Wednesday, October 5, 2022

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10वीं में मिले थे केवल 44.5 प्रतिशत अंक, मोमबत्ती की रौशनी में पढ़कर बने आईएएस अफसर

आमतौर पर हमलोगों ने अपने यहां देखा होगा कि लोग अपने पिछ्ली सफलताओं और असफलताओं को ध्यान में रखते हुए खुद से अपनी आगे की कामयाबी का अंदाजा लगाते हैं।

कई बार तो ऐसा होता है कि,् लोग अपनी पिछ्ली असफलताओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की उम्मीद को छोड़ देते हैं। वे अपनी कामयाबी का अंत बिना प्रयास किए ही तय मान लेते हैं लेकिन यह बिल्कुल हीं गलत बात है। मेहनत और संघर्ष के बदौलत कोई भी शख्स कामयाबी पा सकता है।

आज हम बात करेंगे, एक ऐसे हीं शख्स की जिन्होंने अपनी शुरुआती विफलताओं को ध्यान में रखे बगैर जी-जान लगा कर मेहनत की और सफलता भी हासिल की।

कौन है वह शख्स ?

हम अवनीश शरण (IAS Awanish Sharan) की बात कर रहे हैं, जो मूल रूप से बिहार (Bihar) के समस्तीपुर (Samastipur) के एक छोटे से गाँव केवटा के रहने वाले हैं। उनका बचपन काफी संघर्ष में गुजरा है। वें पढ़ाई के दौरान शुरुआती समय में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते थे। ऐसे बाद में उन्होंने अपने लक्ष्य को आईएएस के रुप में चुना तथा उसे पाने के लिए काफी संघर्ष किया और सफलता भी हासिल की। ―Success story of IAS Awanish Sharan.

10वीं में मिले थे 44.5% मार्क्स

एक समय अपने देश के कुछ राज्यों में असफलता के कारण कुछ छात्रों ने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया था। उस समय छात्रों को प्रोत्साहित करने के मकसद से आइएएस अधिकारी अवनीश शरण (IAS Awanish Sharan) ने अपनी 10वीं और 12वीं क्लास के बोर्ड परीक्षाओं के नंबर फेसबुक पर साझा किया। उन्हें 10वीं में 44.5, 12वीं में 65% और स्नातक में 60.7% नंबर मिले थे।

पढ़ने के लिए घर पर नहीं थे लाईट

बचपन में काफी गरीब परिवार में पले-बढ़े अवनीश शरण ने बहुत हीं अभाव में शुरुआती जीवन बिताया है। एक समय ऐसा था कि उनके घर में लाईट तक की व्यवस्था नहीं थी और वें लालटेन की रौशनी में पढ़ाई करके अपनी मुकाम को हासिल करने के तरफ बढ़े। बाद में उनकी यह संघर्ष रंग लायी और उन्होंने यूपीएससी पास करके अपना लक्ष्य हासिल करते हुए आईएएस बनने में कामयाबी पायी।

कैसे आया आईएएस बनने का विचार?

अवनीश शरण (IAS Awanish Sharan) ने अपने आईएएस बनने के ख्याल के बारे में बात करते हुए बताया कि ‘कई बार गाँव में कोई कार्यक्रम के दौरान जब आईएएस अधिकारी आते थे तो उनका काम मुझे प्रभावित करता था। ग्रेजुएशन के दौरान एक युवा आईएएस मेरे कॉलेज में निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। उनकी कार्यशैली ने मुझे काफी प्रभावित किया। एक आईएएस ने इंक्रोचमेंट के खिलाफ बढिय़ा काम किया था। यह चीजें देखकर ही लगा कि आईएएस बनकर मैं ज्यादा बेहतर कर पाऊंगा।’
उस समय से उन्होंने आईएएस का लक्ष्य बना करके तैयारी करना शुरू कर दिया। ―Success story of IAS Awanish Sharan.

मेहनत के बदौलत मिली सफलता

आईएएस बनने का लक्ष्य तय करने वाले अवनीश शरण ने अपने लक्ष्य के प्राप्ति के लिए काफी मेहनत और संघर्ष किया। उनका बचपन काफी गरीबी में गुजरा है। अंततः वे अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत अपना लक्ष्य हासिल करने में कामयाब रहें।

साल 2017 में आएं चर्चा में

आईएएस अधिकारी अवनीश शरण (IAS Awanish Sharan) वर्ष 2017 में तब चर्चा में आएं जब वे बतौर जिलाधिकारी अपनी पत्नी को डिलीवरी के दौरान सरकारी अस्पताल में इलाज करवाए। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कुल में करवाया। उनके इस कदम के बाद लोगों ने उनकी काफी सराहना की और उस समय वें चर्चा का विषय बन गए। ―Success story of IAS Awanish Sharan.

लोगों के लिए बने हैं प्रेरणा

बचपन काफी गरीबी और संघर्ष से गुजारने वाले अवनीश शरण ने अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की है।

उनकी सफलता और संघर्ष की यह कहानी आमजन के लिए बहुत हीं प्रेरणादायी है। उनकी कामयाबी की कहानी वाकई में प्रेरणादायी है। इसके अलावें उन्होंने अपनी पत्नी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में करवायी तथा अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कूल में करवाई, जिससे लोगों का झुकाव सरकारी स्कुल तथा अस्पतालों के तरफ हो। उनकी यह सकारात्मक कदम लोगों के लिए बहुत हीं प्रेरणादायी है।

निधि भारती
निधि बिहार की रहने वाली हैं, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी बतौर शिक्षिका काम करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही निधि को लिखने का शौक है, और वह समाजिक मुद्दों पर अपनी विचार लिखती हैं।

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