Thursday, September 29, 2022

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गाय के गोबर से ईंट, सीमेंट और पेंट बनाकर कर सकते हैं लाखों की कमाई, शिवदर्शन मलिक से जानिए इसका तरीका

आज कल के दुनिया में पैसे कमाने के बहुत तरीके हैं, वहीं पे अगर पैसे कमाने के साथ साथ कोई पर्यावरण को भी बचाने की कोशिश कर रहा है तो भला इस से ज्यादा अच्छा क्या हो सकता है। घर को तैयार करने के लिए सीमेंट, ईट, पेंट जैसी चीजों की आवश्यकता पड़ती है, घर बनाने के लिए हमे मजबूरन इन सब चीजों का उपयोग करना पर रहा है, परंतु इन सब के उत्पादन से प्रकृति को बहुत नुकसान पहुंचता है। अगर हम अपने घरों को इन आम इटो सीमेंट या पेंट से ना बनाकर गोबर से तैयार किए हुए ईंट, सीमेंट से बनें तो? क्या आपको ऐसा लगता है कि ऐसा नहीं हो सकता? इस बात को सोचने से पहले आइए आप एक बार शिव दर्शन मालिक के बारे में जान लीजिए।

Shivdarshan malik
फ्रेंडली घरों को इस तरह से मिला बढ़ावा

डॉ शिव दर्शन मालिक जो हरियाणा के रोहतक के रहने वाले है, पिछले 5 साल से ये लोगों को गोबर से बनाए गए सीमेंट, पेंट और ईंट इस्तेमाल करने के लिए उन्हें प्रेरित कर रहे हैं। सिर्फ गाव के लोग ही नहीं बल्कि शहर के लोगों को भी इस खोज का इस्तेमाल करते हुए शिव दर्शन मालिक इको फ्रेंडली घरों का निर्माण करवा रहे हैं।100 से ज्यादा लोगों को शिव दर्शन मालिक ट्रेंनिग दे चुके हैं। शिव मोहन अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग आनलाइन व ऑफलाइन के द्वारा सालाना इस काम से 50 से 60 लाख रुपए टर्नओवर प्राप्त कर रहे हैं।

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इस तरह से इस पहल की शुरुआत हुई

शिव दर्शन जो एक किसान के बेटे है, उन्होंने अपने गांव के ही स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त कि। रोहतक से उन्होंने ग्रेजुएशन, मास्टर्स और उसके बाद पीसीएचडी की डिग्री भी ली है। शिव दर्शन कुछ सालो तक एक कॉलेज में पढ़ाया। गांव की मिट्टी से जुड़े शिव दर्शन नौकरी छोड़ने के बाद यह तय किए की कुछ ऐसा करेंगे जिससे गांव के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूती मील सके, और गांव के लोगों को रोजगार के लिए कही जाना ना परे। इसी बात को सोचते हुए इन्होंने इस विषय में जानकारी जुटानी शुरू कर दी। कम लागत में आज के समय में वो लाखों की कमाई कर रहे हैं।

Eco friendly house

गोबर से ईंट बनाने का आइडिया कैसे आया

हमेशा से ही शिव दर्शन मालिक पर्यावरण, रिन्युबल एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी पर काम करना चाहते थे, वर्ष 2000 में IIT दिल्ली के साथ मिलकर, गौशालाओं से निकलने वाले वेस्ट और एग्री-वेस्ट से ऊर्जा बनाने के प्रोजेक्ट पर इसके लिए काम कर चुके हैं। जब वे अमेरिका गए थे कुछ प्रोजेक्ट के सिलसिले में तो वहां पे उन्होंने भांग के पत्तों में चूना मिलाकर हेमक्रिट बनाने और उसी से घर तैयार करते हुए देखा। गाय के गोबर का इस्तेमाल कर प्लास्टर तैयार करने की आइडिया उन्हें वहीं से आया। फिर वे अपने स्वदेश आकर अपना सपना साकार किया।

वैदिक प्लास्टर कैसे तैयार किया जाता है उसकी विधि

10 फीसदी गोबर,70 फीसदी जिप्सम,15 फीसद रेतीली मिट्टी वैदिक प्लास्टर तैयार करने के लिए उपयोग करते हैं। उसी के साथ – साथ वे 5 फीसद ग्वार का गम व नींबू के रस के पाउडर का उपयोग करते हैं। ग्वार के गम का उपयोग प्लास्टर पे करने से प्लास्टर में चिकनाई आती हैं।30 रूपये प्रति वर्ग फीट तक की खर्चा इस प्लास्टर में आता है। पानी डालने पर खुश्बू आना इसकी यही खासियत है। इसमें मजदूर का खर्चा बहुत ही कम होता है। इसमें हानिकारक धुएं को सोखने की क्षमता होती है, जो कि सबसे अहम बात है।

Eco friendly ent

महज चार रूपये प्रति ईंट का खर्च

डॉ मनोज दूत जो जयपुर के रहने वाले हैं डॉ शिव दर्शन मालिक ने उनके साथ मिलकर प्राकृतिक रंगो को तैयार किया है जो घरों में उपयोग होते हैं। इसमें ग्वार का गम, चूना और रंगीन मिट्टियां मिलाते हैं। जो कॉलर बाजार में मिलती है उनसे ये 20 फीसद कम रकम में खर्च होती हैं। वहीं वाणी गोयल जो अंबाला की रहने वाली है उनके साथ देसी गाय के गोबर से ईंट बनाना शुरू किया है। यह ना तो पानी से गलेंगी ना ही आग से जलेंगी। इसका वजन महज एक से सवा किग्रा तक होता है। खर्चा भी महज चार रूपये प्रति ईंट आ रहा है।

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