Friday, February 3, 2023

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नौकरी करते हुए तीन दोस्त जैविक खेती कर कमा रहे लाखों रूपए, YouTube से सीखी खेती

दोस्ती का रिश्ता सब रिश्तों से बढ़कर होता है लेकिन दोस्त अच्छे होने चाहिए। अगर दोस्त केयर करने वाला और साथ देने वाला मिल जाए तो हर काम आसान हो जाता है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र का काम हो। अगर आप मुसीबत में हो या फिर आप किसी काम में उलझें हों और वहां पर दोस्त साथ दे दे तो सभी काम आसानी और सफलतापूर्वक हो जाता है। आज हम आपको ऐसे ही तीन दोस्त के बारे में बताएंगे जो तीनों दोस्त साथ मिलकर खेतों में सफलता पाई। साथ ही साथ यह तीनों खेतों में 19 किस्म के फसल भी उगाए। आईए जानते हैं वे 3 दोस्त कौन-कौन से हैं।

तीन दोस्तों ने खेती में पाई सफलता

दोस्ती का स्थान सबसे अहम होता है ऐसे ही मध्य प्रदेश के सतना के रहने वाले तीन दोस्त अभिनव तिवारी, संजय शर्मा और हिमांशु चतुर्वेदी हैं। यह तीनों दोस्त अपनी प्रारंभिक शिक्षा साथ में ही किए हैं। 12 वीं तक पढ़ाई करने के बाद अलग-अलग जगहों पर नौकरी तो जरूर करते थे परंतु इन तीनों दोस्तों का दिल एक साथ रहता था। यह तीनों साइंस सब्जेक्ट के छात्र रह चुके हैं।

खास बात यह है कि इन तीनों दोस्तों को कृषि में काफी नॉलेज है। वैसे तीनों दोस्त अभिनव तिवारी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), संजय शर्मा पश्चिम मध्य रेलवे में ट्रेन मैनेजर और हिमांशु चतुर्वेदी मल्टीनेशनल फॉर्म कंपनी में नौकरी करते हैं। यह तीनों दोस्त आपस में कभी-कभी मिलते हैं लेकिन जब कोरोना जैसी आपदा आई तो तीनों अपने गांव आए और इन्होंने आपस में बातचीत करके जैविक खेती करने का फैसला किया जिस के बाद वे तीनों दोस्त मिलकर जैविक खेती किए जिसमें उन्हें सफलता प्राप्त हुई।

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4 एकड़ जमीन में उगाए 19 किस्म की फसलें

तीनों दोस्तों ने अपने जमीन पर साल 2020 से ही जैविक खेती करनी शुरू कर दिए। तीनों अपने चार एकड़ खेतों में 19 तरह के फसलें ऑर्गेनिक तरीके से उगा रहे हैं और वह ऑर्गेनिक खाद भी खुद तैयार कर रहे हैं जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है। इस चार एकड़ जमीन को इस प्रकार बांटा है कि एक इसमें सार्वेट क्वाटर, यूनिट और गोचर, गोशाला और वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जाता है और इसके 3 हिस्सों में 19 तरह के फसलें उगाई जाती है, जिसमें यह गाजर, आम, कटहल, सहिजन, हल्दी, आंवला, सीताफल, लहसुन, अमरुद, गरम मसाला, प्याज, धनिया, अनार, मेथी, एप्पल बेर, आलू, पपीता, अरहर जैसे फसलें उगाते हैं और इससे अच्छी कमाई करते हैं।

लोगों को दिए रोजगार

तीनों दोस्त इस जैविक खेती से काफी अच्छी कमाई कर रहे हैं। यह हरी सब्जियों से 40,000 की कमाई आलू से एक लाख 20 हजार की कमाई और 36 रुपए प्रति किलो की दर से 80 क्विंटल अदरक बेचकर इससे अच्छा मुनाफा कमाए हैं। साथ ही साथ केंचुआ खाद भी खुद ही तैयार करते हैं जिसका मार्केट में काफी डिमांड है। इससे भी अच्छी कमाई हो जाती है इसके अलावा अपने खेतों में आठ लोगों को रोजगार भी दे रखा है। अपनी कमाई के साथ-साथ उन लोगों को रोजगार देकर उनका भी भला कर रहे हैं जब यह तीनों दोस्त छुट्टी में अपने गांव वापस आते हैं तो ज्यादातर यह तीनों दोस्त का दिन खेतों में ही गुजरता है।

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खेती में मिली सफलता

यह तीनों दोस्त कोरोना काल के समय में फ्री घर में बैठे रहते थे जिस के बाद इन तीनों ने इस फ्री समय का उपयोग करने के बारे में सोंचा जिसके बाद अपना हाथ कृषि क्षेत्र में अपनाएं। इन तीनों दोस्तों ने 4 जून 2020 को कामधेनु कृषक लोक कल्याण समिति का गठन किया फिर बिरसिंहपुर के निकट ही चार एकड़ जमीन पर जैविक खेती शुरू कर दी। इन तीनों ने इंटरनेट के माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्र मंझगांव से जैविक खेती करने के गुण सीखे। खेती के लिए गाय, बैल भी खरीदे। साथ ही साथ फसलों में कीड़े को मारने के लिए उसके लिए बीजामृत, अग्रेयास्त्र, जीवामृत, नीमस्त्र, ब्रह्मास्त्र जैसे कीटनाशक और खाद भी खुद से तैयार करने का गुण सीखे और बनाएं और फसलों में कीट पतंग जैसे चीजों से छुटकारा पाने में सफल रहे।

प्रेरणा

इन तीनों दोस्तों से हमें ये प्रेरणा मिलती है कि एक साथ काम करने से हमलोग हर काम को असानी से पूरा कर सकते हैं और उसमें सफलता पा सकते हैं। साथ ही साथ ये तीनों दोस्त अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। अन्य किसान भी जैविक खेती कर के इन तीनो दोस्तों की तरह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

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