Wednesday, October 5, 2022

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छत्तीसगढ़ के इस युवा की अनोखी पहल: गोबर से बना रहे हैं चप्पल, बैग, ईंट, अबीर सहित कई चीजें

अक्सर गांव में हमें गोबर का ढेर दिख जाता है। गोबर बेहद हीं उपयोगी चीज होती है। कहीं-कहीं तो गोबर के उपले भी बनाए जाते हैं तथा इसके अलावा गोबर का खाद बनाकर खेत में भी डाला जाता है। इन दिनों बढ़ती महंगाई की वजह से कुछ लोग गोबर से ईट, सीमेंट आदि भी बना रहे हैं। ऐसे ही लोगों में से एक हैं छत्तीसगढ़ के रायपुर के गोकुल नगर के रहने वाले रितेश अगरवाल (Ritesh Agarwal)। वह पेशे में एक पशुपालक है और गाय के गोबर से दर्जनों चीज बनाते हैं। – Ritesh Agarwal from Raipur, makes many products from cow dung.

गोबर से बनाते हैं कई प्रोडक्ट

एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 3 साल में रुपेश बैग, पर्स, मूर्ति, दीपक, पेंट अबीर गुलाल चप्पल आदि कई चीज बना चुके है। साल 2022 का बजट पेश करने पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधानसभा में रुपेश के बनाए गोबर का बैग लेकर गए थे। आपको बता दें कि यह बैग रितेश और उनकी संस्था ‘एक पहल’ ने दस दिन की मेहनत के बाद तैयार किया था।

समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा

many product made from cow dung

रितेश ने रायपुर से साल 2003 में ग्रैजुएट की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने कई कंपनियों में नौकरी की, लेकिन उनका मन नहीं लगा। रितेश बताते हैं कि वह लंबे समय से समाज के लिए कुछ करना चाहते थे, लेकिन क्या करें यह समझने में वक्त लगा। एक इंटरव्यू के दौरान रितेश ने बताया कि अक्सर मैं सड़कों पर गाय घूमते देखता था। ऐसे में ज्यादातर गाय कचरा खाने की वजह से बीमार हो जाती हैं, तो कुछ के साथ कोई हादसा हो जाता है। इस दिशा में काम करने के लिए वह साल 2015 में नौकरी छोड़ एक गौशाला से जुड़कर गौ सेवा शुरु कर दिए।

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यह तो हम सब जानते हैं कि प्लास्टिक खाने से गाय की मौत हो जाती है। News Ctrls द्वारा बताई गई इस बात को रितेश भी बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि प्लास्टिक खाने से बड़ी संख्या में गायें बीमार पड़ रही हैं। ऐसी परिस्थिति में रितेश कहते हैं कि सभी को प्लास्टिक प्रदूषण कम करने का कोशिश करना चाहिए। आपको बता दें कि इस दिशा में कार्य करते हुए वह गोबर से चप्पल बनाकर, पर्यावरण से प्लास्टिक को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन से हुई बातचीत का एक वीडियो भी साझा कर रहे हैं।Ritesh Agarwal from Raipur, makes many products from cow dung.

वीडियो यहाँ देखें:-👇👇

गोबर से चप्पल बनाना है बेहद आसान

रितेश के अनुसार गोबर से चप्पल बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। गोहार गम, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, चूना और गोबर के पाउडर को मिलाकर 1 किलो गोबर से 10 चप्पलें बनाई जाती हैं। साथ ही यह चप्पल 3 से 4 घंटे बारिश में भीगने के बाद भी खराब नहीं होती। इसे धूप में सूखाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। गौशाला में काम करते हुए रितेश को गाय से जुड़े कई बातो का पता चला। इस दौरान उन्हें दूध देने वाली गाय और दूध न देने वाली गाय का उपयोग का पता चला।

रितेश अब अन्य लोगों को दे रहे हैं ट्रेनिंग

साल 2018-19 में छत्तीसगढ़ सरकार ने गोठान मॉडल शुरु किया, जिससे रितेश भी जुड़े। इस दौरान उन्होंने गोबर से किस्म-किस्म की चीजें बनाने की ट्रेनिंग ली और उसके बाद राजस्थान की राजधानी जयपुर और हिमाचल प्रदेश में जाकर गोबर से अबीर और गुलाल बनाना सीखे। गोबर को पाउडर में बदल कर उसमें फूलों की सूखी पत्तियों और कस्टर्ड पाउडर को मिलाया जाता है। पाउडर को अलग-अलग रंग देने के लिए भी प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करते है। इसको सीखने के बाद अब रितेश अन्य लोगों को भी यह सिखा रहे है। अब उनके पास गोबर के प्रोडक्ट्स की डिमांड न केवल छत्तीसगढ़ से बल्कि अन्य राज्यों से भी आती है। – Ritesh Agarwal from Raipur, makes many products from cow dung.

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