Wednesday, October 5, 2022

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साइकिल पर फेरी लगाकर कपड़ा बेच पिता ने पढ़ाया, बिहार के लाल ने IAS बन परिवार की मान बढाई

हर मां-बाप का सपना होता है कि वह अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दे कर ऊंचाइयों के शिखर तक पहुंचाएं। वहीं दुसरी तरफ हमलोगों ने देखा होगा कि कई बच्चे अपने माता-पिता के संघर्ष और अपने जीवन में कुछ अच्छा करने के सोच के साथ हीं अच्छी शिक्षा के स्तर तक पहुंच जाते हैं तो कई बच्चे लाख प्रयास के बावजूद भी नहीं पढ़ पाते।

आज हम बात करेंगे, एक बहुत हीं गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक छात्र की जिसने अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत सफलता हासिल करते हुए अपने आईएएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया है।
कौन है वह शख्स?

हम अनिल बोसाक (IAS Anil Bosak) की बात कर रहे हैं, जो मूल रूप से बिहार (Bihar) के किशनगंज स्थित नेपालगढ़ कॉलोनी के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम संजय बोसाक़ है। बता दें कि, वे काफी गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई किशनगंज शहर के ओरियेंटल पब्लिक स्कूल से की तथा 2011 में अररिया पब्लिक स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई की। इसके बाद वे 12वीं की पढ़ाई बाल मंदिर सीनियर सेकेंड्री स्कूल किशनगंज से किए।

पिता फेरी लगा कर बेचते हैं कपड़े

अनिल बोसाक (IAS Anil Bosak) के घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। उनके पिता संजय बोसाक साइकिल से फेरी में कपड़े बेच कर जैसे-तैसे अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी का आलम यह था की फेरी के पैसो से भी उनका घर का खर्च नहीं चल पाता था।

कर्ज लेकर पिता ने पढ़ाया

गरीबी में पले-बढ़े अनिल बोसाक (IAS Anil Bosak) के पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए हमेशा हीं तत्पर रहते थे। यही कारण है कि, उन्होंने अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए महाजन से कर्ज भी लिया।

पिता के कर्ज के पैसों का मोल बेटों ने समझते हुए अच्छे से मन लगा कर पढ़ाई किया। बता दें कि, 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनिल ने आईआईटी में दाखिला हेतु जी-तोड़ मेहनत किया और इनकी मेहनत ने भी रंग लाई। वर्ष 2014 में उन्हें आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग में एडमिशन मिल गया।

पहली बार में नहीं हुई लक्ष्य की प्राप्ति

अनिल बोसाक (IAS Anil Bosak) ने IIT दिल्ली से वर्ष 2018 में सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की लेकिन वर्ष 2016 से ही वे यूपीएससी के परीक्षा की तैयारी में लग गए थे। यूपीएससी परीक्षा 2019 के तैयारी के दौरान उन्होंने अपने पहले प्रयास में हीं 616 रैंक हासिल की। इस रैंक के मुताबिक इनकी नौकरी लगी लेकिन वे आईएएस अधिकारी बनने के हीं जिद पर थे। इसके बाद उन्होंने अपने आईएएस बनने के लक्ष्य के साथ हीं नौकरी के साथ हीं साथ फिर से यूपीएससी की तैयारी शुरु कर दी।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता

अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत सफलता हासिल करने वाले अनिल बोसाक (IAS Anil Bosak) ने अपने पहले प्रयास में मन मुताबिक रैंक हासिल करने में असफल रहें। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा 2020 में अपने दूसरे प्रयास में 45वीं रैंक हासिल करके अपने परिवार के साथ हीं साथ पूरे समाज का नाम रोशन किया है।

लोगों के लिए बने हैं प्रेरणा

अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत सफलता हासिल करने वाले अनिल बोसाक (IAS Anil Bosak) आज के समय में हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उन्होंने अपने जीवन में तमाम कठिनाईयों का सामना करते हुए संघर्ष जारी रखा। उनके संघर्ष का हीं परिणाम है कि उन्होंने अपने दूसरे हीं प्रयास में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अपना आईएएस बनने का सपना साकार किया।

निधि भारती
निधि बिहार की रहने वाली हैं, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी बतौर शिक्षिका काम करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही निधि को लिखने का शौक है, और वह समाजिक मुद्दों पर अपनी विचार लिखती हैं।

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