड़ी मेहनत ने आज उन्हें फोर्स के अरबपतियों की श्रेणी में खड़ा करती है। उनके पिता स्कूल में शिक्षक थे और पूरे परिवार का भरण पोषण उसी से होता था। Founder of Paytm Vijay Shekhar

हिंदी मीडियम से पूरी की शुरुआती शिक्षा

विजय शेखर शर्मा ने अपनी शुरुआती शिक्षा हिंदी मीडियम से पूरी की और आगे की शिक्षा उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पूरी की। उन्होंने वहां कम्युनिकेशन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स से इंजीनियरिंग की उपाधि ग्रहण की।

सफलता की शुरुआत

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने 1997 में एक वेबसाइट शुरू की जिसका नाम उन्होंने indiasite.net रखा लेकिन जल्द ही उन्होंने इस वेबसाइट को बेंच दिया। वर्ष 2000 में उन्होंने एक और वेबसाइट शुरू की जिसका नाम उन्होंने one97 कम्युनिकेशन रखा पेटीएम की पैरंट कंपनी का भी नाम यही है।

पेटीएम की स्थापना

पेटीएम जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरुआत 2010 में एक किराए के मकान से हुई थी। जब सभी अपनी आगे की शिक्षा पूरी करने के लिए अमेरिका का रुख कर रहे थे तब उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत की थी। उन्होंने इसके लिए बहुत शिक्षा प्राप्त की और अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। अपने कार्य की शुरुआत करने के बाद एक टेलीकॉम ऑपरेटर उनका पहला कस्टमर बना। How Paytm was established

विजय ने यह बताया कि उन्होंने जिस काम की शुरुआत की थी उसमें उन्हें क्या इसके फ्लोर आने की उम्मीद नहीं थी। बहुत जल्द ही उनके पास जो बची हुई राशि थी वह भी खत्म हो गई। अपने काम को जारी रखने के लिए उन्होंने ₹8 लाख का लोन भी लिया। अपने काम की होड़ में लगे विजय की मुलाकात एक ऐसे सज्जन पुरुष से हुई जिन्होंने उनसे कहा कि अगर तुम मेरे हानि वाले कंपनी को सुधार दो तो मैं तुम्हारी सहायता जरूर करूंगा। विजय ने उस काम को पूरा किया और उस कंपनी के मालिक ने विजय की कंपनी में अपना निवेश किया और उसके बाद पेटीएम ने अपनी रफ्तार पकड़ ली।

फोर्स के अरबपति लिस्ट में शामिल हुए

इंडिया को कैशलेस बनाने वाले पेटीएम के फाउंडर को वर्ष 2011 में बहुत सारे अवसर मिले लेकिन उन्होंने स्मार्टफोन पेमेंट को ही अपना रास्ता बनाया। वर्ष 2017 में विजय का नाम forbes अरबपतियों में शामिल हुआ। उस वक्त अमेरिकी डॉलर के हिसाब से उनके पास 2.1 अरब डॉलर था। अगर इंडियन करेंसी की बात करें तो उनके पास कुल 16,775 करोड़ रुपए है।

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
- Advertisement -

Latest Articles