Tuesday, October 4, 2022

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20 वर्ष की उम्र में आंखों की रौशनी खोए, कठिन परिश्रम से UPSC ऑल इंडिया में 7वीं रैंक हासिल कर बने IAS अधिकारी: प्रेरणादायक

हमारे जीवन में कई ऐसी मुश्किल आती है जो हमे कमजोर होने पर मजबूर कर देती है। परंतु वही समय होता है, अपनी हिम्मत दिखाने का अगर उस समय में हम हिम्मत हार जाते है तो हमारी पूरी जिंदगी पर उस समय का बुरा प्रभाव पड़ता है। और इसी को जिंदगी कहा गया है। बिना उतार चढ़ाव के कोई जिंदगी नही है। परेशान तो सभी रहते है। परंतु उस परेशानी का हल निकालना कुछ ही लोगो को आता है। जो लोग अपनी मुश्किलों का सामना करते रहते हैं और कभी हिम्मत नही हारते, हर मुश्किल का डट कर सामना करके उसका हल कही न कही से निकाल ही लेते है। वही जिंदगी में सफल हो पाते हैं।

आज हम बात करेंगे एक ऐसे शख्स की जिनकी जिंदगी में ऐसी मुश्किलें आई जो उन्हे अपना लक्ष्य प्राप्त करने से रोकती रही। परंतु उन्होंने हार नही मानी और हमेशा आगे बढ़ते चले गए। यूपीएससी की परीक्षा देकर आईएएस बनना बहुत लोगो का सपना होता है। पर वह सपना बहुत कम लोगो का साकार हो पाता है।

कौन है वह शख्स….

जिनके बारे में आज हम बात करने जा रहे हैं, उनका नाम सम्यक जैन (samyak jain) है। जो कि रोहिनी, दिल्ली के रहने वाले है। पढ़ाई में यह बचपन से ही होशियार थे। परंतु मात्र 20 साल की उम्र में इनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। यह देख नही सकते थे। फिर भी इन्होंने कभी हार नही मानी और कई डिग्री हासिल की। सबसे पहले इन्होंने इंग्लिश ऑनर्स की डिग्री हासिल की। यह डिग्री इन्होंने दिल्ली की यूनिवर्सिटी से हासिल की। इसके बाद इन्होंने इंग्लिश जर्नलिज्म का कोर्स किया। और फिर इन सबके बाद भी इन्होंने एक और डिग्री हासिल की और वह डिग्री थी एमए(MA) की इन सबके बाद भी उनकी पढ़ाई का यह अंत नहीं था। उन्होंने आगे के लिए बहुत कुछ सोच रखा था।

यूपीएससी की परीक्षा……

इन सभी डिग्री को हासिल करने के बाद भी सम्यक में कुछ करने का हौसला अभी बाकी था। वह कुछ अलग करके अपना नाम बनाना चाहते थे। तब उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने की सोची और दो साल पहले यूपीएससी की परीक्षा भी दी। परंतु वह असफल रहे। उसके बाद भी उन्होंने हार नही मानी दुबारा तैयारी की ओर अगले साल ही फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी। इस बार उन्हे सफलता मिली। और यह कोई छोटी सफलता नहीं थी। हम सब यह बहुत अच्छे से जानते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा में पास होना कोई आसान बात नहीं है। और सम्यक तो अपनी आंखों की रोशनी खो बैठे थे। उसके बाद भी उन्होंने मेहनत करके इस परीक्षा को देने की ठानी और सिर्फ पास ही नही उन्होंने इस परीक्षा में 7वी रैंक हासिल की। जो की बिलकुल भी आसान बात नहीं है। लोग यूपीएससी की परीक्षा में पास होने के लिए ही बहुत मेहनत करते है। और इस परीक्षा में इतनी अच्छी रैंक लाना तो लोग असंभव समझते है। सम्यक ने बताया कि उन्होंने भी कभी नही सोचा था कि यूपीएससी की परीक्षा में उनकी इतनी अच्छी रैंक आ पाएगी। परंतु जब उन्होंने अपनी रैंक देखी तो उनकी खुशी शब्दो में बया नही की जा सकती थी।

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किसने दिया साथ…..

सम्यक ने बताया कि यूपीएससी की परीक्षा देने के लिए उन्हे किसी न किसी की मदद चाहिए थी। क्योंकि वह अपनी आखों की रोशनी खो चुके थे जिसके कारण वह लिख नही सकते थे। और पढ़ाई करने के लिए भी किताबे इकट्ठी करना उनके लिए आसान नहीं था। तब उनकी मदद उनकी मां और दोस्तो ने की। आईएएस बनने के लिए तीन राउंड होते है। जिसमे से सबसे पहले वाले राउंड में सम्यक की मां ने उनकी मदद की। और परीक्षा की तैयारी करने के लिए उनके दोस्तो ने उनका पूरा साथ दिया। सम्यक बताते है कि वह अपनी माता और अपने दोस्तो के बिना इस परीक्षा को पास नही कर पाते। आज वह इतनी अच्छी रैंक ले है तो वह रैंक उन्हे उनकी मां और दोस्तो के बदौलत ही मिली है। आज कल के युवा जहां अपने से ऊपर किसी को उठता देख नही सकते वही सम्यक के दोस्त उनके सच्ची साथ बने और उनकी पूरी मदद की।

प्रेरणा…..

आज जिस तरह सम्यक ने हार न मानकर आंखों की रोशनी खोने के बाद भी यूपीएससी की परीक्षा 7वो रैंक से क्लियर करके दिखाई है। वह सबके लिए एक प्रेरणा है। जो लोग अपनी आंखों की रोशनी खो बैठते है। वह अक्सर अपनी पढ़ाई छोड़कर जिंदगी से हार मन लेते है। और आम लोग जो यूपीएससी की परीक्षा हर साल देते रहते है। परंतु असफल हो जाते है। वह भी हर मानकर अपने रास्ते बदल लेते है। परंतु सम्यक से हमे यह प्रेरणा मिलती है की भले ही हमारी जिंदगी में कितनी ही बड़ी मुश्किल क्यों ना आ जाए अगर हम किसी चीज को करने का जुनून रखते है तो वह जरूर पूरी होती है। उनकी आंखों की रोशनी न होने के बाद भी उन्होंने दिन रात मेहनत की और दूसरी बार में ही यूपीएससी क्लियर कर दिया। जिस तरह की हिम्मत उन्होंने दिखाई और अपनी अलग पहचान बनाई वह सचमुच तारीफ के लायक है।

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