Thursday, September 29, 2022

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वो 7 समस्याएं जो पटाखे जलाने से उत्पन्न होती हैं, जान लीजिए उन समस्याओं को

दिवाली का त्योहार आने में बस कुछ ही दिन बाकी है। साल में एक बार आने वाले इस त्योहार का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है, खासकर बच्चों को क्योंकि इस त्यौहार में अनेक तरह के पटाखे बाजार में मिलने लगते हैं और दिवाली के दिन बच्चों की मस्ती देखते ही बनती है।

हालांकि यह बात हम बखूबी जानते हैं कि पटाखे जलाने से हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है, इसके बावजूद भी हम इस काम से बाज नहीं आते हैं। इसका यही कारण हो सकता है कि हमें इससे होने वाले नुकसान की सही जानकारी नहीं होती, तो वहीं कई बार हमें सबसे पहले अपनी मस्ती ही सुझती है।

आख़िर क्यों पटाखे नहीं जलाना चाहिए

पटाखों से निकलने वाले धुंए से हमारे पर्यावरण के साथ-साथ हमारी सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। एक रिसर्च में पता चला है कि आतिशबाजी की वजह से निकलने वाले केमिकल्स हमारे सांस लेने वाले हवा का स्तर बेहद खराब कर देते हैं और उसी हवा को हम सांस के रूप में लेते हैं, जो हमारे सेहत के लिए बेहद नुकसानदेय हैं। इन्हीं सभी कारणों से पटाखे नहीं जलाने की सलाह दी जाती है।

आइए जानते हैं आतिशबाजी से होने वाले नुकसान

  • सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (SPM) – यानी निलंबित कण, जिससे हमें आंख, नाक, गले से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसकी वजह से हमें सिर दर्द की भी समस्या झेलनी पड़ सकती है।
  • पटाखों की वजह से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण की वजह से हमारे सेहत को भी भारी नुकसान पहुंचता है। इससे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, सर्दी-जुकाम, COPD, निमोनिया, लैरिनजाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही इससे सांस की भी समस्या बढ़ सकती है।
  • पटाखों के फटने से निकलने वाले रंग को बनाने के लिए रेडियो एक्टिव और जहरीले तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है, जो कैंसर को बढ़ावा दे सकता है।
  • पटाखों के फटने से बहुत तेज आवाज़ (140 डेसिबल से भी ज्यादा) जा सकती है जबकि मनुष्यों के लिए मानक डेसिबल स्तर 60 डेसिबल ही है। यह पटाखों के मुताबिक आधे से भी कम है। मनुष्य की 85 डेसिबल से तेज आवाज सुनने से उनके सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

आतिशबाजी के डेसिबल स्तर बढ़ने से हमारे कान भी खराब हो सकते हैं या कान में तेज दर्द हो सकता है। साथ ही नींद में खलल पड़ना, उच्च रक्तचाप होना और यहां तक कि दिल का दौरा भी पड़ सकता है।

  • आतिशबाजी के बढ़ते स्तर के वजह से गर्भवती महिलाओं के बच्चों और सांस की समस्या से पीड़ित लोगों में बेचैनी के साथ-साथ अन्य भी कई दिक्कतें हो सकती है। साथ ही पटाखों से निकलने वाले हानिकारक धुएं की वजह से गर्भपात जैसी समस्या भी हो सकती है, ऐसे में आतिशबाजी के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर पर ही रहना ज्यादा सुरक्षित है।
  • पटाखों के फटने से या पटाखे जलाने से आग लगने जैसी समस्या भी हो सकती है, साथ ही इससे चोट भी लग सकता है। विशेषत: यह बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

आप भी यदि इस दिवाली पर ज्यादा पटाखे जलाने का प्लान बना रहे हैं तो कृपया सावधानी अवश्य बरतें, और दीयों की रोशनी तथा लाइट से जगमगाता हुआ दिवाली मनाएं।

Anita Chaudhary
Anita is an academic excellence in the field of education , She loves working on community issues and at the same times , she is trying to explore positivity of the world.

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