Thursday, September 29, 2022

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शौक पूरा करने के लिए छोड़ी नौकरी और करने लगे मधुमक्खी पालन, अब कमा रहे 20-25 लाख सालाना: Bee keeping

अपने पसंद के पेशे से जुड़ने का शौक हर किसी को होता है। इसी कड़ी में हम आपको हरियाणा के एक ऐसे शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने शौक को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़कर मधुमक्खी पालन (Bee keeping) का काम शुरू कर दिया।

सुभाष कांबोज ने छोड़ी अपनी नौकरी

सुभाष हाफिजपुर के रहने वाले हैं। उन्हें शिक्षक की नौकरी छोड़े हुए दो दशक बीत चुके हैं। अपने काम से अपनी एक अलग पहचान बनाने के कारण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम में उनकी तारीफ भी की है। -Subhash Kamboj from Hafijpur is doing bee keeping after leaving his job

मुख्यमंत्री से भी हुए सम्मानित

दो दशक पहले 1600 रुपए के वेतन पर शिक्षक की नौकरी करने वाले सुभाष ने अपने शौक को।जिंदा रखने के लिए मधुमक्खी पालन की ओर रुख किया था। उन्होंने अपने साथ-साथ 16 लोगों को रोजगार भी दिया है। सुभाष मधुमक्खियों से प्राप्त होने वाले शहद के अलावा छह तरह के उत्पाद भी तैयार करते हैं। इनसे प्रेरणा लेकर आसपास के कई युवा किसान भी मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। मधुमक्खी पालन के इस बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा सम्मानित किया गया है। -Subhash Kamboj from Hafijpur is doing bee keeping after leaving his job

मधुमक्खी पालन से कर रहे हैं अच्छी कमाई

सुभाष कांबोज की शिक्षा स्नातक तक हुई है। साथ ही उन्होंने डीपीएड डिप्लोमा भी किया है। उन्होंने वर्ष 1996 से पहले निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में काम किया था। उसके बाद खादी ग्राम उद्योग से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन के 6 बॉक्स से काम शुरू किया था। वही वे आज इस काम के जरिए लाखों कमा रहे हैं। -Subhash Kamboj from Hafijpur is doing bee keeping after leaving his job

शहद के अलावा रॉयल जेली भी होती है तैयार

सुभाष मधुमक्खियों से केवल शहद ही नहीं बल्कि अन्य कई उत्पाद तैयार करते हैं। वे बी वेनम, रॉयल जेली, बी पॉलिन और कॉम्ब हनी आदि चीजें भी तैयार करते हैं। ये उत्पाद बाजार में महंगे दामों पर बिकते हैं।-Subhash Kamboj from Hafijpur is doing bee keeping after leaving his job

कौन-कौन सी परेशानियों का करना पड़ता है सामना?

मधुमक्खी पालन में सबसे बड़ी परेशानी है कि इसमें हर कदम पर जोखिम है। मधुमक्खी पालन के लिए एक ही स्थान पर रुककर काम नहीं किया जा सकता है। फूलों की खेती के लिहाज से अन्य प्रदेशों में कारोबार को शिफ्ट करना होता है। इसके लिए सबसे बड़ी चुनौती ट्रांसपोर्टेशन की होती है। ट्रांसपोर्टेशन के दौरान नुकसान होने का भी काफी डर रहता है। इनके बीमा की सुविधा उपलब्ध नहीं है और ना ही शहर के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है, जिस वजह से ज्यादा उत्पाद होने पर दाम में गिरावट आ जाती है। व्यवसायी को सुनसान जंगलों में रहकर जान जोखिम में रखते हुए शहद का उत्पादन करना पड़ता है इसलिए व्यवसाय के साथ-साथ व्यवसायियों का भी बीमा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। -Subhash Kamboj from Hafijpur is doing bee keeping after leaving his job

सुभाष कई किसानों को दे चुके हैं ट्रेनिंग

सुभाष विद्या प्रतिष्ठान स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी पुणे में किसानों के शिष्टमंडल को दो दिवसीय प्रशिक्षण दे चुके हैं। उन्होंने इस दौरान कई किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया और युवाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

Amit Kumar
Coming from Vaishali Bihar, Amit works to bring nominal changes in rural background of state. He is pursuing graduation in social work and simentenusly puts his generous effort to identify potential positivity in surroundings.

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