Wednesday, October 5, 2022

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पति से Divorce हुआ लेकिन हौसला नही टूटा, 47 की उम्र में नया काम शुरू कर सफलता हासिल की

हर किसी की ज़िंदगी की शुरूआत सफलता से ही नहीं होती.. कई बार एक हादसा भी सफलता के सारे रास्ते खोल देता है और इंसान अपने मन मुताबिक मंजिल तक पहुंच जाता है। विशेषतः एक महिला की ज़िंदगी में ज्यादा महत्व घर गृहस्थी के कामों को ही दिया जाता है, लेकिन अवसर मिलने पर.. या किसी हादसे के वजह से एक महिला भी अपनी ज़िंदगी में वो मुकाम हासिल कर लेती है, जिसकी उसे कभी उम्मीद भी नहीं होती।

कुछ ऐसी ही संघर्ष भरी वास्तविक कहानी है Soraya Postel की, जिन्होंने अपनी निजी जिंदगी में Divorce जैसी घटना के बाद नई शुरुआत की और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा की मिसाल पेश की। आइए जानते हैं उनके बारे में-

Soraya Postel की इस कहानी को Humans of Bombay फेसबुक पेज ने दुनिया के सामने रखी है।

यह कहानी नहीं एक सच्चाई है….

Soraya की आयु जब महज 20 वर्ष की थी तब उनकी मुलाकात उनके पति से पहली बार हुई, फिर दोनों में प्यार हुआ और 23 की उम्र में उनकी शादी हो गई। वे दोनों एक परफेक्ट कपल थे। 20 साल तक एक-दूसरे के साथ रहने के बाद उनकी जिंदगी ने रुख मोड़ना शुरु किया और 47 की उम्र में दोनों तलाक लेकर अलग हो गए और अलग-अलग रास्तें पर निकल पड़े।

Soraya के दो बच्चे थे और दोनों विदेश में रहते थे। ऐसे में उन्हें एक नई जिंदगी शुरु करनी थी, कैसे करनी है ये उन्हें नहीं पता था। लेकिन अब वह अकेले सबकुछ करने के लिए काफी उत्सुक थीं।

सबकुछ समय के साथ अपनी जगह पर सही होता गया। एक समय उनकी दोस्त ने उन्हे कॉल करके कहा कि उनके स्कूल में फ़्रैंच टीचर की ओपनिंग है। उसके बाद एक इंटव्यू के बाद soraya को नौकरी मिल गई। इस नौकरी के लिए उन्हें बस से प्रतिदिन मुम्बई सेंट्रल से चेंबूर स्कूल जाना पड़ता था। फिर उन्होंने ट्यूशन क्लास लेना शुरु कर दिया, जिम ज्वाइन किया और देर से सोती थी, ऐसा लग रहा था जैसे उनके अंदर जीने की आग थी। उन्हें नहीं पता था कि इससे बाहर कैसे निकले और ना ही उन्होंने इसके लिए कभी कोशिश की थी।

उनकी आंखों में एक नए सपने का बसेरा था, वे खुद का घर चाहती थीं, हर सुबह ऊंची इमारतों के बीच उगता सूरज देखना उनकी ख्वाईश थी, और इसके लिए उनकी नजर एक ऐसे अपार्टमेंट पर थी, जहां का व्यू बेहद खुबसूरत था। इस अपार्टमेंट को खरीदनें में उनकी कुछ सेविंग्स, जीवन गुजारने के लिए मिले पैसे लगे और बहन से लोन लेना पड़ा…. इस तरह उन्हें सिर्फ और सिर्फ उनका अपने घर का सपना पूरा हुआ।

हालांकि, उनका यह घर पूरा खंडहर था, जिसके कारण उसमें कोई फर्नीचर नहीं था, उन्हें इस खंडहर को फिर से घर बनाना था। वे कभी भी जीवन में आ रही इन परेशानियों से घबराई नहीं, वह काम करने के लिए तैयार थीं। उन्होंने सेकंड हैंड फर्नीचर.., जमीन पर सोने के लिए गद्दा आदि लिया। ईंट दर ईंट मकान बनाया और जो बाद में एक खुबसूरत घर बन गया।

चार वर्षों के बाद soraya के एक करीबी ने उनसे कहा कि उनका अकेले रहना उन्हें अच्छा नहीं लगता। इसलिए उन्होंने Homestay Service शुरु कर दिया। उन्हें कम्प्यूटर के बारें में जानकारी नहीं थी, वह नहीं जानती थीं कि कम्प्यूटर को कैसे चलाया जाता है। लेकिन वे नए चीजों को आजमाना चाहती थीं और इसके लिए वे हमेशा तैयार थीं.., इसलिए उन्होंने सोचा ‘क्यों नहीं’..

अब वह अनेकों लोगों की मेहमानवाजी करने लगी। soraya उन्हें Airport लेकर जाती, उनके लिए खाना बनाना और उनका ख्याल रखना, इन सब बातों का ध्यान रखती थी। उन्हें ऐसा लगता था कि जैसे उनके घर में कोई जादू हो क्योंकि जो कोई भी उनके घर से वापस गया वह बेहद प्रसन्नता से गया। उनके काम से प्रभावित होकर एक शख्स ने तो उन्हें अपनी शादी के लिए दिल्ली भी बुलाया। यह Soraya के लिए एक सपने जैसे था। वह अपने इस काम के माध्यम से आर्थिक रूप से पूरी तरह से आजाद हो गई थी।

उनके लिए सबसे खुशी का पल वह था जब वे अपने मेहनत के बचाए हुए पैसे से अपनी बेटी के साथ दक्षिण अमेरिका घूमने जा सकी। वाकई, जब कोई औरत अपने खुद के बल-बूते कुछ करती है या कहीं विदेश घूमने जाती है तो वह पल उसके लिए बेहद खास होता है। Soraya के लिए वह क्षण बहत ही खुबसूरत था। अपने पैरों पर खड़ी होकर वह स्वयं को आर्थिक, भावनात्मक, और मानसिक रूप से स्वतंत्र महसूस कर रही थीं। वास्तव में एक औरत जब अपने पैरों पर खड़ी हो जाएं तो इससे बड़ी स्वतंत्रा शायद कुछ और नहीं है।

उस समय से अब वे हर साल एक ट्रिप प्लान करती हैं। ऐसा लगता है जैसे दुनिया ने उनके लिए सभी दरवाजे खोल दिए हों। अंत में वह कहती हैं कि विश्व का ऐसा कोई भी नजारा उतना खुबसूरत नहीं जितना खुबसूरत नजारा उनकी खिड़की से दिखता है। ये नजारा उन्हें हमेशा यह याद दिलाता है कि इस घर को उन्होंने स्वयं बनाया है। उन्हें लगता है कि जिंदगी सभी को दोबारा अवसर जरुर देती है और जब आपको सबसे कम उम्मीद होती है उसी समय चमत्कार होता है।

इस कहानी को पढ़ने के बाद किसी शख्स की कही बात याद आ गई, “शुरुआत करने के लिए कोई भी उम्र अधिक नहीं होती….”

आपको यह कहानी कैसी लगी..हमे जरुर बताएं।

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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