Friday, September 30, 2022

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भारत मे बना विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मूर्ति, 216 फ़ीट ऊंची मूर्ति सन्त रामानुजाचार्य को समर्पित

11 वीं सदी के वैष्णव संत रामानुजाचार्य भारतवर्ष के महान संतों में से एक थे। उनकी एक 1000 वीं जयंती पूरी होने के उपलक्ष में 12 दिवसीय सहस्त्रबदी समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बीते शनिवार को हैदराबाद में महान संत रामानुजाचार्य (Saint Ramanujacharya) की सबसे लंबी मूर्ति का उद्घाटन किया, जिसे “समानता की मूर्ति” यानी “स्टैचू आफ इक्वेलिटी” (Statue Of Equality) कहा गया है।

क्या है इस मूर्ति की विशेषता?

“स्टैचू आफ इक्वलिटी” (Statue Of Equality) बैठी हुई मुद्रा में दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति है जिसकी उंचाई 216 फीट है। वहीं थाइलैंड में बैठी हुई बुद्ध की प्रतिमा को दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति मारी जाती है। Statue of Equality को पंच धातु अर्थात पांच भिन्न-भिन्न धातुओं (लोहा, सोना, चांदी, तांबा और जिंक) को मिलाकर तैयार किया गया है। विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति (Worlds Second Largest Statue of Equality) 54 फीट उंची भद्र वेदी पर स्थापित है। इसके अलावा 63, 444 वर्ग फुट क्षेत्र में एक विशाल फोटो गैलरी तैयार की गई है जहां रामानुजाचार्य का सम्पूर्ण जीवन देखने को मिलेगा। इस परिसर में उनके कार्यों से जुड़ी लिखित सामग्री और प्राचीन दस्तावेज को रखा गया है तथा साथ ही यहां रिसर्च सेंटर और वैदिक डिजिटल लाइब्रेरी भी स्थित है। इसके अलावा इस परिसर में 108 दिव्यदेश बनाए गए हैं, जिसके पीछे मान्यता यह है कि हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के 108 अवतार माना गया है और ये 108 निर्मित दिव्यदेश उसी का प्रतीक चिन्ह है।

Statue of equality hyderabad

मूर्ति के पास लगेंगे सभी देशों के झंडे

जानकारी के अनुसार, संत रामानुजाचार्य की मूर्ति के पास सभी देशों की के झंडे लगाए जाएंगे। ऐसा करने के पीछे का कारण यह है कि महान संत रामानुजाचार्य ने अपने पूरे जीवनकाल में कभी भी जाति, धर्म और रंग के नाम पर कोई भेदभाव नहीं किया था।

कौन हैं महान संत रामानुजाचार्य?

हिंदू भक्ति परंपरा से आनेवाले संत रामानुजाचार्य (Saint Ramanujacharya) का जन्म 1070 ईसवी में तमिलनाडु के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे वरदराज स्वामी के भक्त थे और महान संत व समाज सुधारक थे। अलग-अलग अवसरों पर संदेश देते उन्होंने कहा था कि इश्वर के सामने सभी एक समान है और सभी जाति के लोगों को उनका नाम लेने का अधिकार है। संत रामानुजाचार्य ने जीवन के अलग-अलग पहलुओं भक्ति, जाति और पंथ में समानता के विचार को बढ़ावा दिया था।

Statue of equality hyderabad

पीएम ने कहा कहा?

पीएम (Prime Minister) ने वैदिक मंत्रों के साथ पूरे विधि-विधान से संत रामानुजाचार्य की 216 फीट उंची मूर्ति का अनावरण किया और उसे देश के नाम समर्पित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन के दौरान संत रामानुजाचार्य के विचारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने रामानुजाचार्य को ज्ञान का प्रतीक माना और कहा कि उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया और वे हमेशा से सामाजिक विकास चाहते थे।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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