Thursday, September 29, 2022

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बैसाखी पर स्कूल जाकर पढ़ा रही हैं 93 वर्षीय यह शिक्षिका, इनके जुनून और जज्बे को लोग करते हैं सलाम

अध्यापक बनना आसान नहीं हैं क्योंकि इस दौरान छात्रा को एक बेहतर इंसान बनाने की जिम्मेदारी होती है। कुछ लोगों के लिए टीचर बनना शौक होता है तो वहीं कुछ के लिए यह आमदनी का एक जरिया बन जाता है। आज तक आपने टीचर्स के ना जाने कितने किस्से सुने होंगे, जिसमें अध्यापक का एक ही लक्ष्य होता है कि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को शिक्षित करें और उन्हें एक बेहतर भविष्य दें। ऐसे जुनून वाले टीचर्स की कोई कमी नहीं है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी छात्रों को दे दी। – Professor Santamma from Machilipatnam, has been teaching Physics for the last 6 decades, now she is 93 years old.

पिछले छह दशक से कॉलेज में पढ़ा रही है फिजिक्स

आज हम एक ऐसे अध्यापक की बात करेंगे जिसके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है छात्रों को शिक्षित करना। इस दिशा में काम करते हुए उनके लिए रिटायरमेंट भी कोई मायने नहीं रखता और ना ही उन्हें उम्र रोक पाई है। उनका नाम है प्रोफेसर चिलुकुरी संतम्मा (Professor Santamma Machilupatnam) और वह फ़िज़िक्स पढ़ाती हैं। यह विषय उनका पैशन था, जो अब उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया है। 93 साल की हो चुकी प्रोफेसर संतम्मा सेन्टुरियन यूनिवर्सिटी में पिछले 6 दशकों से पढ़ा रही हैं। घुटने की सर्जरी होने की वजह से उन्हें चलने में समस्या होती है और वह बैसाखियों की मदद से चलती हैं।

Story Of Chilukuri Santhamma Professor Of Physics At Centurion University Andhra Pradesh Who Teachers At The Age Of 93
प्रोफेसर चिलुकुरी संतम्मा

प्रोफ़ेसर संतम्मा को पढ़ाने का इतना जुनून है कि वह अपने सारी तकलीफों को भूल कर मुस्कुराते हुए क्लास में जाती हैं। बता दें कि आंध्र प्रदेश के विजयानगरम् स्थित इस यूनिवर्सिटी में वह लंबे समय से फ़िज़िक्स पढ़ा रही हैं। प्रोफ़ेसर संतम्मा का कहना हैं कि उन्हें उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरी मां वन्जक्शम्मा 104 साल की उम्र तक जीवित थीं। उनके अनुसार स्वास्थ्य हमारे दिमाग पर निर्भर करता है और दौलत हमारे दिलों पर इसलिए हमें हमेशा अपने दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने की कोशिश करनी चाहिए। प्रोफेसर संतम्मा कहती हैं कि मैं आखिरी दम तक पढ़ाती रहूंगी।

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छात्र में प्रोफेसर संतम्मा से होते हैं प्रेरित

छात्र भी प्रोफ़ेसर संतम्मा की मेहनत और काम के प्रति उनके डेडिकेशन को देख कर प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि उनके क्लास में हमेशा स्टुडेंट्स की भीड़ लगी रहती है। कॉलेज के अनुसार प्रोफ़ेसर संतम्मा कभी अपनी क्लास में देर से नहीं पहुंची। स्पेशलिस्ट के तौर पर वह केवल फिजिक्स पढ़ाती हैं, लेकिन उन्हें हर विषय के बारे में उन्हें इतना ज्ञान है कि छात्र उन्हें चलता-फिरता इन्साइक्लोपीडिया कहते हैं। प्रोफ़ेसर संतम्मा का जन्म 8 मार्च सन् 1929 को मछलीपट्टनम में हुआ था। वह केवल 5 महीने की उम्र अपने पिता को खो दी। – Professor Santamma from Machilipatnam, has been teaching Physics for the last 6 decades, now she is 93 years old.

इंटरमीडिएट के दौरान फिजिक्स में मिला गोल्ड मेडल

Story Of Chilukuri Santhamma Professor Of Physics At Centurion University Andhra Pradesh Who Teachers At The Age Of 93
पिछले छह दशकों से पढ़ा रही फिजिक्स

पिता के दुनिया से जाने के बाद प्रोफ़ेसर संतम्मा को उनके मामा ने पाल-पोषकर बड़ा किया। साल 1945 में जब वह एवीएन कॉलेज, विशाखापट्टनम में इंटरमीडिएट की छात्रा थी तब उन्हें महाराज विक्रम देव वर्मा से फ़िज़िक्स के लिए गोल्ड मेडल मिला था। आंध्र यूनिवर्सिटी से फ़िज़िक्स में B.Sc और फिर माइक्रोवेब स्पेक्ट्रोस्कोपी से D.Sc की। साल 1956 में वह फ़िज़िक्स लेक्चरर आंध्र यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ साइंस में पढ़ाना शुरू की। साथ ही वह केन्द्र सरकारी डिपार्टमेंट्स जैसे- काउंसिल ऑफ साइंटीफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर), यूनिवर्सिटी ग्रान्ट्स कमिशन (यूजीसी) और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी (डीसीएटी) में काम कर चुकी हैं।

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Bhagavad Gita The drive directive किताब का किया हिंदी अनुवाद

60 साल की उम्र में साल 1989 में जब प्रोफ़ेसर संतम्मा को रिटायर किया गया तो भी वह रूकी नहीं। रिटायरमेंट होने के बाद भी उन्होने अपने पैशन को नहीं छोड़ा। प्रोफ़ेसर संतम्मा की खास बात यह हैं कि वह केवल विद्या दान नहीं करती बल्कि विवेकानंद मेडिकल ट्रस्ट को अपना घर भी दान कर चुकी हैं और खुद किराये के घर में रहती हैं। प्रोफ़ेसर संतम्मा बताती हैं कि वह एक दिन में 6 क्लासेज़ ले सकती हैं। फ़िज़िक्स की स्पेसलिस्ट होने के साथ ही उन्हें वेद, पुराण, उपनिषदों में भी काफी ज्ञान हैं। जानकारों के अनुसार उन्होंने गीता के श्लोकों का अंग्रेज़ी में अनुवाद कर, Bhagavad Gita The Divine Directive नामक का किताब लिखी हैं। इस उम्र तक अपने कार्य को लेकर ऐसा डेडीकेशन आज के युवाओं को काफी प्रेरित करता है। – Professor Santamma from Machilipatnam, has been teaching Physics for the last 6 decades, now she is 93 years old.

प्रियंका ठाकुर
बिहार के ग्रामीण परिवेश से निकलकर शहर की भागदौड़ के साथ तालमेल बनाने के साथ ही प्रियंका सकारात्मक पत्रकारिता में अपनी हाथ आजमा रही हैं। ह्यूमन स्टोरीज़, पर्यावरण, शिक्षा जैसे अनेकों मुद्दों पर लेख के माध्यम से प्रियंका अपने विचार प्रकट करती हैं !

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