Friday, February 3, 2023

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भारत का इकलौता ट्रेन जिसमें सफर करने के लिए किराया नहीं लगता, ना हीं कोई टीटीई है मौजूद

हम लोग अपनी छुट्टियां मनाने या फिर इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हमेशा सफर करते हैं या फिर लोग प्रतिदिन किसी ना किसी काम से कहीं आते-जाते रहते हैं। इसके लिए हम लोगों को किराया भी देना पड़ता है। चाहे वह रेल हो, बस हो या फिर टैक्सी हो किराया देना पड़ता है।

वैसे भारतीय रेलवे की बात करें तो यह पूरी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारतीय रेलवे में प्रतिदिन करोड़ों यात्री सफर करते हैं। साथ ही साथ रेलवे में सफ़र करना काफी आनंदमय होता है परंतु आपको पता है कि अपने देश में एक ऐसी ट्रेन है जिस पर ना तो कोई TTE है और ना ही इस ट्रेन में कोई किराया देना पड़ता है। सुनकर बङा आश्चर्य होना लाजिमी है तो आईए जानते हैं ऐसी कौन सी ट्रेन है जिस पर किराया नहीं लगता है और यह देश के किस हिस्से में चलती है।

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देश की ऐसी ट्रेन जिस पर नहीं लगता किराया

भारत में एक ऐसी ट्रेन चलाई जाती हैं जिस पर ना तो कोई TTE है और ना ही किराया देना पड़ता है। इस ट्रेन का नाम भाखड़ा नंगल ट्रेन है जो पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सीमा पर भाखड़ा और नंगल के बीच चलाया जाता है। इस ट्रेन को भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड (Bhakhra Byas Managment Board) द्वारा चलाया जाता है। इस ट्रेन की शुरुआत 1948 में की गई थी। जब इस ट्रेन को चलाया गया था तब इसमें 10 बोगियां थी परंतु वर्तमान में इसमें सिर्फ 3 बोगियां हैं। शुरुआत में इस ट्रेन को स्टीम इंजन से चलाया जाता था परंतु वर्तमान में डीजल इंजन से चलाया जाता है। इस ट्रेन के कोच लकड़ी के बने हुए हैं। इस ट्रेन पर यात्रियों के लिए बिल्कुल मुफ्त सेवा दी जाती है। प्रतिदिन इस ट्रेन पर लगभग 800 लोग सफर करते हैं।

India's unique train, no fare was taken from the passengers

दूर-दूर से आते हैं सैलानी

भाखड़ा नंगल ट्रेन सतलज नदी से होकर शिवालिका पहाड़ियों से होती हुए 13 किलोमीटर की दूरी तय करती है। भाखड़ा नांगल बांध पूरी दुनिया में मशहूर है इसे देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं और यहां के खूबसूरती का आनंद उठाते हैं। बताया जाता है कि साल 2011 में BBMB ने वित्तीय घाटा को देखते हुए इस ट्रेन की फ्री सेवा बंद करने का फैसला लिया था परंतु बाद में फिर इस पर गंभीर चर्चा की गई और इस फैसले को हटाया गया।

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जब साल 1948 में भाखड़ा नंगल बांध बन रहा था तब रेलवे से मदद ली गई थी जिसमें इसी ट्रेन से काम करने वाले मजदूर अपने मशीनों को ले जाया करते थे। बांध बन जाने के बाद साल 1963 में इसे पब्लिक के लिए खुल दिया गया तब से लेकर अभी तक लोग यहां घूमने आते हैं और इस फ्री ट्रेन की सेवा का आनंद उठाते हैं।

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