Thursday, September 29, 2022

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पर्यावरण संरक्षण के लिए अनोखा प्रयास: गेहूं और चावल के भूसी से केरल के शख़्स ने बनाया एडिबल कप-प्लेट, इसे उपयोग के बाद खाया भी जा सकता है

आज के समय में लोग प्लास्टिक का काफी प्रयोग करने लगे है। आज कल लोगो को प्लास्टिक के बिना कुछ दिखाई ही नहीं देता। जिससे लोगो की सेहत पर काफी प्रभाव हो रहा है। ऐसे में एक शक्स ने प्लास्टिक का अनोखा उपाय ढूंढ निकाला है।

आइए जाने उस शक्स के बारे में।

आज हम जिस शक्स की बात कर रहे है । जिसका नाम विनय कुमार बालकृष्ण ( vinay Kumar balkrishan) है। जो केरल के एर्नाकुलम के रहने वाले है। जिन्हे प्रकृति से बहुत लगाव है। बालकृष्ण वर्ष 2013 मरिशास की एक कम्पनी में CEO के पद पर कार्य कर चुके है। और कई वर्षो तक बैंकिंग इंश्योरेंस मैं काम करने के बाद खुद का कुछ काम चाह।

कैसे आया विचार।

Vinay Kumar Balakrishnan

बालकृष्ण को प्रकृति से बहुत प्यार था। वे प्लास्टिक से सख्त नफरत करते थे । इसके लिए वे कुछ करना चाहते थे। जिससे पर्यावरण को बचाया जा सके और लोगो के सेहत को कोई नुकसान न हो। जिससे उन्होंने गेंहू और चावल के भूसे से डिस्पोजल क्रॉकरी बनाने का शोध शुरू कर दिया। उन्होंने बताया की लोग चावल और गेंहू के भूसे को ऐसे ही फेक देते है लेकिन वो स्वास्थ्य के लिए काफी फायिदेमंद है ।

बायोडिग्रेडेबल क्रॉकरी का आया विचार।

जैसे की हम लोग जानते है। की आज भी केरल में केले के पत्तो पर ही खाना परोसते है। क्युकी पत्तो पर खाना खाने से सेहत पर कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। यही से बालकृष्ण जी को आइडिया आया और यही से उन्होंने तुषान “Tooshan” नामक स्टार्टअप की नीव रख दी। क्युकी मालायम में केले के आधे कटे हुए पत्तो को तूशनिला कहा। जाता है। इसलिए बालकृष्ण ने अपने स्टार्टअप का नाम तुषान “Tooshan” रखा।

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रिसर्च की और किया मशीन का उत्पादन

हालाकि, बालकृष्ण ने अपने स्टार्टअप से पहले काफी रिसर्च की थी। जिसमे उन्हे पता चला की पोलैंड की कंपनी गेहूं और चावल के भूसे से क्रॉकरी बनाती है। जिसके बाद बालकृष्ण ने भारत में भी उन्हे प्लांट लगाने को कहा। लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। करीब डेढ़ साल बाद बालकृष्ण ने खुद k मशीन बनाई और उत्पादन शुरू किया। ये मशीन रोबोटिक है इस कार्य मेंCSIR- NIIST ने भी बालाकृष्णन की मदद की।

Edible Cup Plates

इस्तेमाल करने के बाद खाया जा सकता है।

आज बालकृष्ण का बिजनेस इतना आगे बड़ चुका है की आज ये कप प्लेट और स्ट्रॉ भी बनाते है । जिन्हे इस्तमाल करने के बाद खाया जा सकता है। और यह भी बता दे की बालकृष्ण द्वारा बनाई गई चीज माइक्रोवेव में भी इस्तेमाल कर सकते है। इस कंपनी द्वारा बनाए गए सभी प्रोडक्ट इको फ्रेंडली है। बता दे , की यदि कोई इस क्रॉकरी को खुद नहीं खाना चाहता तो, वे इसे जानवरो को खिला सकते है। इसके अलावा क्रॉकरी मिट्टी में खाद का काम भी करती है।

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