Thursday, September 29, 2022

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पिता के मौत के बाद आर्थिक तंगी से जूझते हुए अपनी सच्ची लगन और मेहनत से बने IAS अधिकारी, कायम की प्रेरणा

काबिलियत तो वो होती है जब कोई विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहकर अपने कठिन मेहनत से लक्ष्य को हासिल करता है। आज एक ऐसे हीं बेहद होनहार और काबिल इंसान की जिन्होंने पिता के मौत के बाद खुद को संभाला, परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए खुद कभी भूखे पेट रहे, कभी बिस्कुट खाकर गुजारा किया लेकिन अपनी काबिलियत और परिश्रम के दम पर IAS अधिकारी बन सफलता की एक ऐसी प्रेरणा कायम की जो अनेकों युवाओं के लिए पथ-प्रदर्शक बनेगा। आईए जानते हैं इनके बारे में…

आज के इस प्रेरक कहानी में जिक्र IAS शशांक मिश्रा (Shashank Mishra) की जिन्होंने अपने जीवन में आर्थिक तंगी और मुश्किल हालातों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया और कामयाबी के शिखर तक पहुंचे ।

शशांक मिश्रा (Shashank Mishra) उत्तरप्रदेश के मेरठ (Merath) के निवासी हैं। शशांक जब 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे तब हीं साथ-साथ आईआईटी (IIT) की भी तैयारी करने लगे थे। अचानक शशांक के पिता का देहांत हो गया जिसके कारण उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पिताजी कृषि विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। किसी बच्चे के सर पर से पिता का साया छिन जाना क्या होता है, यह हम सब भली-भांति जानतें हैं। सर से पिता का साया छिन जाने के बाद शशांक को छोटी उम्र में ही घर की जिम्मेदारियां अपने सर पर उठानी पड़ी। उन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। शशांक के पास पढ़ाई की फीस देने के लिए भी पैसे नहीं थे। ऐसे हालातों में शशांक मिश्रा 12वीं में अच्छे नंबरों से पास हुए। अच्छे नम्बरों से पास होने के कारण उनके कोचिंग की फीस को कम कर दिया गया जिससे पैसों की तंगी से थोड़ी राहत मिली।

शशांक अपनी कड़ी मेहनत से आईआईटी (IIT) की परीक्षा में भी सफल हुए और 137वां रैंक हासिल किए। उसके बाद शशांक ने इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग से B.Tech किया। B.Tech करने के बाद शशांक की अमेरिका के मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी लग गईं। शशांक को इस कंपनी में अच्छे पैकेज की सैलरी मिल रही थी लेकिन उन्होंने नौकरी करने से मना कर दिया।

काम करने के साथ करते रहे तैयारी और पाई सफलता

शशांक का हमेशा से सपना था कि वह एक IAS बने। इसलिये उन्होनें मल्टी नेशनल कम्पनी में काम करने के साथ ही 2004 से यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा की तैयारी भी करने लगे। लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था। शशांक की आर्थिक परेशानी हटने के नाम नहीं ले रही थी। लेकिन शशांक ने ठान लिया था कि वह यूपीएससी की परीक्षा में सफल होकर रहेंगें। पैसों की कमी के कारण शशांक ने दिल्ली (Delhi) के एक कोचिंग सेंटर में पढ़ाने का काम शुरु किया। कोचिंग की आमदनी बहुत अधिक नहीं थी। यहां तक की उनको दिल्ली में किराया का रुम लेकर रहनें के लिये भी पैसें नहीं थे। शशांक प्रतिदिन मेरठ से दिल्ली का सफर तय करतें और ट्रेन में जो समय मिलता उसमें वह अपनी पढ़ाई करते। पैसों की कमी कुछ इस तरह थी कि रास्ते में भूख लगने पर भरपेट खाना खाने तक के लियें भी पैसे नहीं थे। तब वह बिस्किट खाकर अपना गुजार करतें थे। शशांक की जीवन में यह सब 2 साल तक ऐसे ही चलता रहा।

अडिग रहकर पाई सफलता

“इन्तज़ार का फल मीठा होता है।” शशांक ने UPSC की परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास कर लिया और उनका एलाइड सर्विस में चयन हो गया। लेकिन शशांक को तो किसी और मंजिल की चाह थी। एलाइड सर्विस में चयनित होने के बाद भी अपनी मंजिल को पाने के लिए वह प्रयासरत रहे। अंततः उनकी सच्ची लगन और कठिन मेहनत रंग लाई और वे दूसरे प्रयास में UPSC में 5वीं रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहरा दिया।

Vinayak Suman
Vinayak is a true sense of humanity. Hailing from Bihar , he did his education from government institution. He loves to work on community issues like education and environment. He looks 'Stories' as source of enlightened and energy. Through his positive writings , he is bringing stories of all super heroes who are changing society.

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